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निर्भया मामला: दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मुकेश की याचिका हुई खारिज

याचिका में मृतकों का लेखा-जोखा रखने वाली समिति (डेथ ऑडिट कमिटी) को रद्द करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था.

याचिका में मृतकों का लेखा-जोखा रखने वाली समिति (डेथ ऑडिट कमिटी) को रद्द करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था.

Nirbhaya gang Rape Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषी मुकेश की याचिका को खारिज कर दिया है. इस याचिका में मौत की सजा का विरोध करते हुए अपील की गई थी.

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    नई दिल्ली. निर्भया मामले में दोषी फांसी से बचने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है. इस मामले में एक दोषी मुकेश की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. दोषी मुकेश ने एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें उसने इस मामले में आदेश को चुनौती देते हुए दावा किया कि था कि गैंगरेप के वक्त वो दिल्ली में मौजूद नहीं था. इस याचिका में मुकेश के फांसी की सजा का विरोध करते हुए अपील की गई थी. बता दें, इस मामले में चारों दोषियों को 20 मार्च को फांसी होनी है.



    कोर्ट ने कही ये बात
    न्यायमूर्ति ब्रृजेश सेठी ने कहा कि निचली अदालत के विस्तृत और तर्कपूर्ण आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं है. हाईकोर्ट ने आगे कहा कि यह बताने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं है कि इस मामले में मुकदमा किसी भी साक्ष्य को छिपाने के कारण प्रभावित हुआ. कोर्ट ने मुकेश सिंह की याचिका खारिज करते हुए कहा, 'निचली अदालत की ओर से पारित किए गए आदेश में कोई झोल, अवैधता या अनियमितता नहीं है.'

    निचली अदालत ने खारिज की थी याचिका
    दरअसल, निचली अदालत ने मंगलवार को उसकी याचिका को खारिज कर दिया था और बार काउंसिल ऑफ इंडिया से कहा था कि उसके वकील को परामर्श दिया जाए. पांच मार्च को एक निचली अदालत ने मुकेश, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय सिंह को फांसी देने के लिए नया मृत्यु वारंट जारी किया था.

    दोषियों के परिजनों ने मांगी इच्छामृत्यु
    इस मामले में दोषियों के परिजनों ने राष्ट्रपति को लेटर लिखा था. इस लेटर में परिजनों ने इच्छामृत्यु (euthanasia) की अनुमति मांग की थी. इस लेटर में कहा है कि हम देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और पीड़िता के माता-पिता से अनुरोध करते हैं कि वे हमारे अनुरोध को स्वीकार करें और हमें इच्छामृत्यु की अनुमति दें. उन्होंने कहा कि हमें इच्छा मृत्यु देने से भविष्य में होने वाले किसी भी अपराध को रोका जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर हमारे पूरे परिवार को इच्छामृत्यु दी जाती है तो निर्भया जैसी दूसरी घटना को होने से रोका जा सकता है.

    दोषियों के परिजनों ने कहा है कि ऐसा कोई पाप नहीं है, जिसे माफ नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पहले ही देश के महापापियों को माफ किया जाता रहा है. बदले की परिभाषा शक्ति नहीं है. क्षमा करना ही सबसे बड़ी शक्ति का उदाहरण है. गौरतलब है कि निर्भया के सभी दोषियों विनय शर्मा, अक्षय सिंह ठाकुर, पवन गुप्ता और मुकेश को 20 मार्च को फांसी होनी है.

    (इनपुट भाषा से भी)



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