कोरोना के नाम पर ऐसे फैलता गया सैनिटाइजर का जाल, ब्रांडेड-लोकल के बीच में फंसा स्वास्‍थ्‍य

हैंड सैनिटाइजर आज भारत के बाजार में अपनी पकड़ बना चुका है.

कुछ ऐसी कंपनियां जो पहले से सैनिटाइजर नहीं बनाती थीं, कोरोना आने के बाद से बना रही हैं. जैसे रेमंड, डाबर, एशियन पेंट्स, ली फोर्ड, पतंजलि, गोदरेज और शराब के कई बड़े ब्रांड्स आज बड़े स्‍तर पर सैनिटाइजर बना रहे हैं.

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नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी ने न केवल लोगों के जीने के तरीके को बदल दिया है बल्कि बाजार में बड़ा परिवर्तन ला दिया है. कोरोना वायरस के बाद उभरा सैनिटाइजर आज न केवल आजीविका का साधन बन गया है बल्कि लॉकडाउन और अनलॉक के दौरान बंद हुए तमाम उद्योग-धंधों के लिए ऑक्‍सीजन बन गया है. तमाम कंपनियां आज बाजार में अपना सैनिटाइजर उतार चुकी हैं. इतना ही नहीं लोकल स्‍तर पर  सैनिटाइजर बनाने का काम धड़ल्‍ले से चल रहा है.

छह महीने पहले तक सैनिटाइजर के इस्‍तेमाल का चलन नहीं था और न ही कंपनियां ही इसके उत्‍पादन के लिए राजी थीं लेकिन मार्च में भारत में कोरोना आने के बाद से सब बदल गया. लोग तो सैनिटाइजर का इस्‍तेमाल करने ही लगे वहीं कुछ ऐसी कंपनियां जिन्‍होंने कभी सैनिटाइजर नहीं बनाया जैसे रेमंड, डाबर, एशियन पेंट्स, ली फोर्ड, पतंजलि, गोदरेज और शराब के कई ब्रांड्स, आज बड़े स्‍तर पर सैनिटाइजर बनाने लगीं.

कोरोना के बाद लगाए गए पहले लॉकडाउन के बाद से ही सैनिटाइजर को लेकर मारामारी मच गई. लोगों को लगा जैसे सैनिटाइजर ही उन्‍हें कोरोना से बचा सकता है. सैनिटाइजर की कालाबाजारी बढ़ गई, दुकानदारों ने स्‍टॉक में रखे सैनिटाइजर को जरूरत देखकर एमआरपी से कई गुना ज्‍यादा में बेचना शुरू कर दिया. जिसे देखते हुए सैनिटाइजर पर सरकार को भी कई कदम उठाने पड़े.

कोरोना पैनिक में सरकार को देने पड़े थे दाम न बढ़ाने के निर्देश
भारत में कोरोना के आउटब्रेक और मामले बढ़ने पर उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सैनिटाइजर की बढ़ती कीमतों और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए निर्देश जारी किए थे. इतना ही नहीं मंत्रालय ने मास्क और हैंड सैनिटाइजर को जरूरी उत्पादों की लिस्ट में भी शामिल किया था. सरकार ने एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 के तहत अल्कोहल से बनने वाले हैंड सैनिटाइजर के उत्‍पादन, कीमत, डिस्ट्रीब्यूशन और क्वॉलिटी को रेगुलेट करते हुए सैनिटाइजर को उसी दाम पर बेचने के लिए कहा था जो मार्च 2020 से पहले से बेचा जा रहा था. साथ ही कहा था कि 30 जून तक कोई भी कंपनी अल्‍कोहल वाले सेनिटाइजर के दाम न बढ़ाए. इसके लिए कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश भी दिए गए.

हालांकि सरकार के कई निर्देशों और उत्‍पादनकर्ताओं को आबकारी लाइसेंस दिए जाने के बाद भी सैनिटाइजर की कीमतों में तेज उछाल आया था. कोरोना वायरस के बेकाबू होने के से हैंड सैनिटाइजर की खपत कई गुना बढ़ गई थी साथ ही कीमतें भी 70 रुपये लीटर से 200-250 रुपये लीटर तक पहुंच गई थीं. यहां तक कि बाजारों में सैनिटाइजर को लेकर मारामारी मच गई थी.

