होम /न्यूज /दिल्ली-एनसीआर /बड़ी खबर: गंभीर स्थिति वाले मरीज को भर्ती करने से मना नहीं कर सकते अस्पताल, हेल्पलाइन नंबर भी किया जारी

बड़ी खबर: गंभीर स्थिति वाले मरीज को भर्ती करने से मना नहीं कर सकते अस्पताल, हेल्पलाइन नंबर भी किया जारी

अस्पताल ने परिवार को बताया कि उन्हें 27 मई की शाम को ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी

अस्पताल ने परिवार को बताया कि उन्हें 27 मई की शाम को ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी

गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन (Gautam Budha Nagar District Administration) ने एडवाइजरी (Advisory) जारी करते हुए कहा कि जि ...अधिक पढ़ें

    नोएडा. प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद अस्पताल-अस्पताल भटकने के बावजूद उपचार के अभाव में नौ महीने की गर्भवती महिला की 5 जून की रात को हुई मौत को लेकर गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन (Gautam Budha Nagar District Administration) बेहद सख्‍त है. इसी वजह से प्रशासन ने एडवाइजरी (Advisory) जारी करते हुए कहा कि जिले में कोई भी निजी या फिर सरकारी अस्पताल गंभीर स्थिति वाले किसी मरीज को भर्ती करने से इनकार नहीं कर सकता. यही नहीं, गंभीर मरीजों के लिए एक हेल्पलाइन 01202569901 भी शुरू की गई है, ताकि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान समस्याओं का सामना करने वाले इसे डायल कर मदद ले सकते हैं.

    गर्भवती महिला की मौत के मामले में जांच कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट
    जबकि गर्भवती महिला की मौत के मामले में जांच कर रही समिति ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को मंगलवार को सौंप दी. रिपोर्ट में कई सरकारी और निजी अस्पतालों की लापरवाही को महिला की मौत का जिम्मेदार बताया गया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है.

    आपको बता दें कि गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी निवासी गर्भवती महिला नीलम पत्नी विजेंद्र की चार दिन पहले उपचार के अभाव में जनपद गौतम बुद्ध नगर में मौत हो गई थी. जबकि नीलम के परिजनों का आरोप था कि उन्होंने सेक्टर 24 स्थित ईएसआईसी अस्पताल से लेकर ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल, जिला अस्पताल और कई निजी अस्पतालों में गर्भवती महिला को उपचार नहीं मिला और उसकी मौत हो गई. इसके बाद जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने अपर जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की थी.

    ईएसआईसी अस्पताल को माना जिम्‍मेदार
    कमेटी की जांच के आधार पर जिलाधिकारी ने ईएसआईसी अस्पताल सेक्टर 24 के निदेशक और उपचार व रेफर करने वाले चिकित्सक, एंबुलेंस के चालक को जिम्‍मेदार माना है. जबकि जिम्‍मेदार अधिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए प्रमुख सचिव श्रम उत्तर प्रदेश शासन और सचिव श्रम विभाग भारत सरकार नई दिल्ली के साथ डीजी राजकीय कर्मचारी जीवन बीमा निगम लखनऊ को पत्र के माध्यम से अनुरोध किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल में सारी सुविधाएं और वेंटिलेटर की उपलब्धता के बावजूद नीलम को कोविड-19 का संदिग्ध मानकर उपचार नहीं किया गया और उसे राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) ग्रेटर नोएडा रेफर दिया गया, उसे एंबुलेंस द्वारा जिला अस्पताल सेक्टर 30 नोएडा में ले जाकर बाहर छोड़ दिया गया. यही नहीं, मरीज को अस्पताल के किसी डॉक्टर या कर्मचारी के हवाले नहीं किया गया था.

    ये भी पढ़ें :- गाजियाबाद: स्पा सेंटर में चल रहे सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, शख्स ने ग्राहक बनकर किया ये काम

    Tags: Chief Minister Yogi Adityanath, Corona cure hospital, Coronavirus Epidemic, District Hospital, Lockdown 5.0, UP news, UP police

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें