Pollution in Delhi: केजरीवाल सरकार इस तकनीक की मदद से पराली जलाने पर लगाएगी लगाम

11 अक्टूबर से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में घोल का छिड़काव किया जाएगा.
11 अक्टूबर से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में घोल का छिड़काव किया जाएगा.

पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट (Pusa Research Institute) ने कुछ कैप्सूल बनाए हैं. इस कैप्सूल के जरिए घोल बनाया जाता है. इस घोल को अगर खेतों में खड़े पराली के डंठल पर छिड़क दिया जाए तो वह डंठल गल जाता है और वह खाद में बदल जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 8:07 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind kejriwal) ने प्रदूषण (Pollution) के बढ़ते स्तर को लेकर बड़ा निर्णय लिया है. केजरीवाल ने मंगलवार को साउथ-वेस्ट दिल्ली स्थित खरखरी नाहर गांव में पराली को गलाने के लिए बनाए गए डी-कंपोजर घोल निर्माण केंद्र का निरीक्षण किया. बता दें कि दिल्ली सरकार पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट की निगरानी में पराली के डंठल को खेत में गला कर खाद बनाने के लिए इस घोल का निर्माण करा रही है. इस मौके पर केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार इस घोल का छिड़काव करीब 700 हेक्टेयर जमीन पर अपने खर्चे पर करेगी और किसानों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. किसानों को सिर्फ अपने खेत में इस घोल के छिड़काव के लिए अपनी सहमति देनी होगी. अगले सात दिन के बाद यह घोल बन कर तैयार हो जाएगा और 11 अक्टूबर से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में घोल का छिड़काव किया जाएगा.

पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट ने तैयार की नई तकनीक
केजरीवाल ने कहा, ‘अगर यह प्रयोग सफल होता है तो अन्य राज्यों के किसानों को भी पराली का एक समाधान मिल जाएगा. पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पराली को निस्तारित करने का समाधान निकाला है. पूसा द्वारा इजात किया गया समाधान बहुत ही सस्ता और सरल है. पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कुछ कैप्सूल बनाए हैं. इस कैप्सूल के जरिए घोल बनाया जाता है. इस घोल को अगर खेतों में खड़े पराली के डंठल पर छिड़क दिया जाए तो वह डंठल गल जाता है और वह गल करके खाद में बदल जाता है. डंठल से बनी खाद से उस जमीन की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है, जिसके बाद किसान को अपने खेत में खाद कम देना पड़ता है. इस तकनीक के प्रयोग के बाद किसान को फसल उगाने में लागत कम लगेगी. किसान की फसल की पैदावार अधिक होगी और किसान को खेतों में खड़ी फसल जलानी नहीं पड़ेगी.’

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हरियाणा, पंजाब में पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो चुका है.

दिल्ली सरकार अपने खर्चे पर करेगी छिड़काव


अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि यह प्रयोग सफल होगा और अगर यह प्रयोग सफल होता है तो आसपास के राज्यों के किसानों को भी पराली का एक समाधान देगा. यह इतना सस्ता है कि दिल्ली के अंदर 700 हेक्टेयर जमीन पर घोल बनाना, छिड़काव करना, इसका ट्रांसपोर्टेशन आदि मिला कर इस पर केवल 20 लाख रुपए का खर्च आ रहा है. यदि यह प्रयोग सफल रहा तो हम किसानों के खेत में घोल का छिड़काव हर साल करेंगे.’



दिल्ली में 45 प्रतिशत प्रदूषण पराली से
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा. 'दिल्ली के अंदर पराली का धुंआ बहुत कम पैदा होता है. दिल्ली के अंदर पराली बहुत कम मात्रा में जलाई जाती है, लेकिन पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर पराली जलाई जाती है और यह दिल्ली के प्रदूषण को करीब 45 प्रतिशत तक प्रभावित करती है.'

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दिल्ली सरकार के मुताबिक लगभग 1200 किसानों ने इस तकनीक को अपने खेत में इस्तेमाल करने की इच्छा जताते हुए रजिस्ट्रेशन कराया है. पूसा रिसर्च इंस्टीट्यूट पिछले तीन-चार साल से पराली की समस्या के समाधान को लेकर रिसर्च कर रहा था.
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