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निर्भया गैंगरेप मामलाः दोषी मुकेश ने मांगा 'जीने का अधिकार', कहा फांसी टाली जाए, पढ़िए अदालत की बहस
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Amit Singh | News18India
Updated: January 16, 2020, 4:59 PM IST
निर्भया गैंगरेप मामलाः दोषी मुकेश ने मांगा 'जीने का अधिकार', कहा फांसी टाली जाए, पढ़िए अदालत की बहस
इस मामले में दोषियों की तीसरी बार फांसी टल गई.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gangrape) के दोषी मुकेश ने फांसी टालने के लिए सेशन कोर्ट में याचिका दायर की. अदालत ने मामले पर तिहाड़ जेल (Tihar Jail) प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है.

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  • Last Updated: January 16, 2020, 4:59 PM IST
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नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप मामले (Nirbhaya Gangrape) में दोषी मुकेश को दिल्ली हाईकोर्ट (High Court) से राहत नहीं मिली. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सेशन कोर्ट द्वारा जारी मुकेश के डेथ वॉरंट पर अपने फैसले में कहा है कि उन्हें इसमें कोई खामी नजर नहीं आ रही है. हाईकोर्ट ने अभियुक्त को अपनी बात रखने के लिए सेशन कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जाने की सलाह दी. इसके बाद दोषी ने पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) के सेशन कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर मुकेश की ओर से वकील वृंदा ग्रोवर ने सुनवाई की. सेशन कोर्ट में मुकेश की वकील ने डेथ वॉरंट को रद्द करने की मांग की. वकील ने मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित होने की दलील देते हुए इस मामले में दिल्ली सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाया है. इधर, सेशन कोर्ट में मौजूद निर्भया के माता-पिता के वकील ने मुकेश की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई के योग्य नहीं है. इस पूरे मामले के दौरान कोर्ट में जीने का अधिकार को लेकर लंबी बहस हुई.

परिस्थितियां बदली, इसलिए रद्द हो डेथ वॉरंट
सेशन कोर्ट की सुनवाई के दौरान मुकेश की वकील की तरफ से कहा गया है कि दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है. पटियाला हाउस कोर्ट ने जो आदेश दिया, वह गलत नहीं था, लेकिन इस बीच परिस्थितियों में बदलाव आया है, जिसके आधार पर डेथ वॉरंट रद्द किया जाए. मुकेश की ओर से कहा गया कि कागजात कम होने की वजह से वह क्यूरेटिव याचिका दायर नहीं कर पाया था. इसलिए बाद में याचिका लगाई गई, जिसे 14 जनवरी को खारिज कर दिया गया. वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहीं भी अपने फैसले में यह नहीं कहा है कि क्यूरेटिव याचिका को देरी से दाखिल करने के आधार पर खारिज किया गया है.

'जीने का अधिकार' पर दी गई दलील



मुकेश की वकील ने कहा कि जेल मैनुअल के हिसाब से 22 जनवरी को फांसी नहीं दी जा सकती, क्योंकि दया याचिका अभी लंबित है. उन्होंने कहा कि इस मामले को जेल अथॉरिटी पर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि अगर 21 जनवरी को राष्ट्रपति दया याचिका ठुकराते हैं तो 22 जनवरी को जेल अथॉरिटी फांसी दे देगी. मुकेश की वकील ने दया याचिका की जानकारी देने को लेकर दिल्ली सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या ये राज्य सरकार की भूमिका नहीं थी कि वो कोर्ट को बताए? ग्रोवर ने कहा "नो इमोशन कैन टेक ओवर लॉ ऑफ द लैंड". सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में कहा है कि अगर कोई मौत का सजायाफ्ता कैदी भी है, तो उसकी आखिरी सांस तक जीने के अधिकार को बनाए रखा जाना चाहिए. उन्होंने शत्रुघ्न चौहान मामले का जिक्र करते हुए कहा कि मुकेश दया याचिका खारिज होने के बाद 14 दिन पाने का हकदार है.



तिहाड़ जेल पर उठाए सवाल
वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में कहा कि मुकेश ने तिहाड़ जेल से कुछ जरूरी कागजात मांगे, जेल प्रशासन ने हां या ना में जवाब ही नहीं दिया. आखिर जेल प्रशासन किसके इशारे पर काम कर रहा है. वो कानून का सम्मान नहीं कर रहा है. ऐसा व्यक्ति जो कानूनी सहायता ले रहा है, उसे फांसी पर चढ़ाने की तैयारी की जा रही है. सुनवाई के दौरान सेशन कोर्ट के जज ने कहा, 'जरूर कोई बात होगी. कोई नियम होगा, तभी हाईकोर्ट ने दोषी मुकेश को यहां भेजा है.' जज ने पूछा कि क्या मर्सी पेटीशन के स्टेटस के बारे में मालूम है? इस पर सरकारी वकील ने जवाब दिया कि नियमों के मुताबिक फिलहाल 22 जनवरी को फांसी नहीं हो सकती. पहले राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका पर फैसला आना चाहिए, इसके बाद 14 दिन का वक्त दिया जाना चाहिए.

कोर्ट ने तिहाड़ जेल से मांगी जानकारी
निर्भया मामले के दोषी मुकेश की वकील की दलीलों के बाद सेशन कोर्ट के जज ने कहा कि तिहाड़ जेल के सुप्रिंटेंडेंट ने जब हमें लिखा कि दया याचिका लगाई गई है तो इसका मतलब क्या है? क्या इसका मतलब ये नहीं है कि कानून के मुताबिक फांसी का समय दिया जाना चाहिए. निर्भया के माता पिता के वकील ने इसका विरोध किया. उनके वकील ने कहा कि 22 जनवरी को ही फांसी होनी चाहिए.

नई तारीख पर कोर्ट कर रहा विचार
सुनवाई के दौरान सेशन कोर्ट के जज ने कहा कि हम सिर्फ डेथ वॉरंट की नई तारीख पर विचार कर रहे हैं, लेकिन सजा के आदेश पर नहीं. जज ने कहा कि तिहाड़ जेल अथॉरिटी का जवाब चाहिए कि मामले में नियमों का पालन हुआ या नहीं. जज ने कहा कि जेल अथॉरिटी ने कोर्ट में कहा है कि दया याचिका गृह विभाग को भेजी गई है. सुनवाई के अंत में सेशन कोर्ट ने मुकेश की दया याचिका पर तिहाड़ जेल प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा कि हम फिलहाल फांसी की तारीख नहीं बढ़ा रहे, जेल प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांग रहे हैं. कोर्ट ने कहा कि जेल प्रशासन ने इस मामले में कोर्ट को पूरी जानकारी नहीं दी है. सेशन कोर्ट ने जेल अथॉरिटी को मामले में लिखित जवाब दाखिल करने को कहा है.

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First published: January 16, 2020, 4:30 PM IST
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