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कोरोना काल में कैंसर, किडनी और हृदय रोगियों के दर्द की दवा क्या है?

कोरोना काल में कैंसर, किडनी और हृदय रोगियों के दर्द की दवा क्या है?

कोरोना के चक्कर में दूसरे गंभीर रोगियों को नही मिल पा रहा ईलाज

कोरोना के चक्कर में दूसरे गंभीर रोगियों को नही मिल पा रहा ईलाज

कोरोना रिपोर्ट के चक्कर में जा रही दूसरे गंभीर रोगियों की जान, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों से कहा-कोविड-19 और लॉकडाउन के दौरान इमरजेंसी में नॉन कोविड मरीजों के इलाज से कोई अस्पताल इनकार न करे.

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    नई दिल्ली. आगरा (Agra) निवासी आरबी सिंह पुंडीर 18 अप्रैल शुक्रवार को डायलिसिस करवाना चाहते थे. उनके डायलिसिस सेंटर से पता चला कि इसके लिए उन्हें जिला अस्पताल की कोरोना रिपोर्ट दिखानी होगी. उन्होंने कोरोना रिपोर्ट करवाई जिसकी रिपोर्ट सोमवार को मिलनी तय हुई. लेकिन, रविवार रात को उनकी तबीयत खराब होने लगी. उन्होंने डायलिसिस सेंटर को फोन किया. कहा-मैं कल या परसों तक शायद संघर्ष न कर पाऊं. इसलिए मैं आपसे विनती करता हूं कि कृपा कर मेरी डायलिसिस करने की कृपा करें. मेरे अंदर कोरोना वायरस का कोई लक्षण नहीं है. कृपा कर मेरी जान बचाने की कोशिश करें.

    रविवार रात लगभग 3:00 बजे उनकी स्थिति गंभीर होने लगी. आला अधिकारियों को वे कॉल करते रहे. लेकिन जवाब नहीं मिला. 2 घंटे बाद सुबह 5:00 बजे विवश होकर पुंडीर के पड़ोसियों ने हाथ बढ़ाया. उन्हें अपनी गाड़ी में रख कर पहले आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज ले गए. जहां यह मालूम हुआ कि डायलिसिस सेंटर बंद है. फिर वो एक निजी अस्पताल पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने मरीज को हाथ तक नहीं लगाया. परिजनों ने बहुत मिन्नतें कीं लेकिन डॉक्टर कोरोना वायरस की रिपोर्ट मांगते रहे. न उनका बीपी चेक किया गया और न ऑक्सीजन दी गई. अंतत: करीब 9 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया. उनकी कोरोना रिपोर्ट बाद में मिली.

    आगरा निवासी युवराज ठाकुर ने अपने फेसबुक पर स्वास्थ्य व्यवस्था पर ऐसे ही आरोप लगाते हुए एक गुर्दा पीड़ित का दर्द लिखा है. यह हालात किसी एक शहर स्थिति नहीं है. कोरोना काल में दूसरी गंभीर बीमारियों का ईलाज नहीं मिल पा रहा है. ह्रदय, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी, डायबिटीज और कैंसर पेंशेंट को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. एम्स से लेकर निजी अस्पतालों तक में किडनी तक की ओपीडी पूरी तरह से बंद है. कोविड-19 के कारण अस्पतालों में कई अन्य बीमारियों से पीड़ित रोगियों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है.

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    डायलिसिस न होने के चक्कर में मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है (प्रतीकात्मक फोटो)


    केस नंबर-2: एम्स (AIIMS) में स्पिलिन का ऑपरेशन कराकर लौटीं 40 वर्षीय सीमा को लॉकडाउन में कोई इलाज नहीं मिल पा रहा है. वृंदावन में रह रहीं सीमा का हीमोग्लोबिन हाल ही में 12 से 6 पर पहुंच गया. इसके साथ ही सर में भीषण दर्द और हाथ अकड़ने लगे. घबराए परिजन सीमा को एम्स ले जाने के लिए एसडीएम से अनुमति लेकर दिल्ली पहुंचे. लेकिन वहां डॉक्टरों ने कोरोना का खतरा बताते हुए एक यूनिट खून चढ़ाकर 3 घंटे में वापस भेज दिया. साथ ही कहा कि लॉकडाउन में अगर ब्लड कम हो तो वृन्दावन में ही चढ़वा लें एम्स न आएं. सवाल ये है कि इतने बड़े केस को वृंदावन का कोई डॉक्टर कैसे डील करेगा.

    अस्पतालों की मजबूरी

    बड़े निजी अस्पतालों के प्रबंधकों का कहना है कि उनका तो काम ही है ईलाज करना है. उन्हें इस सेवा के बदले पैसे मिलते हैं. वो भला किसी मरीज को क्यों वापस भेजेंगे, लेकिन ये जरूर तय कर लेना चाहते हैं कि जो दूसरी बीमारियों के मरीज आ रहे हैं उन्हें कोरोना का संक्रमण (coronavirus) तो नहीं है. ताकि उससे पूरा अस्पताल न प्रभावित हो. दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी दिक्कत यह सामने आ रही है कि वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पहले से ही है और जो डॉक्टर हैं भी वे कोरोना ड्यूटी पर तैनात हैं.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गैर कोविड मरीजों के लिए क्या कहा

    कोरोना वायरस के चक्कर में अन्य गंभीर मरीजों का ईलाज नहीं हो पा रहा है. ऐसे मामले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की संज्ञान में भी हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री (Health minister) डॉ. हर्षवर्धन ने ट्वीट कर कहा है कि ‘मैंने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोविड-19 और लॉकडाउन के दौरान इमरजेंसी में नॉन कोविड मरीजों के इलाज में कोई अस्पताल इनकार न करे.



