Ghaziabad News- क्‍वारंटीन सेंटरों में 500 बेड खाली, यहां नहीं जा रहे हैं कोरोना मरीज, जानें क्‍यों?

सुविधाएं न होने की वजह से गाजियाबाद के ग्रामीण इलाकों में बनाए गए क्‍वारंटीन सेंटरों के बजाए लोग घरों में आइसोलेट हो रहे हैं.

सुविधाएं न होने की वजह से गाजियाबाद के ग्रामीण इलाकों में बनाए गए क्‍वारंटीन सेंटरों के बजाए लोग घरों में आइसोलेट हो रहे हैं.

सुविधाएं न होने की वजह से गाजियाबाद के ग्रामीण इलाकों में बनाए गए क्‍वारंटीन सेंटरों के बजाए लोग घरों में आइसोलेट हो रहे हैं.

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गाजियाबाद. जिले के ग्रामीण इलाकों में बनाए गए विभिन्‍न क्‍वारंटीन सेंटरों पर 500  बेड खाली पड़े हैं, लेकिन कोरोना मरीज इन सेंटरों में रहकर इलाज कराने के बजाए घरों में इलाज कराना बेहतर समझ रहे हैं. इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि सेंटरों पर जल्‍द ही आक्‍सीजन व अन्‍य सुविधाएं उपलब्‍ध करा दी जाएंगी, जिससे लोग घरों के बजाए इन सेंटरों में आएंगे.

जिले की 161 ग्राम पंचायतों में सरकारी स्कूल, पंचायत भवन या अन्य सरकारी बिल्डिंग को क्‍वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं, ये सेंटर उन मरीजों को ध्‍यान में रखकर बनाए गए हैं, जिनके घर छोटे हों और घरों में आइसोलेशन की व्‍यवस्‍था न हो. अभी तक इन क्‍वांरटीन सेंटरों में न तो ऑक्‍सीजन की कोई व्‍यवस्‍था है और न ही ऑक्‍सीजन लेबल नापने के लिए ऑक्‍सीमीटर हैं. इसके अलावा सेंटरों में खानपान की भी व्‍यवस्‍था नहीं है. ऐसे में मरीज को अगर आक्‍सीजन की जरूरत पड़े तो स्‍वयं ही करनी पड़ेगी और खाने पीने की व्‍यवस्‍था भी परिजनों को करनी पड़ेगी. इसी वजह से लोग इन सेंटरों पर क्‍वारंटीन होने के बजाए घर पर आइसोलेट हो रहे हैं.

इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि जिले के सभी 161 ग्राम पंचायतों में क्‍वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं,औसतन एक सेंटर में 5 मरीज रह सकते हैं. इन सेंटरों पर आक्‍सीजन समेत स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी अन्‍य व्‍यवस्‍थाएं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को करनी है, मरीजों के आने  के बाद उनके खानपान की भी व्‍यवस्‍था की जाएगी.

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