केजरीवाल को मोदी के विकल्प के रूप में देख रहे हैं लोग, केंद्र सरकार उन्हें रोकने के लिए लाई NCT बिल: मनीष सिसोदिया

दिल्ली में एनसीटी बिल को लेकर आप नेता मनीष सिसोदिया ने मोदी सरकार पर हमला बोला है.

दिल्ली में एनसीटी बिल को लेकर आप नेता मनीष सिसोदिया ने मोदी सरकार पर हमला बोला है.

NCT बिल को लेकर आप नेता और भाजपा नेताओं के बीच जमकर बयान बाजी हो रही है. ताजा बयान दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का आया है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार को निशाने पर लिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 25, 2021, 7:04 PM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक, (GNCTD) बिल 2021, लोकसभा के बाद राज्यसभा में पास होने के बाद आप नेता मोदी सरकार और भाजपा पर हमलावर हो गए हैं. दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि GNCTD विधेयक के पारित होने से पता चलता है कि पीएम मोदी की भाजपा सरकार अरविंद केजरीवाल और उनके काम से असुरक्षित महसूस कर रही है. अब तो लोग कहने लगे हैं कि अरविंद केजरीवाल मोदी जी के लिए एक विकल्प हो सकते हैं. उप मुख्यमंत्री सिसोदिया ने कहा कि केजरीवाल जी को आगे बढ़ने से रोकने के लिए ये विधेयक लाया गया है.

पीएम मोदी आज नकारात्मक राजनीति में उतर आए हैं. तो उन्हें राजनीतिक जवाब मिलेगा. हम अपने कानूनी विशेषज्ञों से बात कर रहे हैं और हमारे विकल्प तलाश रहे हैं. सीएम केजरीवाल एक सेनानी हैं, पिछले 6 वर्षों में अपने प्रयासों के बावजूद उन्होंने घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा किया.

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भाजपा की धर्म और जाति की राजनीति फेल: सुशील गुप्ता
इससे पहले आप के राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने भी भाजपा सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने धर्म और जाति की राजनीति को फेल करके अरविंद केजरीवाल के विकास के मॉडल को तवज्जो दी है. दिल्ली का विकास मॉडल जिस तरीके से पूरे देश में फैल रहा है. अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता से घबराकर मोदी जी ने इस सवाल का जवाब संसद में उन्होंने खुद दे दिया.

PM मोदी का विकल्प अरविंद केजरीवाल है. उनके दिल्ली मॉडल को रोकने के लिए यह बिल पास किया गया है. आदमी जिस से डरता है, उसका रास्ता रोकता है. दिल्ली में किस तरीके से विकास हुआ, उस विकास को पसंद कर अब देश के अन्य राज्य भी अरविंद केजरीवाल की तरफ बढ़ रहे हैं.

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राज्यपाल को मुख्यमंत्री बराबर शक्तियां होंगी

इस बिल में राज्‍यपाल को राज्‍य के मुख्‍यमंत्री के बराबर का अधिकार होगा. इस बात को आसान भाषा में समझना हो तो दिल्‍ली विधानसभा में बनाए गए किसी भी कानून में सरकार से मतलब एलजी से होगा. एलजी को सभी फैसलों, प्रस्‍तावों और एजेंडों के बारे में पहले से जानकारी देना आवश्‍यक होगा. अगर किसी मुद्दे पर मुख्‍यमंत्री और एलजी के बीच मतभेद पैदा होते हैं तो उस मामले को राष्‍ट्रपति के पास भेजा जा सकता है. यही नहीं, एलजी विधानसभा से पारित किसी ऐसे बिल को मंजूरी नहीं देंगे जो विधायिका के शक्ति-क्षेत्र से बाहर हैं. इस तरह के बिल को भी राष्‍ट्रपति के पास भेजा जा सकता है. वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही उसे राज्‍य में लागू किया जा सकेगा.

सरकार के अधिकार हो जाएंगे सीमित

गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली एक्ट के तहत दिल्‍ली में चुनी हुई सरकार के अधिकार सीमित किए गए हैं. इस बिल के पास होने के बाद दिल्ली विधानसभा खुद ऐसा कोई नया नियम नहीं बना पाएगी, जो उसे दैनिक प्रशासन की गतिविधियों पर विचार करने या किसी प्रशासनिक फैसले की जांच करने का अधिकार देता हो. इस बिल के बाद के बाद अधिकारियों को काम की आजादी मिलेगी. इससे उन अधिकारियों का डर खत्‍म होगा जिन्‍हें समितियों की तरफ से तलब किए जाने का डर रहता था.
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