आखिर महाराष्ट्र के चुनाव पर क्यों है नीतीश कुमार की नज़र?
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आखिर महाराष्ट्र के चुनाव पर क्यों है नीतीश कुमार की नज़र?
महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनावों पर भी नजर रख रहे हैं नीतीश कुमार.

बिहार (Bihar) की राजनीति में जेडीयू (JDU) की हालत फिलहाल वही है, जो करीब एक दशक पहले महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में शिवसेना (Shiv Sena) की थी. ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का चिंता करना जायज है.

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  • Last Updated: August 25, 2019, 4:54 PM IST
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भारतीय जनता पार्टी जिस तरह अपना सीमा विस्तार कर रही है, उसने विरोधियों के साथ-साथ सहयोगी दलों को भी अपनी रणानीति बदलने पर मजबूर कर दिया है. महाराष्ट्र में शिवसेना अभी तय नहीं कर पा रही है कि आखिर बीजेपी से अपने रिश्‍ते किस तरह निभाए. कई दशकों तक बीजेपी के बड़े भाई की भूमिका निभाने वाली शिवसेना इस बार बराबरी पर भी संतोष करने को तैयार है. हालांकि सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी उसे बराबरी का दर्जा देने के तैयार नहीं. ऐसे में शिवसेना आदित्य ठाकरे को सीएम उम्मीदवार घोषित करने की खबरों के बहाने बीजेपी पर दबाव बनाने में लगी है. लेकिन फिलहाल इसका असर भी बीजेपी नेतृत्व पर पड़ता नहीं दिख रहा है. इन सबके बीच नीतीश कुमार महाराष्ट्र की राजनीति पर पल-पल नजर गड़ाए हुए हैं.

बीजेपी के सीमा विस्तार की जद में अब सहयोगी दल
बात सिर्फ महाराष्ट्र की नहीं. बिहार में भी हालात कुछ इसी तरफ जा रहे हैं, लेकिन इस मामले पर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं. नीतीश कुमार के करीबी समझे जाने वाले एक नेता का दावा है कि नीतीश कुमार महाराष्ट्र की राजनीति पर करीब से नजर रख रहे हैं. बीजेपी-शिवसेना के रिश्‍ते का असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ेगा, क्योंकि बिहार की राजनीति में जेडीयू की हालत फिलहाल वही है, जो करीब एक दशक पहले महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना की थी. ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार का चिंता करना जायज है.

नीतीश कुमार के सामने ये है मुश्किल
जानकारों की मानें तो नीतीश कुमार के सामने संकट शिवसेना से ज्यादा गंभीर है. बीजेपी और शिवसेना का कोर वोट बैंक एक है, इसलिए दोनों पार्टियों के साथ जाने और अलग होने का असर कम पड़ता है. वहीं महाराष्ट्र में विपक्ष बहुत कमजोर हो चुका है, लेकिन बिहार में हालात अलग हैं. नीतीश कुमार बीजेपी के साथ रहकर भी अपना अल्पसंख्यक वोट बचाने की जुगाड़ में लगे रहते हैं. और यही वह कारण है जिसकी वजह से जेडीयू ने तीन तलाक, 370 और 35ए में एनडीए में रहते हुए भी सरकार के पक्ष में वोट नहीं किया.



आरजेडी के नए दांव ने नीतीश की मुश्किल बढ़ाई
नीतीश के सामने बीजेपी के साथ रहने और बिहार की राजनीति में अपने आपको बड़े भाई के रूप में रखने की बड़ी चुनौती है. एक ओर जहां दोनों पार्टियों का राजनीतिक एजेंडा अलग-अलग है. वहीं नीतीश का एक बड़ा वोट बैंक बीजेपी के साथ जाने को तैयार नहीं. लोकसभा चुनावों में भले ही दोनों गठबंधनों ने 40 में से 39 सीटें जीत ली हों, लेकिन राज्य के चुनावों में बीजेपी का भी एक बड़ा वोट बैंक और पार्टी के नेता नीतीश को नेता मानने के लिए तैयार नहीं है.

ऐसे में आरजेडी ने नीतीश कुमार को विपक्ष का चेहरा बनाने की पेशकश कर उनकी मुश्किल बढ़ा दी है. सूत्रों की मानें तो आरजेडी अपने इस दांव के बहाने अल्पसंख्यक वोटरों को ये संदेश देना चाहती है कि बीजेपी को रोकने के लिए वो कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है, लेकिन नीतीश बीजेपी का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हैं.

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