आतंकी संगठन से जुड़े 9 आरोपियों को NIA कोर्ट ने माना दोषी, 22 सितंबर को होगी सजा
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आतंकी संगठन से जुड़े 9 आरोपियों को NIA कोर्ट ने माना दोषी, 22 सितंबर को होगी सजा
कोर्ट जल्द सजा सुनाने वाली है. (File)

दिल्ली (Delhi) स्थित एनआईए (NIA) मुख्यालय में 9 सितंबर 2015 को 'जुनूद - उल - खलीफा - फिल - हिन्द' आतंकी संगठन के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

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  • Last Updated: September 12, 2020, 8:17 PM IST
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दिल्ली. केन्द्रीय जांच एजेंसी एनआईए (NIA ) की तफ्तीश रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS ) से जु़ड़े उसकी सहयोगी संगठन " जुनूद - उल - खलीफा - फिल - हिन्द"  के 9 आतंकियों के खिलाफ सुनवाई के बाद आतंकी गतिविधियों और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया है . दिल्ली स्थित पटियाला कोर्ट (Patiyala Court)  में एनआईए की विशेष कोर्ट में स्पेशल जज प्रवीण सिंह ने इस मामले में फैसला सुनाया है. दरअसल, दिल्ली स्थित एनआईए मुख्यालय में 9 दिसंबर 2015 को इस आतंकी संगठन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद कई राज्यों में इस मामले में सारे संदिग्ध आतंकियों के खिलाफ छापेमारी की गई थी.

छापेमारी के दौरान बरामद सबूतों और आतंकियों के दर्ज बयान के मुताबिक मामले में इस आतंकी संगठन के 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, इसी केस में 6 अगस्त 2020 में 6 अन्य आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था. यानी अब तक इस मामले में कुल 15 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दोषी मान चुकी है. इस मामले में कोर्ट की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी. सजा का ऐलान 22 सितंबर को सुनाया जाएगा.

क्या था इस आतंकी संगठन का उद्देश्य? 



आतंकी संगठन (Terrorist Organization)  " जुनूद -उल खलीफा -फिल - हिन्द '  दरअसल ये आईएसआईएस का ही एक सहयोगी संगठन है. इसके पीछे आतंकी युसूफ अल हिंदी उर्फ शफी अरमार उर्फ अनजान भाई है जो सीरिया में रहकर भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था. इस संगठन द्वारा काफी संख्या में जुड़े युवाओं को धर्म और देश के खिलाफ बरगलाने के बाद आतंकी संगठन में शामिल करने का काम किया जाता था. एनआईए के अधिकारियों के मुताबिक, आईएसआईएस ने इस संगठन को नए युवाओं को अपने मूल संगठन में भर्ती करवाने के लिए ही तैयार किया था. युवाओं का चयन सोशल मीडिया के आधार पर होता था. उसके व्यक्तिगत मसलों को एक गलत रंग देकर उन युवाओं को बरगलाया जाता था. इसके बाद उन्हें आतंकी संगठन में शामिल करवाया जाता था.
एनआईए कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए आतंकियों का नाम इस प्रकार से हैं

1. मोहम्मद नफ़ीस खान
2. अबू अनस
3. नजमुल हुडा
4. मोहम्मद अफजल
5. सुहैल अहमद
6. मोहम्मद उबैदुल्लाह खान
7. मोहम्मद अलीम हुसैन
8. मुफ्ती अब्दुस सामी कासमी
9. अमजद खान

कई राज्यों में इस आतंकी संगठन को स्थापित करना था लक्ष्य  

एनआईए की टीम ने इस मामले मेंं तफ्तीश करने के बाद साल 2016 -17 में 17 आरोपियों के खिलाफ पटिलाया हाउस स्थित एनआईए की कोर्ट में आरोप पत्र दायर किया था. एनआईए की जांच अधिकारी के मुताबिक, इस मामले में तफ्तीश के बाद दायर आरोप पत्र के मुताबिक आतंकी संगठन आईएसआईएस का तरीका इस नए संगठन को आगे बढ़ाने में काफी नया प्रयोग किया गया था. इसके चलते कई युवाओं को देश के अलग-अलग राज्यों से जोड़ा जा रहा था. हैदराबाद, तेलांगाना, कर्नाटक के बैंगलोर , महाराष्ट्र के पुणे, उत्तर प्रदेश के लखनऊ में इस आतंकी संगठन द्वारा अपनी पैठ जमाने की कोशिश की जा रही थी.

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काफी संख्या में युवाओं को  " जुनूद -उल खलीफा -फिल - हिन्द ' और आईएसआईएस संगठन में शामिल करने की योजना थी, लेकिन एनआईए के जांचकर्ताओं ने उस मंसूबों पर पानी फेर दिया. इसी संगठन से जुड़े आतंकी आशिक अहमद जब पश्चिम बंगाल के हुगली इलाके से गिरफ्तार हुआ उसने इस बात को स्वीकार किया था कि तृणमूल कांग्रेस (TMC ) के एक विधायक की हत्या करने का उसे निर्देश मिला था. आशिक अहमद पहले इंजीनियर था, लेकिन आतंकियों द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाए गए जाल में फंसकर वो आतंकी गतिविधियों में फंस गया. बाद में इसी आतंकी संगठन का वित्तमंत्री या वित्त प्रमुख मोहम्मद  अनीस खान ने आशिक अहमद को पूरा बंगाल का चार्ज दे दिया और बड़े आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने का निर्देश दिया गया था. ऐसे ही कई युवाओं को यूपी के कई शहरों , कस्बों से चुना गया , जिसको बरगलाने के बाद इस आतंकी संगठन में शामिल किया गया था. हालांकि, अब ये देखना लाजमी होगा कि एनआईए की ये विशेष अदालत 22 सितंबर को उन 9 आतंकियों के खिलाफ क्या सजा का ऐलान करने वाली है.
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