निर्भया केस: वकील ने अक्षय को फांसी से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दी ये दलीलें, सब रहीं नाकाम
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निर्भया केस: वकील ने अक्षय को फांसी से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दी ये दलीलें, सब रहीं नाकाम
16 दिसंबर 2012 की रात को चलती बस में एक 23 साल की पैरामेडिकल स्टूडेंट के साथ 6 लोगों ने गैंगरेप किया था.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रिव्यु पिटिशन खारिज करते हुए कहा, हमें वर्ष 2017 में सुनाए मौत की सजा के फैसले पर पुनर्विचार का कोई आधार नहीं मिला. साथ ही कहा कि पुनर्विचार याचिका (Review Petition) किसी अपील पर बार-बार सुनवाई के लिए नहीं है

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  • Last Updated: December 18, 2019, 2:47 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में 'निर्भया' गैंगरेप (Nirbhaya Case) के एक दोषी अक्षय कुमार सिंह (Akshay Kumar Singh) की रिव्यु पिटिशन (Review Petition) खारिज हो गई है.

अक्षय के वकील एपी सिंह ने कोर्ट में तमाम तरह की दलीलें दकर अपने मुवक्किल को फांसी से बचाने की पूरी कोशिश की. उन्होंने समीक्षा याचिका पर सुनवाई के दौरान सतयुग, त्रेता से लेकर दिल्ली प्रदूषण तक का हवाला दिया, लेकिन उनकी ये दलीलें जस्टिस आर. भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस ए एस बोपन्ना की बेंच को संतुष्ट नहीं कर पाईं.

अक्षय के वकील एके सिंह ने पहले तो इस मामले को तेज़ी से निपटाए जाने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, 'इस केस में सरकार इतनी तेजी क्यों दिखा रही है? कई गंभीर मामले पड़े हैं. साफ तौर पर यह राजनीतिक एजेंडा है.' इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'सतयुग, त्रेतायुग की तुलना में वैसे भी आज लोग बहुत कम जी रहे हैं. दिल्ली में प्रदूषण के कारण लोगों की उम्र यूं भी कम हो जा रही है. भारत अहिंसा का देश है. कमजोरों को मदद पहुंचाने का काम करना चाहिए. फांसी मत दीजिए. फांसी की सजा मानवाधिकार का हनन है.'



 






हालांकि अक्षय के वकील की ये दलीलें सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच को संतुष्ट नहीं कर पाई और उन्होंने अपने फैसले में अक्षय की फांसी की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि दोषी का गुनाह माफी लायक नहीं है.

वहीं फैसले के बाद अक्षय के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि दोषी राष्ट्रपति (President) के पास दया की अपील करना चाहता है. इसके लिए उसे तीन हफ्ते का समय दिया जाए

सुनवाई में दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर विरोध करते हुए कोर्ट से कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने के लिए एक सप्ताह का समय काफी है. वहीं अदालत ने कहा कि दोषी दया याचिका दायर करने के लिए कानून के तहत निर्धारित समय ले सकता है. हालांकि कोर्ट ने राष्ट्रपति के सामने दया याचिका (मर्सी अपील) दायर करने के लिए समय सीमा तय करने के बारे में टिप्पणी करने से परहेज किया.



सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमें वर्ष 2017 में सुनाए मौत की सजा के फैसले पर पुनर्विचार का कोई आधार नहीं मिला. साथ ही कहा कि पुनर्विचार याचिका किसी अपील पर बार-बार सुनवाई के लिए नहीं है.

सात साल पहले छात्रा का अपहरण कर बस में हुआ था गैंगरेप
बता दें कि 16-17 दिसंबर, 2012 की रात दक्षिण दिल्ली के मुनिरका में बस स्टॉप से पारामेडिकल की छात्रा 'निर्भया' का अपहरण कर छह लोगों ने उसके साथ बस में बर्बरतापूर्ण तरीके से गैंगरेप किया था. वारदात को अंजाम देने के बाद उसे बुरी तरह जख्मी हालत में सड़क पर फेंक दिया गया था. घटना के तेरह दिन बाद 29 दिसंबर को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में इलाज के दौरान 'निर्भया' की मौत हो गई थी. इस मामले में निचली अदालत ने चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है, जिसे बाद में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है.

इस मामले के छह दोषियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी. जबकि एक अन्य जो नाबालिग था, उसे जुविनाइल जस्टिस बोर्ड ने दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनायी थी. इस दोषी किशोर को सुधार गृह में तीन साल गुजारने के बाद रिहा कर दिया गया था.

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