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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा हेट स्‍पीच का मामला, BJP नेता ने जनहित याचिका दायर कर की यह मांग
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Updated: February 27, 2020, 11:20 AM IST
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा हेट स्‍पीच का मामला, BJP नेता ने जनहित याचिका दायर कर की यह मांग
2017 में विधि आयोग ने नफरत और भड़काऊ भाषण को परिभाषित किया था. (फाइल फोटो)

बीजेपी नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय (Ashwini Kumar Upadhyay) ने गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की. इस याचिका में कथित घृणा और भड़काऊ भाषण पर विधि आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए तत्काल निर्देश देने की मांग की गई है.

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  • Last Updated: February 27, 2020, 11:20 AM IST
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नई दिल्ली. बीजेपी नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय (Ashwini Kumar Upadhyay) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की. इस याचिका में कथित घृणा और भड़काऊ भाषण पर विधि आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए तत्काल निर्देश देने की मांग की गई है. बता दें, 2017 में विधि आयोग ने नफरत और भड़काऊ भाषण को परिभाषित किया था. इसपर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 153-C और 505-A को जोड़ने का सुझाव दिया गया था.

हाईकोर्ट ने की थी तल्ख टिप्पणी
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के कुछ इलाकों में हुई हिंसा के मामले की सुनवाई के दौरान काफी तल्ख टिप्पणी की थी. इस दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे. कोर्ट ने इस पर सुनवाई के दौरान कहा था कि बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की बात कही थी. इस दौरान पुलिस अधिकारियों से भी पूछा गया कि उन्होंने एफआईआर क्यों नहीं की.



कोर्ट में बीजेपी नेताओं के भाषण के दिखाए गए वीडियो
हाईकोर्ट में बुधवार को इस मामले की सुनवाई हो रही थी. इस दौरान बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर से संबंधित वीडियो दिखाया गया. जिसके बाद लक्ष्मी नगर सीट से बीजेपी विधायक अभय वर्मा का वीडियो भी जज ने कोर्ट ने देखा. इस दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि ये मंगलवार का वीडियो है.

कोर्ट ने पूछा कब का है वीडियो?
वीडियो देखने के बाद कोर्ट ने पूछा कि कल शाम का वीडियो है. कोर्ट ने पुलिस से यह भी पूछा कि क्या वहां धारा-144 लगी थी? इस पर पुलिस ने जानकारी दी कि लक्ष्मी नगर में धारा-144 नहीं लगी थी. तीसरा वीडियो बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का दिखाया गया. जिसपर कोर्ट ने कहा कि हम ये वीडियो देख चुके हैं. फिर नहीं देखना चाहते. इसके बाद कोर्ट में पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा का भी वीडियो चलाया गया.

दिल्ली में एक और 1984 नहीं होगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में काफी तल्‍ख टिप्‍पणी की थी. सुनवाई के दौरान जस्टिस मुरलीधर ने कहा था कि दिल्‍ली हाईकोर्ट के रहते हुए 1984 के दंगे की घटना को दोहराने नहीं दिया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्‍य के उच्‍च पदस्‍थ पदाधिकारियों को हिंसा के पीड़ितों और उनके परिवारों से मुलाकात करनी चाहिए. मामले की सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि अब समय आ गया है जब आम नागरिकों को भी 'Z श्रेणी' जैसी सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए.

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First published: February 27, 2020, 11:00 AM IST
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