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आजकल अवैध रूप से बनाए जा रहे हैं सैनेटाइजर (FILE)


हालांकि जुलाई में एक बार फिर मोदी सरकार ने सैनिटाइजर को जरूरी उत्‍पादों की लिस्‍ट से बाहर कर दिया है. जिसका परिणाम यह है कि अब सैनिटाइजर की कीमतों पर अंकुश नहीं है.

यूपी में की गई थी बिक्री के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता खत्‍म
इसी दौरान 28 अप्रैल को उत्तर प्रदेश सरकार ने हैंड सैनिटाइजर की खुदरा बिक्री के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म कर दी थी. प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से आदेश जारी किया गया. जिसमें कहा गया है कि निर्धारित किये गये मूल्य पर ही हैंड सैनिटाइजर की बिक्री की जाएगी. साथ ही इसकी खुदरा बिक्री के लिए औषधि विक्रय लाइसेंस की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए मेडिकल स्टोर, जनरल स्टोर, ग्रोसरीज आदि के जरिए हैंड सैनिटाइजर की खुदरा बिक्री के लिए शर्तो के साथ अनुमति प्रदान की जाती है. इसका प्रभाव यह हुआ कि सभी जगहों पर सैनिटाइजर बिकने लगा.

घरों में बने सैनिटाइजर की आई बाढ़
सैनिटाइजर का इस्‍तेमाल बढ़ने के साथ ही सैनिटाइजर बनाने के घरेलू नुस्‍खे भी सोशल मीडिया सहित कई जगहों पर लोगों को सिखाए जाने लगे. साथ ही लोग घरों में सैनिटाइजर बनाकर भी बेचने लगे. इतना ही नहीं कई जगहों पर हैंडमेड सैनिटाइजर का बोर्ड लगाकर बिक्री की गई और बड़ी मात्रा में लोगों ने ऐसी जगहों से भी सैनिटाइजर खरीदा. इस दौरान फिटकरी, नीम, अल्‍कोहल, एलोवेरा, तुलसी, पानी आदि से घरों में भी सैनिटाइजर लोगों ने बनाए.

उत्‍पादन बढ़ा लेकिन साथ में डुप्‍लीकेसी भी
आयुर्वेदिक प्रोडक्‍ट की ऑनलाइल और होल सेल बिक्री करने वाले अनुज सिंह बताते हैं कि इस बार उनके पास कई नई कंपनियों के सैनिटाइजर आए हैं. ज्‍यादातर कंपनियां आपदा में अवसर देखकर काम कर रही हैं. कोरोना के दौरान मार्केट देखकर शराब के ब्रांड और पेंट बनाने वाली कंपनियों ने सैनिटाइजर बनाए हैं. इनके पास स्प्रिट के अलावा पूरा सैटअप पहले से ही था, जिसे उन्होंने थोड़ा सा बदला और सैनिटाइजर बनाना शुरू कर दिया. इसी कारण पहले जैल बेस्‍ड सैनिटाइजर आता था अब स्प्रिट बेस्‍ड आ रहा है. यहां तक कि दिल्‍ली के चावड़ी बाजार में 200 रुपये का पांच लीटर सैनिटाइजर भी मिल रहा है. कॉस्‍ट कटिंग के चक्‍कर में भी लिक्विड और हल्‍की क्‍वालिटी का सैनिटाइजर आज बाजार में मिल रहा है. डुप्‍लीकेसी बढ़ गई है लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही.

उत्‍पादक और विक्रेता बोले- सैनिटाइजर का उत्‍पादन शुरू करते ही घटाना पड़ा
तुलसी आयुर्वेद सेवा संस्‍थान के विजयकांत पांडेय बताते हैं कि वे 2016 से आयुर्वेदिक दवाएं बनाकर बचे रहे हैं. आयुर्वेदिक दवाओं के लिए लैबोरेटरी के साथ ही लाइसेंस सहित सभी जरूरी व्‍यवस्‍थाओं के बाद उन्‍होंने कोरोना में बढ़ी डिमांड को देखते हुए सैनिटाइजर बनाना शुरू किया. मार्च में लॉकडाउन के बाद एकाएक इसकी मांग बढ़ने पर उत्‍पादन बढ़ाया लेकिन मई में ही रिटेल विक्रेता इसकी कीमतें घटाने के लिए कहने लगे. क्‍वालिटी से समझौता नहीं करना था इसीलिए सैनिटाइजर का कारोबार पूरी तरह कम कर दिया. अब फिर से आयुर्वेदिक दवाओं पर ही काम चल रहा है.

