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जिंदगी को बदहाल करने वाला 'शोर' अब बिजली कंपनियों के लिए बन सकता है खुशखबरी

Anoop Mishra | News18India
Updated: November 29, 2019, 2:32 PM IST
जिंदगी को बदहाल करने वाला 'शोर' अब बिजली कंपनियों के लिए बन सकता है खुशखबरी
सीबीएसई रीजनल साइंस एग्‍जीबीश में देश-विदेश के करीब 64 स्‍कूलों के बच्‍चे शामिल हुए हैं.

बाल भवन पब्लिक स्‍कूल में आयोजित सीबीएसई रीजनल साइंस एग्जिबीशन में नौवीं के छात्र निष्‍कर्ष पोद्दार ने एक ऐसा मॉडल प्रस्‍तुत किया है, जिसमें शोर की मदद से बिजली बनाई जा सकती है.

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  • Last Updated: November 29, 2019, 2:32 PM IST
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नई दिल्‍ली (New Delhi) : शोर (Noise) हमारी जिंदगी के लिए बहुत बड़ी समस्‍या बन चुका है. आलम यह है कि इस शोर के चलते हमें कई तरह की स्‍वास्‍थ्‍य (Health) संबंधी समस्‍याओं से भी रूबरू होना पड़ रहा है. ऐसे में यह शोर हमारे लिए किसी तरह से फायदेमंद (beneficiary) भी हो सकता है. इस सवाल को सुनकर भले ही आपका दिमाग काम न करे, पर समयवेल स्‍कूल (Somerville School) में नौवीं कक्षा के छात्र निष्‍कर्ष पोद्दार (Nishkarsh Poddar) ने इस सवाल का उत्‍तर खोज निकाला है. निष्‍कर्ष पोद्दार ने ऐसे तकनीक हमसब के सामने पेश की, जिसमें शोर की मदद से हम बिजली बना सकते हैं. निष्‍कर्ष पोद्दार के इस मॉडल को तमाम बड़े विश्‍वविद्यालयों (Universities) से आए विशेषज्ञों (Experts) ने भी खासा सराहा है.

दरअसल, दिल्‍ली के बाल भवन पब्लिक स्‍कूल (Bal Bavan Public School) में इन दिनों सीबीएसई रीजनल साइंस एग्‍जीबीशन (CBSE Regional Science Exhibition) चल रहा है. इस एग्‍जिबीशन में कुल 64 स्‍कूल हिस्‍सा ले रहे हैं. इन स्‍कूलों में दिल्‍ली के 59 स्‍कूल हैं. वहीं, ओमान, साउदी अरेबिया और कुवैत के पांच स्‍कूल भी इस एग्जिबीशन में हिस्‍सा ले रहे हैं. सभी स्‍कूलों के छात्र एक से बढ़कर एक तकनीक लेकर इस एग्‍जिबीशन में पहुंचे है. इस एग्‍जिबीशन का उद्घाटन आज (शुक्रवार) सुबह सीबीएसई के डायरेक्‍टर ट्रेनिंग एण्‍ड स्किल एजुकेशन डॉ. विश्‍वजीत साहा (Dr. Biswajit Saha) ने किया है. दो दिन चलने वाले इस सीबीएसई रीजनल साइंस एग्जिबीशन में ज्‍यादातर बच्‍चे ऐसी तकनीक को लेकर सामने आए हैं, जो उन मौजूदा समस्‍याओं का हल बताती हैं, जिनसे देश की तमाम संस्‍थाएं निपटने की कोशिश में लगी हुई है.

9वीं कक्षा में पढ़ने वाले निष्‍कर्ष पोद्दार ने शोर से बिजली बनाने का तरीका एग्जिबीशन में पेश किया है. Nishkarsh Poddar, studying in 9th standard, has introduced the method of making electricity from noise in the exhibition.
9वीं कक्षा में पढ़ने वाले निष्‍कर्ष पोद्दार ने शोर से बिजली बनाने का तरीका एग्जिबीशन में पेश किया है.


मसलन, यदि हम प्रदूषण की बात करें तो हाल में ही नेशनल ग्रीन ट्रिबुनल (एनजीटी) ने दिल्‍ली-एनसीआर में डीजल जनरेटर चलाने पर पाबंदी लगा दी है. अब इस समस्‍या का समाधान लेकर ईस्‍ट प्‍वाइंट स्‍कूल के दो छात्र श्रेयन शुक्‍ल और सास्‍वत पटनायक साइंस एग्‍जिबीशन में पहुंचे हैं. दोनों छात्रों ने अपने मॉडल के जरिए बताया है कि किस तरह सोलर और पानी की भाप से जनरेटर चलाया जा सकता है. यह तकनीक न केवल किफायदती होगी, बल्कि हमसब को प्रदूषण से भी निजात दिलाएगी. इसी तरह, डीएवी श्रेष्‍ठ विहार में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र ऋतिक खन्‍ना एक खास उपकरण के साथ बाल भवन पब्लिक स्‍कूल में अयोजित हो रहे साइंस एग्जिबीशन में पहुंचे हैं.

ऋतिक खन्‍ना का यह उपकरण पैरालिसिस से ग्रस्‍त लोगों के लिए मददगार बन सकता है. इस उपकरण के जरिए पैरलाइज्‍ड हो चुके लोग अपने हाथ और पैर का जरूरत के अनुरूप इस्‍तेमाल कर कसते हैं. यह उपकरण बैक बोन की समस्‍या से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. निष्‍कर्ष, श्रेयन, सास्‍वत और ऋतिक ही नहीं, बल्कि इनकी ही तरह करीब सौ से अधिक नन्‍हें छात्र इस एग्जिबीशन का हिस्‍सा बने हैं, जो अपने साथ लाई तकनीक के जरिए लोगों को हतप्रद कर रहे हैं. वहीं, इन छात्रों के हुनर को परखने के लिए दिल्‍ली विश्‍वविद्यायल, जामिया मिलिया इस्‍लामिया और सुभाष चंद्र बोस विश्‍वविद्यायल के प्रोफेसर भी इस एग्जिबीशन का हिस्‍सा बने हैं.

पैरलाइज्‍ड हो चुके लोगों की मदद के लिए 9वीं कक्षा के ऋतिक खन्‍ना खास उपकरण के साथ एग्जिबीशन में पहुंचे हैं. ritik Khanna of class 9 has reached the exhibition with special equipment to help the paralyzed people
पैरलाइज्‍ड हो चुके लोगों की मदद के लिए 9वीं कक्षा के ऋतिक खन्‍ना खास उपकरण के साथ एग्जिबीशन में पहुंचे हैं.


बाल भवन पब्लिक स्‍कूल में बच्‍चों की प्रतिभा को देखने के बाद सीबीएसई के ट्रेनिंग एण्‍ड स्किल एजुकेशन डायरेक्‍टर डॉ. विश्‍वजीत साहा ने कहा कि अब बच्‍चों को सिर्फ सिलेबस से बांधने की जरूरत नहीं है. अब उनको वह आजादी देनी होगी, जिससे वह अपने हुनर को निखार सकें. उन्‍होंने तमाम स्‍कूलों को भी यह सलाह दी है कि वह बच्‍चों के लिए तीन महीने का फ्री टाइम फिक्‍स करें. इन तीन महीनों के दौरान, बच्‍चों को वह करने की इजाजत दी जाए, जिसमें वह खुद को हुनरमंद मानते हैं. हमारी जिम्‍मेदारी है कि इन तीन महीनों के दौरान, इन बच्‍चों को हम हर तरह का सहयोग और सुविधाएं उपलब्‍ध कराएं.
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First published: November 29, 2019, 2:13 PM IST
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