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सुप्रीम कोर्ट और विधि आयोग ने फांसी को इसलिए बताया है संवैधानिक
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News18Hindi
Updated: March 20, 2020, 7:32 AM IST
सुप्रीम कोर्ट और विधि आयोग ने फांसी को इसलिए बताया है संवैधानिक
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्भया गैंगरेप केस की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

फांसी पर हमेशा उठते रहे हैं सवाल लेकिन विधि आयोग और सुप्रीम कोर्ट ने सबसे बेहतर तरीका फंदे पर लटका कर फांसी देने को पाया है. दीना बनाम भारत सरकार प्रकरण में कोर्ट ने यह पाया कि फंदे पर लटकाने की प्रक्रिया में कोई दुष्टता या उत्पीड़न नहीं है.

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नई दिल्ली. निर्भया केस (Nirbhaya Case) में दोषियों के वकील एपी सिंह की तरफ से दरिंदों की फांसी टलवाने की सारी कोशिश नाकाम हुई. उन्होंने हर एक पैंतरा अपनाया लेकिन अंतत: निर्भया को इंसाफ मिला. दोषियों की ओर से फांसी की सजा पर भी सवाल उठाए गए. ऐसा पहली बार नहीं है कि फांसी की सजा पर सवाल उठाए गए हों. जब-जब किसी अपराधी को फांसी की सजा देने की बारी आई, इस तरह की सजा देने पर सवाल भी उठे. इसे बर्बर बताते हुए इसकी संवैधानिकता पर सवाल किए गए. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिकाएं भी दायर की गईं, लेकिन कोर्ट ने फंदे पर लटकाकर फांसी देने की प्रक्रिया को बर्बर या अमानवीय न मानते हुए संवैधानिक ठहराया.

दीना बनाम भारत सरकार प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने यह पाया कि फांसी के फंदे पर लटकाना संवैधानिक रूप से मौत की सजा देने का वैध तरीका है. फंदे पर लटकाने की प्रक्रिया में कोई दुष्टता या उत्पीड़न नहीं है. फांसी के फंदे पर लटकाने को बिजली की कुर्सी अथवा गैस चैंबर या मृत्युदायी इंजेक्शन, गोली मारने में बदलने के तर्क को अस्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि फांसी के फंदे पर लटकाने के बदले इन विधियों में से कोई भी अधिक ठीक नहीं है.

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फांसी की सजा पर लंबे समय से सवाल उठाए जाते रहे हैं, लेकिन कोर्ट ने इसे वैध माना है




'आंखों देखी फांसी' नामक अपनी पुस्तक में वरिष्ठ पत्रकार गिरिजाशंकर ने फांसी की सजा पर विस्तार से लिखा है. वो लिखते हैं ‘फंदे पर लटकाकर सजा देने के शुरुआती दौर में अपराधी को पेड़ की किसी डाली में तब तक लटकाया जाता था, जब तक कि उसकी मौत न हो जाए. यही विधि पहले से निर्मित प्लेटफॉर्म पर खड़ा कर के फांसी के फंदे पर लटकाकर मौत देने के रूप में भारत सहित कई देशों में प्रचलित है.’ भारत में फंदे पर लटकाकर फांसी की सजा दिए जाने का कानूनी प्रावधान सी.आर.पी.सी. की धारा 354 (5) में है.



गिरिजाशंकर लिखते हैं कि फांसी की सजा पर गठित रॉयल कमीशन (1949-1953) ने पाया कि फंदे से लटकाकर देने वाली फांसी की सजा तुलनात्मक रूप से अधिक मानवीय है. विधि आयोग ने भी सजा देने के लिए फंदे पर लटकाने की प्रक्रिया को स्वीकार किया है.

माफी की सलाह पर निर्भया की मां ने क्या कहा था

सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की मां आशा देवी से अपनी बेटी के दरिंदों को माफ करने का अनुरोध किया था. इस आशा देवी ने बहुत नाराजगी जाहिर की. कहा था कि भगवान कहें तब भी दोषियों को माफ नहीं करूंगी. पूरा देश निर्भया के दोषियों को फांसी पर झूलता देखना चाहता है. ऐसे वकीलों की वजह से ही रेप पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिलता.

Nirbhaya Case: तिहाड़ जेल के बाहर सुबह के 5.30 बजते ही लहराया तिरंगा, गूंजा निर्भया जिंदाबाद | people-celebrate-and-distribute-sweets-outside-tihar-jail-where-nirbhaya-gang-rape-case-convicts-were-hanged
निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा के बाद तिहाड़ जेल के बाहर लोगों ने निर्भया जिंदाबाद के नारे लगाए.


फिलहाल, चारों हैवानों को फांसी हो चुकी है और निर्भया की मां ने 20 मार्च का दिन बेटियों के नाम किया है. उधर, केस की पैरोकार योगिता भयाना का कहना है कि फांसी की यह सजा बेटियों के प्रति गलत सोच और उनके खिलाफ होने वाले अपराध में कमी करेगी. ऐसी दरिंदगी की यही सजा है.

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First published: March 20, 2020, 7:27 AM IST
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