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कोरोना वायरस महामारी में हैंड सैनिटाइजर्स का प्रयोग एक दम से बढ़ गया है.


पांडेय कहते है, अप्रैल-मई में ही बाजार में सस्‍ता सैनिटाइजर आ चुका था. मोबाइल की फैक्‍ट्री चलाने वाले से लेकर साधारण दुकान चलाने वाला भी सैनिटाइजर बनाकर बेच रहा था. हाल यह हुआ कि क्‍वालिटी पर किसी का ध्‍यान नहीं गया. सैनिटाइजर की डुप्‍लीकेसी बढ़ गई. जहां हमें पांच लीटर सैनिटाइजर बनाने में 450-500 रुपये की लागत आ रही है वहीं बाजार में 300 रुपये तक में पांच लीटर सैनिटाइजर आसानी से बिक रहा है. यह एक ड्रग आयटम है और लोग रेहड़ी-पटरी पर रखकर सैनिटाइजर बेच रहे हैं. दिल्‍ली के भागीरथ प्‍लेस, लाजपत नगर, छोटे-छोटे बाजारों में सैनिटाइजर के नाम पर क्‍या बिक रहा है कोई नहीं जानता. पांडेय कहते हैं कि अभी वे मार्च के मुकाबले सिर्फ 40 फीसदी ही सैनिटाइजर का उत्‍पादन कर रहे हैं.

कोरोना बेकाबू होने के साथ ही प्राइवेट सैक्‍टर में घटी सैनिटाइजर की मांग 

पैरानोरमा फार्मा कंपनी के डिस्‍ट्रीब्‍यूटर हैड एसएन मोहंती बताते हैं कि वे पिछले चार-पांच साल से ऑनलाइन दवाएं और सैनिटाइजर आदि बेचने का काम कर रहे थे. कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के बाद उन्‍होंने दवाओं को ऑनलाइन के बजाय सीधे ही मार्केट में उतार दिया. इस दौरान जैल और लिक्विड बेस सैनिटाइजर भी सीधे ही बेचना शुरू किया. लेकिन दो महीने भारी मांग के बाद अचानक लिक्विड सैनिटाइजर की सेल 50 फीसदी घट गई. पहले सरकारी दफ्तरों के साथ ही प्राइवेट कंपनियां सैनिटाइजर खरीदती थीं लेकिन अब प्राइवेट सैक्‍टर में सप्‍लाई लगभग खत्‍म हो गई है. जबकि सरकार में बहुत कम रह गई है. इसकी एक वजह यह भी है कि अधिकांश प्राइवेट संस्‍थान बंद पड़े हैं. इतना ही नहीं मेडिकल स्‍टोर्स के पास भी सैनिटाइजर का काफी स्‍टॉक हो गया है. लोग घरों में भी सैनिटाइजर बना के इस्‍तेमाल कर रहे हैं.

नीम-तुलसी और ऐलोवेरा का सैनिटाइजर बना के बेच रहे हैं
दिल्‍ली निवासी दिनेशचंद्र ने बताया कि उन्‍हें शुरू से ही घरेलू नुस्‍खे आजमाने और लोगों के साथ शेयर करने का शौक रहा है. वे आयुर्वेदाचार्य नहीं हैं लेकिन घरेलू नुस्‍खों और घर में सहज उपलब्‍ध होने वाली चीजों से उपयोगी चीजें बनाने के लिए पिछले एक दशक से काम कर रहे हैं. यही वजह है कि कोरोना आने के बाद उन्‍होंने सैनिटाइजर भी बनाया. इसमें उन्‍होंने नीम की पत्तियां, तुलसी के डंठल और एलोवेरा को मिलाकर पेस्‍ट बनाया और उसे हेंडमेड सैनिटाइजर का नाम दिया. दिनेश कहते हैं कि न केवल इसका इस्‍तेमाल वे घर में कर रहे हैं बल्कि आसपास के तमाम लोग उनसे बनवा के भी ले जा रहे हैं. साथ ही कई लोगों को वे यह सब बनाना भी सिखा चुके हैं. दिनेश बताते हैं कि उन्‍होंने कभी बाजार में मिलने वाला सैनिटाइजर इस्‍तेमाल नहीं किया है. उल्‍टा इस हेंडमेड सैनिटाइजर को वे ज्‍यादा शुद्ध और पूजा-पाठ के दौरान इस्‍तेमाल होने वाला भी मानते हैं.

