निर्भया मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दुर्भाग्यपूर्ण, दोषी का प्रदूषण के आधार पर याचिका दाखिल करना
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निर्भया मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दुर्भाग्यपूर्ण, दोषी का प्रदूषण के आधार पर याचिका दाखिल करना
निर्भया कांड के दोषी पवन कुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. (News 18 Creative)

निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले (Nirbhaya gang rape and murder case) में दोषी पवन कुमार गुप्ता (Pawan kumar gupta) ने दावा किया कि वह अपराध की घटना के समय यानी दिसंबर 2012 के समय नाबालिग था. इसलिए उसकी सजा पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.

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  • Last Updated: December 18, 2019, 11:00 PM IST
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नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले (Nirbhaya gang rape and murder case) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दोषियों में से एक की उन दलीलों को खारिज कर दिया, जिसने यह कहते हुए मौत की सजा सुनाने को व्यर्थ बताया था कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कारण पहले से ही लोगों का जीवन छोटा हो रहा है. अक्षय कुमार सिंह (33) ने पुनर्विचार याचिका में ‘कलयुग’ में व्यक्ति के मृत शरीर से बेहतर नहीं होने और दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर की वजह से जीवन छोटा होने के कारण मौत की सजा सुनाने को व्यर्थ बताया था, मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आर भानुमति की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए प्रदूषण को आधार रखे जाने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. पीठ में न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना भी शामिल थे. पीठ ने कहा, "हमें यह दुर्भाग्यपूर्ण लगता है कि इस तरह के गंभीर मामले में इस तरह के आधार उठाए गए है."

एक दोषी ने किया हाईकोर्ट का रुख
इससे पहले फांसी की सजा का सामना कर रहे चार दोषियों में से एक पवन कुमार गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया. दोषी पवन कुमार गुप्ता (Convict Pawan Kumar Gupta) ने अपनी याचिका में दावा किया कि वह दिसंबर 2012 में अपराध के समय नाबालिग था. दोषी पवन की याचिका पर गुरुवार को न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की कोर्ट में सुनवाई होगी.

घटना के समय नाबालिग घोषित करने का अनुरोध करते हुए पवन ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने उसकी उम्र का पता लगाने के लिए हड्डियों संबंधी जांच नहीं की. उसने जुवेनाइल जस्टिस कानून के तहत छूट का दावा किया.






नाबालिग होने के मुद्दे को कभी भी उठाया जा सकता है
अपनी याचिका में दोषी पवन कुमार गुप्ता ने कहा, "जेजे कानून की धारा 7ए में प्रावधान है कि नाबालिग होने का दावा किसी भी अदालत में किया जा सकता है. इस मुद्दे को किसी भी समय, यहां तक कि मामले के अंतिम निपटारे के बाद भी उठाया जा सकता है."

तिहाड़ में बंद है दोषी
बता दें, निर्भया गैंगरेप मामले में पवन कुमार गुप्ता को मौत की सजा सुनाई गई है. पवन इस समय तिहाड़ जेल में बंद है. उसने अनुरोध किया कि संबंधित प्राधिकरण को उसके नाबालिग होने के दावे का पता लगाने के लिए हड्डियों संबंधी जांच करने का निर्देश दिया जाए.

चारों दोषियों को फांसी की सजा
गौरतलब है कि पवन कुमार गुप्ता के अलावा मामले में तीन अन्य दोषी मुकेश, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई है. सभी की याचिका राष्ट्रपति के पास से भी खारिज कर दी गई है.



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