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निर्भया गैंगरेप: कोर्ट ने दोषी के वकील से पूछा- ढाई साल तक क्‍या डेथ वारंट का इंतजार कर रहे थे?
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Updated: January 15, 2020, 2:17 PM IST
निर्भया गैंगरेप: कोर्ट ने दोषी के वकील से पूछा- ढाई साल तक क्‍या डेथ वारंट का इंतजार कर रहे थे?
मुकेश की तरफ से कहा गया कि तिहाड़ जेल ने जो नोटिस सभी को सर्व किया था उसमें केवल दया याचिका का जिक्र था, (प्रतीकात्मक फोटो)

दिल्‍ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस मनमोहन (Justice Manmohan) ने कहा कि आपकी (मुकेश) अपील को साल 2017 में खारिज कर दिया गया था. आपने अपनी क्यूरेटिव और दया याचिकाएं क्यों नहीं दाखिल की थीं?

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  • Last Updated: January 15, 2020, 2:17 PM IST
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नई दिल्‍ली. निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gang Rape) और हत्‍या के दोषी मुकेश की ओर से दिल्‍ली हाई कोर्ट में डेथ वारंट को चुनौती दी गई, जिसपर बुधवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोषी की ओर से पेश वकील रेबेका जॉन की दलिलों पर बेहद तल्‍ख सवाल किए. दरअसल, मुकेश की तरफ से कहा गया था कि 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन (Curative Petition) इसलिए दाखिल नहीं हो पाई, क्योंकि जो दस्तावेज तिहाड़ जेल प्रशासन से मांगे गए थे वो समय पर नहीं मिले.

इस दलील पर जस्टिस ने सवाल किया- सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2017 में फैसला सुना चुका है. साल 2018 में पुनर्विचार अर्जी खारिज हो चुकी है, फिर क्यूरेटिव और दया याचिका दाखिल क्यों नहीं की गई? क्या दोषी डेथ वारंट जारी होने का इतंजार कर रहे थे? सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक, एक वाजिब समयसीमा में इन कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल हो जाना चाहिए. न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि आपकी (दोषी मुकेश) आपराधिक अपील को वर्ष 2017 में खारिज कर दिया गया था. आपने अपनी क्यूरेटिव और दया याचिकाएं क्यों नहीं दाखिल कर लीं? आप ढाई साल से क्या कर रहे थे? कानून आपको केवल उपचारात्मक और दया याचिका दायर करने के लिए एक 'उचित' समय प्रदान करता है.

उसमें केवल दया याचिका का जिक्र था
मुकेश की तरफ से कहा गया कि तिहाड़ जेल ने जो नोटिस सभी को सर्व किया था, उसमें केवल दया याचिका का जिक्र था, क्यूरेटिव का नहीं. साथ ही मुकेश की वकील ने कहा कि 5 जनवरी तक सुप्रीम कोर्ट बंद था और अगले दिन 6 जनवरी को खुला. इसी बीच वृन्‍दा ग्रोवर ने तिहाड़ जेल प्रशासन से क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने के लिए मुकेश के कुछ दस्तावेज मांगे थे. उसी दौरान 7 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वारंट जारी कर दिया. मुकेश की वकील ने दलील दी कि इस फैसले के मुताबिक, आखिरी सांस तक दोषी को अपनी पैरवी का अधिकार है. राष्‍ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज होने के बाद भी उसे 14 दिनों की मोहलत मिलनी चाहिए, ताकि इस दरम्‍यान वह अपने घरवालों से मुलाकात और बाकी काम कर सके.


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First published: January 15, 2020, 1:32 PM IST
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