OPINION: पीएम नरेंद्र मोदी के फैसलों के नाम रहा 2019

कड़कड़डूमा में होगी पीएम मोदी की रैली
कड़कड़डूमा में होगी पीएम मोदी की रैली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि विपक्ष के लाख विरोध प्रदर्शन के बावजूद एनडीए सरकार ने उन अधिकांश चुनावी वादों को इस साल पूरा कर दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 31, 2019, 4:29 PM IST
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नई दिल्ली. 2019 जाते-जाते देश और दुनिया को बहुत कुछ दे गया. लेकिन भारत के लिए 2019 आजादी के बाद सबसे महत्वपूर्ण वर्ष रहा, चाहे वह राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हो या तीन तलाक पर कानून बनना हो या कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए का हटना हो या देश में नया नागरिकता कानून लागू होने की बात हो, करतारपुर कॉरिडोर (Kartarpur corridor) का खोला जाना, ये वो फैसले थे जिनकी उम्मीद देश की जनता हर साल लगाए रहती थी. ये मुद्दे चुनावी वादों से आगे नहीं बढ़ रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि विपक्ष के लाख विरोध प्रदर्शन के बावजूद एनडीए सरकार ने उन अधिकांश चुनावी वादों को इस साल पूरा कर दिया जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठन के समय से ही उसके चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा हुआ करते थे या यू कहें की 1947 के बाद देश के लिए इतने बड़े और ऐतिहसिक फैसले लेना वाला साल 2019 ही रहा.

लोकसभा चुनावों से मिली प्रधानमंत्री को नई उर्जा
बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी के लिए साल 2019 के शुरूआत परीक्षा से होनी .थी भले ही लोकसभा चुनाव मई में होने थे लेकिन चुनावी वर्ष का दबाव सरकार पर दिख रहा था. 2019 प्रधानमंत्री मोदी के लिए परीक्षा का साल था देश की जनता को नरेंद्र मोदी के पिछले पांच साल के काम पर ये तय करना था कि उन्हें आगे काम करने का मौका दिया जाए या नहीं और वो भी उस दौर में जब 2018 जाते-जाते बीजेपी से तीन राज्यों की सरकारें लेकर गया था. लेकिन जब बात प्रधानमंत्री मोदी की आई तो जनता ने उन्हें मेरिट से पास किया. पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी ने जनता से तीन सौ पार की अपील की और परिणाम वैसे ही आए जैसा ये जोड़ी चाहती थी. देश ने इस जोड़ी को दोबारा सत्ता सौंप दी और इस बार ये जोड़ी पार्टी ही नहीं सरकार में भी एक साथ दिखी. उसके बाद तो ऐतिहासिक फैसलों ने जो रफ्तार पकड़ी उसकी उम्मीद शायद जनता ने वोट देते वक्त भी नहीं की होगी.

तीन तलाक कानून के बाद मुस्लिम महिलाओं को हुआ आजादी का एहसास
2019 में तीन तलाक पर देश को नया कानून मिल गया. वैसे तो 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ही एनडीए सरकार इस पर कानून बनाने की कोशिश में लगी थी, लेकिन राज्यसभा के आंकड़े साथ न होने के कारण सरकार कानून नहीं बना पाई थी. 2019 में दोबारा चुनाव जीतने के बाद सरकार ने पहले 25 जुलाई को लोकसभा से उसके बाद 30 जुलाई को राज्यसभा से पास कराकर कानून बना दिया. इस कानून को मुस्लिम महिलाओं के लिए बदलाव की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है.



अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने का ऐलान किया था.


एक देश-एक कानून, जम्मू-कश्मीर में धारा 370 खत्म
5 अगस्त 2019 को जब गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का ऐलान किया तो देश की राजनीति में जैसे भूचाल आ गया. जिस आर्टिकल 370 को हटाने पर कांग्रेस की सरकारों में इनती बड़ी-बड़ी बातें होती थी वो इतनी आसानी से हट सकती है इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. गृहमंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 हटाने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने का ऐलान कर लेह-लद्दाख इलाके में विकास के लिए नया रास्ता खोल दिया.

अयोध्या- भगवान राम को मिलेगा घर
साल 2019 दुनिया भर में हिन्दू धर्म मानने वालों के लिए सबसे बड़ी सौगात लेकर आया, जब 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने का आदेश दिया. भले ही ये फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया हो लेकिन जिस तरह सरकार के वकीलों ने इस मामले में पैरवी की और फैसले के बाद देश में सामाजिक ताना बाना और सौहार्द कायम रहा उसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को ही जाता है.

सिखों श्रद्धालूओं के मिला करतारपुर जाने का रास्ता
9 नवंबर को ही देश के लाखों सिख श्रद्धालूओं की उम्मीदें भी पूरी हुई जब गुरु नानाक देव की 550वीं जयंती से पहले करतारपुर कॉरिडोर खोल दिया गया. जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जिस तरह भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए थे. ऐसे माहौल में इस रास्ते को खोलने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम के कुटनीतिक निर्णयों को ही जाता है. इस कॉरिडोर का निर्माण सरकार ने रिकॉर्ड समय में किया.

धर्म के नाम पर प्रताड़ित लोगों के जख्म पर लगाया मरहम
2019 जाते-जाते उन लोगों के जख्मों पर मरहम लगाया गया जो भारत के पड़ोसी देशों में धर्म के नाम पर परेशान किए जा रहे थे. भारत में नागरिकता की उम्मीद लगाए करोड़ों लोगों के लिए ये साल खुशियां लेकर आया जब मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन एक्ट पास कर दिया. इस एक्ट के बाद अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किए गए लोगों को अब भारत की नागरिकता मिल सकेगी. ये कानून उन करोड़ों लोगों के जख्म पर मरहम की तरह था जो कई दशकों से ये नहीं तय कर पा रहे थे कि जाए तो जाएं कहां.
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