इन आंकड़ों के दम पर कहती है Delhi की केजरीवाल सरकार- हमारी पढ़ाई औरों से अच्छी

डीयू के एडमिशन में होगी मारामारी. (File Photo)
डीयू के एडमिशन में होगी मारामारी. (File Photo)

12वीं के रिज़ल्ट के आंकड़ों में बड़ा बदलाव आ रहा है. बात सीबीएसई (CBSE) की हो या फिर प्री-बोर्ड एग्जाम की, सरकारी स्‍कूलों के आंकड़े प्राइवेट स्कूलों (Private School) को पीछे छोड़ रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 29, 2020, 7:50 AM IST
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नई दिल्ली. एक बार फिर 12वीं का रिज़ल्ट आने के बाद दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार (Arvind Kejriwal Government) अपने स्कूलों को लेकर खासी उत्साहित है. दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) और दूसरे कॉलेजों में उसके सवा लाख छात्र भारी पड़ेंगे ऐसे दावें किए जा रहे हैं. हर साल दिल्ली सरकार की कोशिशों के चलते 12वीं के रिज़ल्ट के आंकड़ों में बड़ा बदलाव आ रहा है.

बात सीबीएसई (CBSE) की हो या फिर प्री-बोर्ड एग्जाम की आंकड़े, सरकारी स्‍कूल प्राइवेट स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहे हैं. इन आंकड़ों के पीछे डिप्टी सीएम और शिक्षामंत्री मनीष सिसौदिया (Manish Sisodia) बच्चों की लगन और स्कूल स्टाफ की मेहनत का ज़िक्र करते हुए ट्विटर (Twitter) पर ट्वीट की झड़ी लगा देते हैं.

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अक्टूबर से होने हैं कॉलेजों में एडमिशन
अगर सब कुछ ठीक-ठाक चला तो दिल्ली के कॉलेजों में अक्टूबर से एडिमशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. हालांकि, इस बार दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत दूसरे कॉलेजों में भी एडमिशन पाना खासा दुश्वार माना जा रहा है. सीबीएसई के 12वीं के रिज़ल्ट समेत दिल्ली के सरकारी स्कूल के रिज़ल्ट ने भी परेशानी बढ़ा दी है. इस साल दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 12वीं का रिज़ल्ट 98 फीसद रहा है. 1.30 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे.

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दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे कक्षा 12वीं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं.


इस लिहाज से दिल्ली के सरकारी स्कूलों से पास होने वाले छात्र भी एडमिशन की लाइन में हैं. दिल्ली के प्राइवेट कॉलेज समेत सेंट्रल स्कूल और जवाहर नवोदय विद्यालयों के सैकड़ों छात्र भी हैं. हर साल एडमिशन के लिए दिल्ली से बाहर के छात्रों का भी खासा बोल-बोला रहता है.

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12वीं प्री-बोर्ड में 48 से 24 फीसद पर आ गया फेल छात्रों का आंकड़ा
4 साल पहले तक दिल्ली सरकार के स्कूलों में 12वीं के प्री-बोर्ड एग्जाम हुआ करते थे, लेकिन उन एग्जाम में फेल छात्रों की संख्या 60 हज़ार से ज़्यादा ही रहती थी. अब शिक्षा के ढांचे में आए कुछ बदलाव के बाद फेल छात्रों का यह आंकड़ा घटने लगा है. पहले 50 हज़ार पर आया तो उसके बाद घटते हुए सीधे 60 से 32 हज़ार पर पहुंच गया. 4 साल पहले जहां 48 फीसद छात्र प्री-बोर्ड में फेल हो रहे थे, वहीं 2018-19 में यह घटकर सिर्फ 24.56 फीसदी पर आ गया है.

5 साल में 13 फीसदी बढ़ गया पास छात्रों का नंबर
साल 2016 में दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले सिर्फ 85.9 फीसदी छात्र ही 12वीं की कक्षा में पास होते थे. लेकिन इस साल 2020 में जब सीबीएसई बोर्ड का रिज़ल्ट आया तो दिल्ली के सरकारी स्कूलों का यह आंकड़ा उछलकर 98 फीसदी पर पहुंच चुका था. बीते साल 2019 तक यह आंकड़ा 94.24 फीसद था. लेकिन लगातार 2 साल से सरकारी स्कूल के छात्र बेहतर प्रदर्शन करते हुए लगातार इस नंबर को 4 फीसदी से भी ज़्यादा ऊपर लेकर आए हैं.

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शिक्षा से संबंधित एक कार्यक्रम का फाइल फोटो.


डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया बताते हैं यह वजह
-वर्तमान में स्‍कूलों में शिक्षा की गुणवत्‍ता को बढ़ाने के लिए स्‍कूलों में स्‍वीमिंग पुल, ऑडिटोरियम, लैब, लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं को बढ़ाया गया.

-सभी दिल्ली सरकार के स्कूल शिक्षक छात्रों को पढ़ाने में सहायता करने के लिए मोबाइल टैबलेट का उपयोग करते हैं. डिजिटल शिक्षा की सुविधा के लिए अधिकांश उच्च कक्षाओं में प्रोजेक्टर का उपयोग किया जाता है, ताकि बच्चों को दुनिया के ज्ञान से अवगत कराया जा सके.

-पूरे देश में शिक्षा के क्षेत्र में दिल्‍ली सरकार का बजट सबसे ज्‍यादा है. पिछले छह सालों से दिल्‍ली सरकार अपने बजट का 25 प्रतिशत शिक्षा के क्षेत्र पर खर्च कर रही है.

-इस बार 147 स्कूलों के 100 फीसद बच्चे पास हुए हैं. पिछले वर्ष 60 स्कूलों के ही 100 फीसद बच्चे पास हुए थे. इस वर्ष 474 स्कूलों ने 90 फीसद तथा उससे अधिक सफलता हासिल की. पिछले वर्ष 226 स्कूलों में ऐसा हुआ था. वर्ष 2020 में 1005 सरकारी स्कूल हैं, जबकि 2019 में 995 स्कूल थे.

-दिल्‍ली में पहले 17000 क्‍लास रूम थे अब इनकी संख्‍या पहले से मुकाबले बढ़ी है. यह लगभग दोगुनी से ज्‍यादा हो चुकी है. वर्तमान में इनकी संख्‍या 37000 हो चुकी है.

-दिल्ली के शिक्षक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में प्रशिक्षित होते हैं. प्रशिक्षण लेने के बाद दिल्ली के बच्चों को पढ़ाने के लिए वह उस शिक्षा का इस्‍तेमाल करते हैं.
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