Corona Third Wave: दिल्‍ली में मेटरनिटी अस्‍पताल को बनाया बाल अस्‍पताल, लगेगा ऑक्‍सीजन प्‍लांट

कोविड: तीसरी लहर का असर बच्चों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. सांकेतिक फोटो.

कोविड: तीसरी लहर का असर बच्चों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. सांकेतिक फोटो.

उत्‍तरी दिल्‍ली नगर निगम के श्रीमती गिरधर लाल अस्‍पताल में कुल 97 बेड हैं. जिनमें से 60-70 बेड को कोरोना में बच्‍चों के अनुकूल बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. इस अस्‍पताल में ऑक्‍सीजन प्‍लांट लगेगा. जिसकी अनुमति मिल चुकी है. हर बेड पर ऑक्‍सीजन की पाइप लगवाई जाएगी.

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नई दिल्‍ली. कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए अब बच्‍चों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को बढ़ाया जा रहा है. न केवल केंद्र और राज्‍य सरकारें इस दिशा में काम कर रही हैं बल्कि उत्‍तरी दिल्‍ली नगर निगम ने भी एक मेटरनिटी अस्‍पताल को बाल अस्‍पताल में बदलने का फैसला किया है.

कोरोना के बच्‍चों पर असर को देखते हुए नॉर्थ एमसीडी ने श्रीमती गिरधर लाल अस्‍पताल को बाल अस्‍पताल में बदल दिया है. यह एक प्रसूति अस्‍पताल है जहां गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी कराई जाती है. निगम के महापौर जय प्रकाश का कहना है कि इसे बाल अस्‍पताल में बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है.

इसमें कुल 97 बेड हैं. जिनमें से 60-70 बेड को कोरोना में बच्‍चों के अनुकूल बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. इस अस्‍पताल में ऑक्‍सीजन प्‍लांट लगेगा. जिसकी अनुमति मिल चुकी है. हर बेड पर ऑक्‍सीजन की पाइप लगवाई जाएगी. साथ ही बच्‍चों के लिए अलग वेंटिलेटर मंगाए जाएंगे. फिलहाल एनआईसीयू में 10 मशीनें हैं. इन्‍हें जरूरत पड़ने पर और बढ़ाया जाएगा.

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जय प्रकाश का कहना है कि अगर ज़रूरत पड़ेगी तो इस अस्पताल को पूरी तरह इस्तेमाल में लाया जाएगा और यहां के प्रसूति के मामलों को MCD के दूसरे प्रसूति अस्पताल कस्तूरबा गांधी में शिफ़्ट कर दिया जाएगा. उत्‍तरी दिल्‍ली नगर निगम बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर पूरी तरह सक्रिय है और किसी भी स्थिति में बच्‍चों को परेशानी से बचाने की कोशिश करेगा.

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