Delhi Violence: सुप्रीम कोर्ट ने 'पिंजरा तोड़' की देवांगना कलिता को दी बड़ी राहत, दिल्‍ली पुलिस की याचिका खारिज


सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दिया है.

Delhi Violence Case: नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों की आरोपी देवांगना कलिता (Devangana Kalita) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने से इंकार कर दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 5:50 PM IST
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नई दिल्‍ली. नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में इसी साल फरवरी महीने में हुए दंगों में आरोपी देवांगना कलिता (Devangana Kalita) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ी राहत मिली है, जिसे दिल्ली पुलिस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. दरअसल नॉर्थ ईस्ट दिल्ली दंगा मामले में पिंजरा तोड़ समूह के सदस्य देवांगना कविता को दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है. देवांगना को मिली जमानत को रद्द करने के लिए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान देवांगना को जमानत देने के खिलाफ पुलिस की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली पुलिस ने आरोपी की जमानत को रद्द करने की मांग की थी.

आपको बता दें कि पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ता देवांगना कलिता और नताशा नरवार को दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर गिरफ्तार किया गया था. जबकि वह (देवगना कलिता) एक और मामले में गिरफ्तार हैं और उनसे पूछताछ चल रही है, इसलिए वह अभी भी जेल में बंद रहेंगी. वहीं देवगना कलिता के अलावा पिंजरा तोड़ के एक और सदस्य नताशा नरवाल को भी पुलिस ने 23 मार्च को दिल्ली हिंसा के मामले में गिरफ्तार किया था. इन पर कई और गंभीर आरोप दिल्ली पुलिस की ओर से लगाए गए हैं.

नताशा और देवांगना का जेएनयू से रिश्‍ता
दरअसल नताशा नरवाल और देवांगना कलिता दोनों जेएनयू की छात्राएं हैं. देवांगना कलिता जेएनयू की सेंटर फॉर वुमेन स्टडीज की छात्रा है, तो नताशा सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज की पीएचडी छात्रा हैं. इसके साथ ही दोनों पिंजरा तोड़ की संस्थापक सदस्य हैं. दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों कार्यकर्ताओं को जाफराबाद में हुए प्रदर्शन के मामले में जमानत दे दी थी. हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए अपने आदेश में कहा था कि आरोपी सिर्फ एनआरसी और सीए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे किसी हिंसा में शामिल नहीं थे.
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