इन तीन वजहों से NEET-JEE प्रवेश परीक्षा में बच्चों को शामिल नहीं होने देना चाहते अभिभावक
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इन तीन वजहों से NEET-JEE प्रवेश परीक्षा में बच्चों को शामिल नहीं होने देना चाहते अभिभावक
नीट और जेईई मेन की परीक्षाएं सितंबर में आयोजित की जानी हैं.

भारत में कारोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते मामलों को देखते हुए छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि नीट-जेईई (NEET-JEE) प्रवेश परीक्षा (Entrance exam) कुछ महीनों के लिए स्थगित कर दी जाए.

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  • Last Updated: August 27, 2020, 4:42 PM IST
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नई दिल्‍ली. आईआईटी-जेईई और नीट की प्रवेश परीक्षा को लेकर लाखों छात्र विरोध कर रहे हैं. भारत में कारोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि प्रवेश परीक्षाएं कुछ महीनों के लिए स्‍थगित कर दी जाए. इतना ही नहीं बिहार, उड़ीसा और असम में बाढ़ के हालातों को देखते हुए भी छात्र परीक्षा को टालने का सरकार पर दवाब बना रहे हैं.

नीट और जेईई की तैयारी कर रहे छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि देशभर के छात्र कोरोना से भयभीत हैं. इतना ही नहीं कोरोना के चलते चरमराई ट्रांस्‍पोर्ट व्‍यवस्‍था और लंबी दूरी पर परीक्षा सेंटर होने से भी चिंता बढ़ी हुई है. अभिभावकों का कहना है कि आखिर बच्‍चे कैसे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचेंगे. इस दौरान बच्‍चे कोविड से संक्रमित हो गए तो क्‍या होगा. देश में 75 हजार से ज्‍यादा कोरोना मरीजों के एक दिन में मिलने के बाद से अभिभावक चिंता में हैं.

बिहार निवासी अभिभावक हृदयेश कुमार कहते हैं कि एक तरफ कोरोना फैल रहा है. दूसरी तरफ बिहार, उड़ीसा और असम में भी बाढ़ आई हुई है. छात्रों के सेंटर 300-400 किमी दूर तक आए हैं. पूरे बिहार राज्‍य में सिर्फ दो सेंटर हैं. जबकि वहां से बड़ी संख्‍या में बच्‍चे प्रवेश परीक्षा में शामिल होते हैं. वहीं मध्‍य प्रदेश में सिर्फ छह सेंटर हैं. पब्लिक ट्रांस्‍पोर्ट नहीं है. लॉकडाउन के बाद किसी के पास इतने पैसे नहीं हैं कि खुद की टैक्‍सी करके बच्‍चों को परीक्षा दिलवाने लाया जाए. कई राज्‍यों की परीक्षाओं में एसओपी की धज्जियां उड़ रही हैं. ऐसे में यह बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य के साथ खिलबाड़ नहीं तो और क्‍या है. उनकी दोनों बेटियां जेईई की तैयारी कर रही हैं लेकिन वे अपने बच्‍चों को इस बार परीक्षा दिलाने नहीं ले जाएंगे.



नीट की तैयारी कर रहे छात्र राहुल कहते हैं कि जब सीबीएसई, एनआईओएस भी परीक्षाएं कैंसिल कराने का फैसला ले चुके हैं जबकि उस वक्‍त कोविड के मामले इतने ज्‍यादा नहीं थे. तो अब सरकार 26 लाख से ज्‍यादा छात्रों के बारे में क्‍यों नहीं सोच रही. राहुल ने बताया कि नीट प्रवेश परीक्षा में लड़कियों की संख्‍या भी काफी ज्‍यादा होती है और वे अपने अभिभावकों के साथ परीक्षाएं देने आती हैं. जिसके लिए उन्‍हें एक दिन पहले ही ठहरने की व्‍यवस्‍था देखनी होती है. अब कोरोना के चलते कोई व्‍यवस्‍था नहीं मिल रही. सभी जगह रेस्‍टोरेंट, होटल बंद है. पब्लिक ट्रांस्‍पोर्ट भी ठप है. तमाम छोटी-मोटी समस्‍याएं भी हैं. जिनपर किसी का ध्‍यान नहीं है. एसओपी में है कि मास्‍क पहनकर एग्‍जाम देना है, अब एक घंटे से ज्‍यादा मास्‍क कैसे लगाया जाए, जबकि चश्‍मा पहनने के दौरान मास्‍क पहनने से बार बार धुंधलापन हो जाता है. यह समस्‍या सभी चश्‍मा लगाने वाले बच्‍चों के साथ है. आखिर इसे कुछ दिन के लिए क्‍यों नहीं टाला जा रहा. सरकार क्‍यों अड़ी हुई है.
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नीट और जेईई मेन की परीक्षाएं इस साल दो बार स्थगित की जा चुकी हैं.




अभी कुछ दिनों पहले एम्‍स के निदेशक ने कहा था कि अगर परीक्षाएं कुछ महीने टाली जाएं तो मैनेज हो सकता है. सभी बच्‍चे भी कह रहे हैं कि सत्र शुरू होने पर हॉलीडेज मिनिमाइज कर लीजिए. क्‍लास के घंटे बढ़ा दिए जाएं. हाफ डे कैंसिल कर दिए जाएं. पांच साल की पढ़ाई लंबी पढ़ाई है चीजें मैनेज हो जाएंगी लेकिन छात्रों की आवाज नहीं सुनी जा रही.

