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Opinion: ‘परीक्षा पर चर्चा’ में छिपा प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों के लिए ये खास संदेश
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Updated: January 20, 2020, 10:49 PM IST
Opinion: ‘परीक्षा पर चर्चा’ में छिपा प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों के लिए ये खास संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के छात्रों के साथ ‘परीक्षा पर चर्चा’ की (File Photo)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने चिर-परिचित अंदाज में देश के छात्रों के साथ ‘परीक्षा पर चर्चा’ विषय पर अपने विचार साझा किए और उन्हें खास संदेश दिया.

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  • Last Updated: January 20, 2020, 10:49 PM IST
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डॉ. संजीव कुमार तिवारी


नई दिल्ली. भारत जैसे युवा देश में प्रधानमंत्री का विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना और परीक्षाओं से ठीक पूर्व उनकी सबसे बड़ी समस्या ‘परीक्षा के दबाव’ को कम करने के उपाय बताना अत्यंत ही अहम है. भारत युवाओं का देश है और एक आंकलन के अनुसार, उनकी संख्या कुल जनसंख्या की लगभग 35-40% है. ऐसे में छात्रों को संबोधित करना अत्यंत ही महत्वपूर्ण हो जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में देश के छात्रों के साथ ‘परीक्षा पर चर्चा’ विषय पर अपने विचार साझा किए. नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ छात्रों को संबोधित किया बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के अलग-अलग भागों से इस चर्चा में भाग लेने वाले छात्रों की चिंता को दूर करने का प्रयास किया. एक तरफ उन्होंने छात्रों के आत्मविश्वास पर बल दिया तो दूसरी तरफ उनके भीतर परीक्षा के डर को दूर करने की आवश्यकता बताई. प्रधानमंत्री ने छात्रों से बिना किसी झिझक और रोक-टोक के अपनी बात रखने के लिए सुझाव दिया. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सिर्फ परीक्षा के अंक ही जिंदगी नहीं है, हां! एक महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर है, लेकिन परीक्षा ही सब कुछ नहीं है.

स्मार्टफोन की आदत से दूर रहे छात्र

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विज्ञान और तकनीकि का प्रयोग मनुष्य के द्वारा जरूर होना चाहिए, लेकिन युवाओं को उस तकनीकि का गुलाम नहीं होना चाहिए. उनका सीधा निशाना सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के दुरुपयोग पर था. उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारा सीधा नियंत्रण तकनीकि पर होना चाहिए न कि हम उसके गुलाम हो जाएं. विद्यार्थियों को स्मार्टफोन के अत्यधिक प्रयोग की आदत से दूर रहने की सलाह दी और उससे समय बचा कर अपने काम में लगाने एवं बड़ों के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने को आवश्यक बताया.

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपना कुछ समय अपने बड़े बुजुर्गों के लिए निकालें और संबंधों को जीने का प्रयास करें. आज का वर्तमान समय औद्योगीकरण एवं निरंकुश तकनीकी प्रयोग का है, जिससे हमारी युवा पीढ़ी निरंतर भ्रमित होती जा रही है. जिससे हमारी भारतीय संस्कृति और मूल्य निरंतर युवाओं की चेतना से दूर होता जा रहा है. अत: अभिभावकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने बच्चों को समझे और उन्हें मूल्यों और परम्पराओं से जोड़ने की कोशिश करें. प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में यही चिंता व्यक्त की है.

आज के युग में जब युवा लगातार हताश, निराश और परेशान हो रहा है, जब परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करने का दबाव उस पर लगातार बनता जा रहा है, तो ऐसे में प्रधानमंत्री के द्वारा उन्हें ढांढ़स देना और जीवन की सफलताओं और असफलताओं के बीच अंतर करना अत्यंत ही महत्वपूर्ण हो जाता है. प्रधानमंत्री ने छात्रों से आह्वान किया कि वे असफलताओं से जुड़े नहीं बल्कि उसे अपने जीवन का भाग समझें.
प्रधानमंत्री ने अभिभावकों से भी चिंता साझा की और गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के महत्व पर भी बल दिया. उन्होंने यह बताया कि अभिभावक अपने बच्चों को आकर्षण वाले क्षेत्र में ज्यादा प्रोत्साहित करते हैं लेकिन ऐसा करने से पूर्व अभिभावकों को समय निकालकर यह देखना चाहिए कि बच्चे की रुचि किस क्षेत्र में है. ऐसा करने पर बच्चों पर पड़ने वाला तनाव और दबाव कम होगा और बच्चे सहजता से अपनी रुचि के क्षेत्र में अच्छा कर सकते हैं.

'कुछ बनने के सपने के साथ कुछ करने का सपना भी जुड़े'
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि जीवन में कुछ बनने के सपने के साथ कुछ करने का सपना भी जुड़ना चाहिए. उनका सीधा मतलब विद्यार्थियों पर पड़ रहे दबाव को कम करने और जीवन में कुछ कर दिखाने से था. प्रधानमंत्री ने इस समय का उपयोग बच्चों को कर्तव्य बोध कराने के लिए किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारों से पूर्व कर्तव्य आते हैं, अगर हम अपने कर्तव्यों का निर्वाह सफलतापूर्वक करते हैं तो अधिकार स्वयं प्राप्त हो जाते हैं. उन्होंने मातृभाषा के साथ-साथ अंग्रेजी और हिंदी के शिक्षा पर बल दिया. जिसका जीता जागता उदाहरण अरुणाचल प्रदेश में हिंदी, अंग्रेजी और मातृभाषा का प्रचार-प्रसार है. आज के विद्यार्थी कल के नागरिक हैं, ऐसे में मजबूत और शक्तिशाली भारत के निर्माण का दायित्व उनके कंधों पर है. भारत एक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है और इसकी प्रगति का दारोमदार यहां के युवाओं पर है. उन्होंने 'मेक इन इंडिया' पर बल दिया. जिससे अर्थव्यवस्था और मजबूत हो सके और भारत हर क्षेत्र में स्वावलंबी बन सके.

'एग्जाम वॉरियर' पढ़ने की सलाह
ऐसे अहम समय में विद्यार्थियों को संबोधित कर उन्होंने न सिर्फ उनके तनाव को दूर करने की दिशा में अहम कदम उठाया है, बल्कि चर्चा पर आधारित पुस्तिका 'एग्जाम वॉरियर' पढ़ने की सलाह भी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों के लिए दिया गया यह उद्बोधन उनके बहुआयामी व्यक्तित्व, समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ जोड़ने, जोखिम से नहीं घबराने के अपने प्रयोगों को बच्चों तक पहुंचाने एवं लीक से हटकर कुछ अलग कर दिखाने की उनकी कला को पुनः स्थापित करता है. छात्रों के लिए यह संबोधन प्रधानमंत्री का सीधा संवाद स्थापित करने की प्रवृत्ति को चरितार्थ करता है. आने वाले वर्षों मे ऐसे संवाद नए भारत के निर्माण को नई संभावनाएं देंगे और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में निश्चय ही सहयोगी साबित होंगे.

(नोट- लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्राचार्य हैं, यह उनके निजी विचार हैं) 

 

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First published: January 20, 2020, 10:44 PM IST
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