लोकल स्‍तर पर भारी मात्रा में बना है सैनिटाइजर
मिडास के सेल्‍स ऑफिसर विजय गुप्‍ता बताते हैं कि सैनिटाइजर का प्रयोग जैसे-जैसे बढ़ा है, उससे कहीं ज्‍यादा लोकल सैनिटाइजर बनकर बाजार में आ गया है. उनकी कंपनी पिछले कई साल से सैनिटाइजर बना रही है लेकिन इस बार मांग ज्‍यादा होने के बावजूद भी मई के बाद सैनिटाइजर की सेल घटी है. इसकी वजह है कि हर गली-मोहल्‍ले में सैनिटाइजर बनाने का काम चल रहा है. दुकानों पर स्‍टॉक है. घरों में भी लोग विकल्‍प अपना रहे हैं.

भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के कारण सरकार ने मास्क और सेनिटाइजर आवश्यक वस्तु अधिनियम में शामिल करने का फैसला किया था. जिसको एक बार फिर बदल दिया गया है.
अवैध सैनिटाइजर बनाने पर हरियाणा में 11 कंपनियों पर मुकदमा दर्ज हुआ है.


हरियाणा में 11 कंपनियों पर दर्ज हुई है एफआईआर
हाल ही में हरियाणा में ही कोरोना (Corona) के दौरान सैनिटाइजर (Sanitizer) बनाकर बेचने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की गई है. हरियाणा के स्वास्थ्य एवं गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से एकत्र किए गए सैंपल फेल होने के कारण 11 सैनेटाइजर ब्रांड के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई गई है. इसके साथ ही संबंधित ब्रांड का लाईसैंस रद्द या सस्पेंड करने का नोटिस भी जारी किया गया है.

विज के अनुसार हरियाणा के खाद्य एवं औषध प्रशासन द्वारा 248 सैंपल एकत्र किए गए थे, जिनमें से 123 की रिपोर्ट मिल गई है. इनमें से 109 पास हुए, जबकि 14 फेल पाए गए. इनमें 9 ब्रांड की गुणवत्ता ठीक नहीं पाई गई जबकि 5 में मेथेनॉल की अधिकता पाई गई है, जो एक विष का काम करता है. ऐसे में सरकार ने तत्‍काल फेल ब्रांड सैनेटाइजर का पूरा स्टॉक मार्किट से वापिस लाने के निर्देश दिए. ताकि लोगों को किसी प्रकार का नुकसान न हो सके.

क्या है मेथेनाल, सैनिटाइजर के द्वारा कितना हो सकता है नुकसान

मेथेनॉल एक कार्बनिक यौगिक है. यह हल्का, वाष्पशील, रंगहीन और ज्वलनशीन द्रव्य है. इसकी महक एथेनॉल यानी अल्कोहल जैसी होती है, लेकिन यह जहरीला होता है. इसे सैनिटाइजर में मिलाया जा रहा है. मार्च महीने में ईरान (Iran) में एक अफवाह फैली थी कि मेथेनॉल पीने से कोरोना के वायरस मर जाते हैं. इसके बाद इसे वहां कम से कम 300 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 1000 अन्य लोग प्रभावित थे.

मेथनॉल की ज्‍यादा मात्रा मिचलाना, चक्कर आना, चेतना की हानि, थकान एवं कमजोरी का होना और धुंधली दृष्टि का कारण बन सकती है. इससे अंधापन और व्‍यक्ति की जान भी जा सकती है. यह त्वचा को शुष्क बना सकता है. मेथेनॉल को चाहे त्वचा के माध्यम से या सांस के जरिए लिया जाए, दोनों में खतरा समान हैं. यह बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी हानिकारक है. बहुत ज्वलनशील होने के कारण यह आग जल्‍दी पकड़ता है.

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