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निर्भया मामला: Mercy Petition पर कोर्ट नाराज, कहा- ऐसे तो लोगों का सिस्टम पर से भरोसा उठ जाएगा

Amit Singh | News18Hindi
Updated: January 15, 2020, 5:24 PM IST
निर्भया मामला: Mercy Petition पर कोर्ट नाराज, कहा- ऐसे तो लोगों का सिस्टम पर से भरोसा उठ जाएगा
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि उन्हें निचली अदालत के सेशन्स कोर्ट द्वारा जारी डेथ वॉरंट में कोई खामी नजर नहीं आ रही है.

निर्भया गैंगरेप मामले में दोषी मुकेश को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली. दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि उन्हें निचली अदालत द्वारा जारी डेथ वॉरंट में कोई खामी नजर नहीं आ रही है.

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  • Last Updated: January 15, 2020, 5:24 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली सरकार ने 2012 के निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में मृत्युदंड का सामना कर रहे चार गुनहगारों में एक मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश की है. बताया जा रहा है कि 32 वर्षीय मुकेश सिंह की दया याचिका पर सिफारिश अब केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी. मुकेश सिंह की ओर से याचिका दायर करने के अगले दिन दिल्ली सरकार ने ये सिफारिश की है.

दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं
निर्भया गैंगरेप मामले में दोषी मुकेश को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली. दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि उन्हें सेशन कोर्ट द्वारा जारी डेथ वॉरंट में कोई खामी नजर नहीं आ रही है. लिहाजा, अगर दोषी मुकेश को अपनी बात रखनी है तो सेशन कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जाकर कहे. दोषी मुकेश ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सेशन कोर्ट द्वारा जारी डेथ वॉरंट पर हाई कोर्ट रोक लगाए क्योंकि उसने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर कर दी है.

दोषियों को 14 दिन का समय

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने निर्भया मामले के दोषी मुकेश की याचिका पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले शत्रुघ्न चौहान vs यूनियन ऑफ इंडिया का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी हालत में निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी सुबह 7 बजे फांसी पर नहीं लटकाया जा सकता क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में कहा गया है कि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज होने के बाद दोषियों को 14 दिन का समय दिया जाएगा. इसलिए 21 जनवरी को वो सेशन कोर्ट जाएंगे और यथा स्थिति के बारे में बताएंगे. जो उस समय स्थिति होगी चाहे राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर चुके हैं या नहीं उसके बारे में बताएंगे और अगर राष्ट्रपति 21 तारीख तक दया याचिका खारिज कर देते हैं तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला शत्रुघ्न चौहान vs यूनियन ऑफ इंडिया का हवाला देते हुए, नए डेथ वॉरंट जारी करने को कहेंगे.

मुकेश की तरफ से दायर याचिका प्रीमेच्योर
हालांकि सुनवाई के दौरान राहुल मेहरा ने हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच से ये भी कहा कि मुकेश की तरफ से दायर याचिका प्रीमेच्योर है. लिहाजा, कोर्ट को इस पर कोई भी आदेश देने की जरूरत नहीं है. दोषी मुकेश की तरफ से रेबिका जॉन ने हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच से कहा कि दोषी मुकेश ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाई है जिस वजह से निचली अदालत द्वारा जारी डेथ वॉरंट पर रोक लगाई जाए.हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने नाराजगी में पूछे कई सवाल
रेबिका जॉन ने जब शत्रुघ्न चौहान vs यूनियन ऑफ इंडिया के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रपति जब मर्सी पिटिशन खारिज करेंगे तब उनके क्लाइंट को 14 दिन का समय मिलना चाहिए. दोषी मुकेश के वकील का पक्ष सुनने के बाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने नाराजगी में कई सवाल पूछे. डिवीजन बेंच ने पूछा कि आखिर मर्सी पिटिशन दायर करने में ढाई साल क्यों लगे? एक-एक करके अलग-अलग मर्सी पिटिशन दायर करने से देरी होगी और लोगों का सिस्टम पर से भरोसा उठेगा. 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज की तब से क्या आप डेथ वॉरेंट जारी करने का इंतज़ार कर रहे थे.

याचिका वापस लेने की गुहार
आखिर में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच जब फैसला सुना रही थी तभी दोषी मुकेश की वकील रेबिक जॉन ने अपनी याचिका वापस लेने की गुहार लगाई. लेकिन, कोर्ट ने कहा कि वो फैसला देंगे. हालांकि कोर्ट ने दोषी मुकेश को अपनी बात रखने के लिए निचली अदालत या सुप्रीम कोर्ट जाने को कह दिया है. हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने ये भी साफ किया कि डेथ वॉरंट पर वो रोक नही लगाएंगे. जो करना है वो सेशन कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट करेगा.

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First published: January 15, 2020, 4:58 PM IST
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