Oxygen Crisis: ऑक्‍सीजन को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई, केंद्र ने कहा-दिल्‍ली सरकार टैंक की व्यवस्था करने में फेल रही

दिल्‍ली में ऑक्‍सीजन का संकट बरकरार है.

दिल्‍ली में ऑक्‍सीजन का संकट बरकरार है.

Oxygen Crisis in Delhi:दिल्‍ली में जारी ऑक्‍सीजन संकट को लेकर दिल्‍ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने कहा कि दिल्ली सरकार को पर्याप्त ऑक्सीजन आवंटित की गई है, लेकिन वह सही व्‍यवस्‍था करने में नाकाम रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2021, 2:17 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. दिल्‍ली में ऑक्‍सीजन का संकट (Oxygen Crisis in Delhi) गहराता जा रहा है और मामले को लेकर दिल्‍ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में सुनवाई चल रही है. इस बीच सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने केंद्र के जवाब को पढ़ते हुए दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि दिल्ली सरकार को पर्याप्त ऑक्सीजन आवंटित की गई है, लेकिन दूसरे राज्यों की तरह वह प्लांट से यहां मंगवाने के लिए टैंक की व्यवस्था करने में नाकाम रही. हालांकि मुझे पता चला है कि सरकार ने एक वॉर रूम तैयार किया है. इसके साथ मेहता ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि अगर दिल्ली को 380 एमटी ऑक्सीजन भी मिलती है तो स्थिति मैनेजेबल है. हमने दिल्ली सरकार के चीफ सेक्रेटरी से इस मुद्दे पर बात की है.

इससे पहले शनिवार को भी दिल्‍ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि दिल्‍ली में ऑक्‍सीजन की कमी की वजह राज्‍य सरकार है, क्‍योंकि उसने ऑक्‍सीजन की आपूर्ति के लिए न तो ठीक से प्रबंधन किया और न वह टैंकरों की व्यवस्था कर सकी. जबकि अरविंद केजरीवाल सरकार ने कहा था कि केंद्र सरकार की वजह से ऑक्‍सीजन का संकट खड़ा हुआ है.

इस बीच जयपुर गोल्डन अस्‍पताल (Jaipur Golden Hospital) ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने सप्लाई चेन में बाधा डाल दी है, क्‍योंकि जो पहले सीधे अस्पताल को ऑक्सीजन की सप्लाई करता था उसने अब फोन उठाना बंद कर दिया है. दिल्ली सरकार भी नहीं उठाती है और हम कहां जाएं. जयपुर गोल्डन अस्पताल ने कोर्ट से कहा कि दिल्ली सरकार की ब्यूरोक्रेसी मशीनरी हालात को कंट्रोल करने में पूरी तरह से फेल हो गई है.

दिल्‍ली से कोर्ट ने किया ये अनुरोध
दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी सरकार से राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 मामलों में वृद्धि के मद्देनजर और जांच केन्द्र स्थापित करने का सोमवार को अनुरोध किया. दिल्ली में बीते कुछ दिन से एक दिन में संक्रमण के 24 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं. मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल तथा न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने दिल्ली सरकार को नमूने एकत्रित करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाने के लिये आवश्यक प्रबंध करने का भी निर्देश दिया.

कई वकीलों ने पीठ को बताया कि उन्हें जांच कराने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि प्रयोगशालाओं का कहना है कि वे दो-तीन दिन बाद नमूने एकत्रित करेंगी. इस पर अदालत ने यह आदेश दिया है. वकीलों ने दावा किया कि पहले एक दिन में एक लाख से अधिक जांच की जा रही थीं, जो अब घटकर 60 हजार प्रतिदिन रह गई हैं. दिल्ली में रविवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 22,933 मामले सामने और 350 रोगियों की मौत हो गई. राजधानी में संक्रमण दर 30.21 प्रतिशत दर्ज की गई है.

आप सरकार के परिपत्र का स्पष्ट रूप से पालन करें



दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के अस्पतालों को निर्देश दिया कि वे कोरोना वायरस के लक्षण वाले रोगियों को भर्ती कराए जाने के दौरान कोविड पॉजिटिव जांच रिपोर्ट मांगने के संबंध में आप सरकार के परिपत्र का 'स्पष्ट रूप से पालन' करें. इस दौरान मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने दिल्ली सरकार को इस मामले पर उसके 23 अप्रैल के परिपत्र को 'व्यापक स्तर पर प्रचारित' करने का भी निर्देश दिया.

पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया, जिसमें दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने का अपील की गई थी कि वह अस्पतालों को कोरोना वायरस के लक्षण वाले रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के दौरान कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट मांगने की बात पर न अड़ने का आदेश दे. याचिकाकर्ता जयदीप आहूजा ने पीठ को बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसा ही निर्देश जारी किया है कि रोगियों के भर्ती करते समय अस्पताल आरटी-पीसीआर पॉजिटिव रिपोर्ट पेश करने की बात पर न अड़ें.

दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि उसका स्वास्थ्य विभाग 23 अप्रैल को परिपत्र जारी शहर के अस्पतालों को निर्देश दे चुका है कि वे कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षणों वाले रोगियों को भर्ती करते समय कोविड पॉजिटिव जांच रिपोर्ट पेश करने की मांग पर न अड़ें. दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया कि ऐसे रोगियों को संदिग्ध मानकर अस्पताल के एक अलग स्थान पर रखा जाता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज