सेप्टिक टैंक की सफाई कर रहे थे दो कर्मचारी, जहरीली गैस ने पहले किया बेहोश, फिर घोंट दिया दम

नई दिल्ली में सेप्टिक टैंक साफ करते-करते दो लोगों की जान चली गई. (सांकेतिक तस्वीर)

नई दिल्ली में सेप्टिक टैंक साफ करते-करते दो लोगों की जान चली गई. (सांकेतिक तस्वीर)

नई दिल्ली में सेप्टिक टैंक ने दो की जान ले ली. दोनों कर्मचारी एक बैंक्वेट हॉल के टैंक की सफाई कर रहे थे. दोनों अंदर जाते ही जहरीली गैस का शिकार होकर बेहोश हो गए. उसके बाद उनकी मौत हो गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 1:14 PM IST
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नई दिल्ली. नई दिल्ली में एक बैंक्वेट हॉल के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 2 लोगों की मौत हो गई. घटना पटपड़गंज  इंडस्ट्रियल थाना इलाके में हुई. मृतक की पहचान त्रिलोकपुरी निवासी लोकेश और प्रेमचंद रूप में हुई है. पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में रखवा दिए हैं.

पुलिस के अनुसार दोनों कर्मचारी गुरुवार रात गाजीपुर रोड स्थित पर्ल ग्रैंड नाम के बैंक्वेट हॉल में सेप्टिक टैंक की सफाई कर रहे थे. ज़हरीली गैस की वजह से वह टैंक में ही बेहोश होकर गिर गए. सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों को बाहर निकाला. पुलिस ने दोनों को अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां डाक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया. पुलिस बैंक्वेट हॉल के मैनेजर व एक अन्य कर्मचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है.

सेप्टिक टैंक में हो रहे कई हादसे

गौरतलब है कि नई दिल्ली-एनसीआर में सेप्टिक टैंक में कई हादसे होने लगे हैं. न सफाई कराने वाले और न सफाई करने वाले सुरक्षा का इंतजाम करते हैं. इसी तरह की घटना पिछले साल बदरपुर इलाके में भी हुई थी. 11 अक्टूबर 2020 को सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे मजदूर और उसे बचाने गए मकान मालिक की जहरीली गैस की चपेट में आकर मौत हो गई थी. इस दौरान उनके साथ मौजूद ठेकेदार को बेहोशी की हालत में बाहर निकाल लिया गया था. पुलिस की जांच में पता चला था कि मरने वाले मकान मालिक का नाम सतीश चावला (60) और मजदूर का नाम देवेंद्र (38) था. इन सभी को बाहर निकालने के लिए दमकल कर्मियों को टैंक का लिंटर तोड़ना पड़ा था.
पुलिस के मुताबिक, सतीश चावला सपरिवार मोलड़बंद में रहते थे. घर से थोड़ी दूर पर ही चार मंजिला मकान किराये पर दे रखा था. मकान के बेसमेंट में तीन सेप्टिक टैंक हैं. सतीश ने टैंकों की सफाई के लिए लिए ठेकेदार मनोज को बुलाया था. मनोज, मजदूर देवेंद्र के साथ वहां पहुंचा. देवेंद्र ने टैंक की सफाई शुरू की जबकि मनोज टैंक से निकल रहे कूड़े को ट्रैक्टर से फेंकने का काम कर रहा था. देवेंद्र जैसे ही तीसरे टैंक में उतरा जहरीली गैस की चपेट में आकर बेसुध हो गया. मनोज उसे बचाने के लिए टैंक में उतरा और वह भी गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गया. दोनों को निकालने के लिए मकान मालिक सतीश टैंक में उतर गया. लेकिन टैंक में वह भी बेसुध हो गिर गया.
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