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OPINION: PM मोदी की वो सोच जिसने बदल दी आम लोगों की जिंदगी
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Anil Rai | News18Hindi
Updated: March 12, 2020, 8:27 PM IST
OPINION: PM मोदी की वो सोच जिसने बदल दी आम लोगों की जिंदगी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी. (फाइल फोटो)

पीएम नरेन्द्र मोदी ने जब 1 जुलाई 2015 को देश के अलग-अलग इलाकों में जन औषधि केंद्र खोलने की घोषणा की थी. इस योजना के बाद देश भर में दवाइयों की कीमत 30 से 40 फीसदी तक कम हो गई.

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  • Last Updated: March 12, 2020, 8:27 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 1 जुलाई 2015 को देश के अलग-अलग इलाकों में जन औषधि केंद्र खोलने की घोषणा की थी, तो किसी की उम्मीद नहीं थी कि पीएम की ये मुहिम आने वाले कुछ ही दिनों में देश के आम गरीब और कामगार लोगों की जिंदगी बदलने वाली है. पीएम मोदी के इस योजना के बाद देश भर में दवाइयों की कीमत 30 से 40 फीसदी तक कम हो गई. इस योजना में सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली जेनरिक दवाइयां आम लोगों को बाजार के काफी सस्ते मूल्य पर उपलब्ध कराने की शुरुआत की गई थी. इसके लिए सरकार ने हर सरकारी अस्पताल में 'जन औषधि स्टोर' बनाए हैं, जहां ये दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं. एक ओर जहां प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना में देश के आम लोगों के इलाज की पूरी व्यवस्था है. वहीं, जन औषधि केंद्र ने आम और खास सबके के इलाज का खर्च कम कर दिया है.

जानिए कैसे मिल रहा है आम लोगों को फायदा
जेनरिक दवाइयां ब्रांडेड या फार्मा की दवाइयों के मुकाबले सस्ती होती हैं, जबकि प्रभाव उनके बराबर ही होता है. प्रधानमंत्री जन औषधि अभियान मूल रूप से जनता को जागरूक करने के लिए शुरू किया गया है, ताकि जनता समझ सके कि ब्रांडेड मेडिसिन की तुलना में जेनेरिक मेडिसिन कम दाम पर उपलब्ध हैं. इसके साथ ही इसकी क्वालिटी में किसी तरह की कमी नहीं हैं.

6 हजार से ज्यादा खोले गए जन औषधि केंद्र



इस योजना में आम नागरिकों को बाजार से 60 से 70 फीसदी कम कीमत पर दवाइयां मुहैया कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने अब तक देश में 6 हजार से ज्यादा जन औषधि केंद्र खोले हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अभियान की समीक्षा में पाया कि एक हजार से ज्यादा जरूरी दवाइयों की कीमत नियंत्रित होने से देश मरीजों के 12 हजार 5 सौ करोड़ रुपये बचे हैं.



लाखों मरीजों को हुआ फायदा
स्टेट्स और री-इम्पालंट्स की कीमत कम होने से लाखों मरीजों का फायदा हुआ है आगे इस योजना के तहत देश के गांव-गांव में आधुनिक Health and Wellness Centre बनाए जा रहे हैं. अभी तक जो 31 हज़ार से ज्यादा सेंटर तैयार हो चुके हैं, उनमें 11 करोड़ से ज्यादा साथी अपनी जांच करा चुके हैं.

पूरी दुनिया में बढ़ रही है भारत के जेनरिक दवाओं की मांग
भारत की बनी Generic दवाओं की पूरी दुनिया में डिमांड है. दरअसल पिछले 100 साल में दवा का बाजार जितना तेजी से फैला है उससे ज्यादा तेजी से बड़ी कंपनियों ने इस बाजार पर अपना कब्जा जमाया है. हालात ये हैं कि डॉक्टर कंपनियों के ब्रांड के हिसाब से दवाइयां लिखने लगे हैं.

पीएम मोदी की पहल का हुआ है असर
लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की पहल के बाद अब डॉक्टर बड़ी कंपनियों के नाम की जगह जेनेरिक दवाएं लिखने लगे हैं. जिसका सीधा असर दवा की कीमतों पर पड़ा है और बड़ी ब्रांडेड कंपनियों का सिंडीकेट खत्म हुआ है. इसके बाद कई नई कंपनियां इस उद्योग में आई है, जिससे भारत की जेनेरिक दवाओं को मांग अब विदेशों में भी होने लगी है.

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First published: March 12, 2020, 5:58 PM IST
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