जलालपुर : 15 दिनों में 20 से अधिक लोगों की मौत, एक बेटे को मुखाग्नि दे लौटे पिता तो दूसरा मिला मृत

नोएडा के जलालपुर गांव में लगातार मौतें हो रही हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

नोएडा के जलालपुर गांव में लगातार मौतें हो रही हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

गांववालों ने बताया कि बुखार के बाद गिरता जाता है ऑक्सीजन लेवल. गांव में न ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था है न अस्पतालों में बेड की. अधिकतर मौतें घर में ही हुई हैं. अभी भी 12 से ज्यादा लोग अस्पताल में हैं.

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नोएडा. दिल्ली एनसीआर के गांवों में भी अब कोरोना का कहर दिखने लगा है. नोएडा के ग्रेनो वेस्ट का जलालपुर गांव इन दिनों कोरोना संक्रमण और उससे होने वाली मौतों से त्रस्त है. यहां पिछले 10 से 15 दिनों में 6 महिलाओं सहित 20 से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आकर मौत की नींद सो चुके हैं. इस जलालपुर गांव में एक परिवार तो ऐसा भी है जहां एक दिन में दो जवान बेटों की मौत हो गई. यह पूरा परिवार सदमे में है. बेटों की मौत के बाद मां बार-बार बेहोश हो रही है. बताया जाता है कि इस घर में पिता एक बेटे को मुखाग्नि देकर आया तो दूसरा मृत मिला. मौत की वजह बुखार बताई जा रही है. ग्रामीणों की शिकायत है कि लगातार हो रही मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सुध नहीं ले रहा है.

एक बेटे को मुखाग्नि दे लौटे तो दूसरा मिला मृत

जलालपुर गांव के रहनेवाले अतर सिंह के दो बेटों पंकज और दीपक को अचानक बुखार आया. इसके साथ ही उन दोनों का ऑक्सीजन लेवल गिरता गया. इसी बीच पंकज की मौत हो गई. इस बेटे को मुखाग्नि देकर पिता घर पहुंचे ही थे कि दूसरे बेटे दीपक ने भी दम तोड़ दिया. इस गांव के रवींद्र भाटी का कहना है कि जलालपुर में अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. ग्रामीण बताते हैं कि मौतों का यह सिलसिला 28 अप्रैल से शुरू हुआ है. उन्होंने बताया कि ऋषि नागर का अचानक देहांत हो गया था. उसी दिन उनके बेटे का भी देहांत हो गया. ज्यादातर लोगों की मौत घरों में हुई है. सबके सिम्टम एक जैसे थे. पहले बुखार आना और फिर ऑक्सीजन लेवल का कम होता चला जाना. यहां के लोग बताते हैं कि गांव में ऐसा कोई घर नहीं बचा है, जहां यह बीमारी न पहुंची हो. लगातार हुई मौतों के बाद ग्रामीणों में दशहत है.

गांव के 12 से अधिक लोग अस्पताल में
रवींद्र भाटी बताते हैं कि यहां के 12 से अधिक लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं. कोरोना से हुई मौत के बाद भी जिला प्रशासन नींद से नहीं जागा है. गांव में कैंप लगवाकर कोरोना की जांच की मांग कई बार की जा चुकी है. उन्होंने बताया कि ज्यादातर मौतें ऑक्सीजन लेवल कम होने पर, बेड और वेंटीलेटर न मिलने से भी हुई है. इस बारे में डीएम सुहास एलवाइ का कहना है कि गांवों में सैनेटाइजेशन का काम कराया जा रहा है. साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट कर दिया गया है.

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