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Nirbhaya Case: दोषी पवन की याचिका पर बिफरीं निर्भया की मां, कहा- सिर्फ मुजरिम की ही सुनी जा रही

News18Hindi
Updated: January 20, 2020, 11:03 AM IST
Nirbhaya Case: दोषी पवन की याचिका पर बिफरीं निर्भया की मां, कहा- सिर्फ मुजरिम की ही सुनी जा रही
दोषी पवन गुप्ता की याचिका के लिये निर्भया की मां आशा देवी ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार (फाइल फोटो)

निर्भया (Nirbhaya) की मां आशा देवी (Asha Devi) ने कहा कि अपराधी जानबूझ कर केस को लंबा खींच रहे हैं. इस मामले में सब सिर्फ मुजरिम की ही सुन रहा है.

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  • Last Updated: January 20, 2020, 11:03 AM IST
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नई दिल्ली. निर्भया मामले (Nirbhaya Case) में सोमवार को एक और सुनवाई होने जा रही है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) मामले में मौत की सजा पाए एक दोषी की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उसके नाबालिग होने के दावे को उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है. दरअसल, दोषी पवन गुप्ता (Pawan Gupta) का दावा है कि वह अपराध के वक्त नाबालिग था. इस पर निर्भया की मां आशा देवी (Asha Devi) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा अपराधी जानबूझ कर केस को लंबा कर रहे हैं. सब सिर्फ मुजरिमों की ही सुन रहे हैं.

सरकार से भी नाराजगी
निर्भया की मां ने इस बाबत सरकार पर भी आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि जब दोषी के नाबालिग होने वाले दावे को एक बार खारिज किया जा चुका है तो फिर बार-बार इसे क्यों बीच में लाया जा रहा है. उन्होंने कहा, 'कहीं ना कहीं सरकार भी इसके लिए जिम्मेदार है. मुझे तो इस मामले में सरकार भी मुजरिम लग रही है, क्योंकि वह मामले को और लंबा खींच रही है. यह ड्रामा दूसरी बार हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश है कि आज (20 जनवरी 2020) एक गाइडलाइन जारी करे और सभी मुजरिमों को मर्सी और क्यूरेटिव पिटीशन एकसाथ दाखिल करने को कहे, ताकि केस और लंबा ना खिंचे.'

वकीलों पर पेनाल्‍टी लगाने की मांग

आशा देवी ने कहा, 'जब सभी ने एक जैसा गुनाह किया है और उन्हें एक साथ सजा मिली है तो अलग-अलग याचिकाएं क्यों दाखिल की जा रही हैं? सुप्रीम कोर्ट को उन वकीलों पर भी पेनाल्टी लगानी चाहिए जो मामले को लेट कर रहे हैं. ये शातिर लोग हैं, केस लंबा करने के लिए ही अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर रहे हैं.'

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
जस्टिस भानुमति की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ सोमवार को दोषी पवन की याचिका पर सुनवाई करेगी. दोषी पवन का दावा है कि घटना वाले दिन (16 दिसंबर 2012) को वह नाबालिग था. इसलिए उसे फांसी नहीं दी जा सकती. हालांकि, हाईकोर्ट पवन की नाबालिग होने की दलील को खारिज कर चुका है. इसके बाद पवन ने शुक्रवार (17 जनवरी) को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.1 फरवरी को होनी है फांसी
बता दें कि दिल्ली की एक अदालत ने मामले के चार दोषियों- विनय शर्मा (26), मुकेश कुमार (32), अक्षय कुमार (31) और पवन (25) के खिलाफ एक फरवरी के लिए शुक्रवार (17 जनवरी) को फिर से मृत्यु वारंट जारी किया है. इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मामले के एक अन्‍य दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी थी. अन्य तीन दोषियों ने दया याचिका दायर करने के संवैधानिक उपाय का फिलहाल इस्तेमाल नहीं किया है.

क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि दिल्ली में सात साल पहले 16 दिसंबर की रात को एक नाबालिग समेत छह लोगों ने चलती बस में 23 वर्षीय छात्रा से सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बस से बाहर सड़क के किनारे फेंक दिया था. सिंगापुर में 29 दिसंबर 2012 को एक अस्पताल में पीड़िता की मौत हो गई थी. मामले में एक दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. आरोपियों में से एक नाबालिग था, जिसे किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया था और तीन साल की सजा के बाद उसे सुधार गृह से रिहा किया गया था. शीर्ष अदालत ने अपने साल 2017 के फैसले में दिल्ली उच्च न्यायालय और निचली अदालत द्वारा मामले में सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा था.

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First published: January 20, 2020, 9:18 AM IST
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