राहुल कहते हैं, 'हम तो बहुत गरीब घर के हैं, हमारे पास प्राइवेट अस्‍पताल में इलाज के लिए पैसा नहीं है. कल हमें कोरोना हो जाए तो क्‍या होगा. हाल ही में एक लेटर जारी किया गया है कि अगर कोरोना हो जाए तो उसकी जिम्‍मेदार एनटीए की नहीं है. फिर किसकी जिम्‍मेदारी है. आखिर बच्‍चे कहां जाएं ?'

मध्‍य प्रदेश के सतना में रहने वाले रामदेव सिंह कहते हैं, ‘मेरा बेटा दिल्‍ली में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था लेकिन कोरोना के बाद पैदा हुए हालातों के बाद मैंने अपने बेटे को परीक्षा देने के लिए मना कर दिया है. मैं खुद किसान हूं. बेटे का सेंटर काफी दूर आया है. यहां वाहन भी नहीं चल रहे. घर में कार नहीं है. ऐसे में बेटा कैसे जाएगा परीक्षा देने.’

बिहार के सहरसा में रहने वाले मानस आनंद कहते हैं कि उनके पास नेटवर्क की समस्‍या है. वहां कनेक्टिविटी नहीं है, इसके बावजूद उन्‍होंने वहीं रहकर फार्म डाला और दिन रात मेहनत कर नीट की तैयारी की है. इस समय उनके यहां बाढ़ आई हुई है. जबकि उनका सेंटर पटना आया है जो सहरसा से 350 किमी दूर है. इतनी लंबी दूरी तय करने के लिए उनके पास अपना साधन भी नहीं है. वहीं बाढ़ के कारण पब्लिक ट्रांस्‍पोर्ट पूरी तरह बंद है. इसलिए वे इस बार परीक्षा नहीं देंगे. वहीं उनके घरवालों ने भी बीमारी और बाढ़ को देखते हुए काफी घबराए हुए हैं और उनके परीक्षा में शामिल होने से मना कर दिया है.

उड़ीसा की रहने वाली मंगला आईआईटी जेईई की तैयारी कर रही हैं. दीपा कहती हैं कि राज्‍य में बाढ़ के हालात हैं. पब्लिक ट्रांस्‍पोर्ट खराब है. उनके पास निजी वाहन नहीं है. साथ ही सेंटर कई सौ किलोमीटर दूर आया है. वहीं उनकी मां का ज्‍योत्‍सना का कहना है कि कोविड का खतरा बहुत ज्‍यादा है. वे अपनी बेटी को परीक्षा देने नहीं भेजेंगी.

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जेईई-नीट को लेकर विरोध जारी है.


यूपी के नौहझील के रहने वाले सत्‍येंद्र शर्मा का कहना है कि उनका इकलौता बेटा शिवम पिछले साल कोटा में कोचिंग करने गया लेकिन कोरोना के चलते वापस बुला लिया. उसने आईआईटी जेईई की तैयारी की है लेकिन अब परिवार नहीं चाहता कि वह परीक्षा देने जाए. सबसे पहले बच्‍चों का स्‍वास्‍थ्‍य है. बच्‍चा बचेगा ही नहीं तो परीक्षा पास करके क्‍या होगा. सरकार को चाहिए कि वह इस परीक्षा का समय आगे बढ़ाए. कोरोना के ऐसे हालातों में कोई भी समझदार अभिभावक अपने बच्‍चों को परीक्षा देने नहीं भेजेगा.

‘25 लाख छात्रों का स्वास्थ्य खतरे में डाला जा रहा’
बता दें कि दिल्‍ली पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्‍यक्ष अपराजिता गौतम कहती हैं कि 12वीं के बाद इन परीक्षाओं को देने वाले बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर लापरवाही बरती जा रही है. कोरोना, बाढ़ और परीक्षा केंद की दूरी ये तीन प्रमुख वजहें हैं कि अभिभावक अपने बच्‍चों को परीक्षा के लिए भेजने को राजी नहीं है. जबकि सरकार प्रवेश परीक्षा को पोस्‍टपॉन करने पर विचार नहीं कर रही. परीक्षा से कोविड का संक्रमण फैलने का खतरा सिर्फ बच्‍चों में ही नहीं है बल्कि परीक्षा देकर घर लौटने वाले बच्‍चों के साथ इस वायरस के घर-घर में पहुंचने का भी खतरा है. शिक्षा मंत्री को इस संबंध में फैसला लेना चाहिए और प्रवेश परीक्षा को आगे बढ़ाना चाहिए.

गौरतलब है कि इस संबंध में राजनीतिक पार्टियां भी आपत्ति जता चुकी हैं. हाल ही में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी आरोप लगाया कि इन परीक्षाओं के आयोजन से 25 लाख छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरे में डाला जा रहा है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘देश भर में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. ज़िद्दी मोदी सरकार उनकी शिकायतों को सुनने, उन पर विचार करने और सभी के लिए स्वीकार्य समाधान खोजने से इनकार क्यों कर रही है?’

सुरजेवाला ने सवाल किया, ‘‘क्या मोदी सरकार इस बात की गारंटी देगी कि परीक्षा के दौरान कोई भी छात्र कोविड संक्रमण से ग्रस्त नहीं होगा? कौन-कौन सी सुरक्षा सावधानियां और प्रोटोकॉल रखे गए हैं? कौन देखेगा कि दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल महज कागजी औपचारिकता न रहें?’’
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