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    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गैर कोविड रोगियों के ईलाज के लिए कहा


    राज्यों में हालात और सरकारों की सफाई

    लखनऊ: लोकबंधु हॉस्पिटल के निदेशक सिविल डॉ. (मेजर) देवेन्द्र सिंह नेगी कहा, ये बात सच है कि इस वक्त ओपीडी नहीं चल रही है, जिसकी वजह आम दिनों की तरह मरीजों को नहीं देखा जा रहा है. लेकिन आपातकालीन सेवाओं के लिए राज्य सराकर की तरफ से विशेष गाइडलाइन जारी की गई है.

    इमरजेंसी में 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है. चाहे बात आईसीयू, एनआईसीयू या वेंटीलेटर की हो, डॉक्टरों की हर जगह ड्यूटी है. अगर किसी की हड्डी भी टूट रही है या फिर वह किडनी का मरीज है तो इमरजेंसी के तहत उसका इलाज किया जा रहा है. हां, यह जरुर है कि आम दिनों में हम जितने मरीज लेते थे उतने नहीं ले पा रहे हैं. लेकिन इमरजेंसी के सहारे मरीज को एडमिट किया जा रहा है.

    छत्तीसगढ़: यहां कैंसर का एक मात्र सरकारी यूनिट रायपुर का अंबेडकर अस्पताल है. कैंसर विभाग के प्रमुख डॉ. विवेक चौधरी के मुताबिक फिलहाल, 100 मरीज भर्ती हैं. 50 का रोज रेडिएशन थेरेपी चल रही है. 100 की OPD रोज हो रही है. कैंसर के किसी भी मरीज को आने-जाने की मनाही नहीं है.

    हिमाचल: सिरमौर जिले के नाहन मेडिकल कॉलेज में कोरोना से पहले 1500 से दो हजार के बीच रोजाना मरीज आते थे, जो अब अस्पताल में घटकर 150 से 200 ही रह गए हैं. कांगड़ा के टांड़ा मेडिकल कॉलेज में रोजाना 2000 से 25 सौ मरीज रूटीन चैकअप के लिए आते थे. अब यह आंकड़ा गिरकर 500 पहुंच गया है. अस्पताल में कुल 802 बेड हैं, जो आम दिनों में भरे रहते थे, लेकिन अब 200 बेड पर ही मरीज हैं.

    उधर, शिमला के कैंसर अस्पताल में रेडियो थैरपी के लिए 16 पुरुष मरीज और 22 महिलाएं भर्ती हैं. इसके अलावा रूटीन में कीमोथेरपी के लिए 40 मरीज का अस्पताल में इलाज चल रहा है. कैंसर अस्पताल के हेड डॉ. मनीष गुप्ता ने बताया कि फिलहाल अस्पताल आने के लिए मनाही केवल उन लोगों को है, जो ठीक हो गए हैं और फॉलोअप लेने के लिए अस्पताल आना चाहते हैं. नए मरीजों को कोई मनाही नहीं हैं. गेट पर चेकिंग हो रही है. कोरोना के संदिग्ध मरीज होने पर कैंसर अस्पताल में एंट्री नहीं दी जा रही है

    हरियाणा: कोविड-19 का संक्रमण शुरू होने से पहले पीजीआई रोहतक में रोजाना औसतन 7 से 5 हजार लोगों ओपीडी में दिखाने आते थे, जबकि 1800 से 2000 के बीच आपातकालीन सेवा में आते थे. लेकिन कोविड के बाद स्थितियां बदल गईं हैं. अब 500 से 800 मरीज ही आ रहे हैं.

    राजस्थान: प्रदेश में जब से लॉकडाउन लागू हुआ है, मरीजों खासकर नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के मरीजों की खासी परेशानी बढ़ गई है. इनमें विशेषकर डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हार्ट और कैंसर मरीज शामिल हैं. प्रदेश में इस समय डायबिटीज के कुल 350257 मरीज हैं, वहीं हाइपरटेंशन के 589363 मरीज हैं. इन लोगों की परेशानी कोरोना काल में बढ़ गई है.

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    कोरोना ने बढ़ाई दूसरे गंभीर रोगियों की परेशानी


    हालांकि, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह ने बताया कि कोविड-19 के अलावा अन्य चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है.  गैर कोविड (Covid-19) आवश्यक सेवाओं के तहत प्रजनन, मातृ, नवजात और किशोर स्वास्थ्य एवं डायलिसिस आदि सुविधाएं पहले की भांति चौबीसों घंटों उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई है. प्रदेश में आम मरीजों के इलाज के लिए ओपीडी मोबाइल वैन से उपखंड मुख्यालयों, कर्फ्यू वाले क्षेत्रों एवं कन्टेनमेंट जोन में सेवाएं शुरू की गई हैं.

    राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि प्रदेश में किसी भी मरीज को परेशानी न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार निगरानी रखे हुए हैं. 400 मोबाइल वैन ओपीडी यूनिट तैनात की गई हैं, जो लॉकडाउन और कर्फ्यूग्रस्त इलाकों में सेवाएं दे रही हैं.

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    Tags: Agra news, Coronavirus in India, Lockdown. Covid 19, Rajasthan news, Uttar pradesh news

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