अब दिल्ली में कम होगा प्रदूषण, पराली को खाद में बदलेगा ICAR का खास कैप्सूल
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अब दिल्ली में कम होगा प्रदूषण, पराली को खाद में बदलेगा ICAR का खास कैप्सूल
वैज्ञानिकों ने एक खास कैप्सूल तैयार किया है. 

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय (Gopal Rai) ने कहा कि एक बेहतर तकनीक है पराली को खाद में परिवर्तित करने की. दवा के छिड़काव में जो भी खर्चा आएगा वो सरकार उठाएगी.

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  • Last Updated: September 16, 2020, 7:54 PM IST
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दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण (Delhi Pollution) बढ़ने के पीछे की एक वजह पराली को जलाया जाना भी बताया जाता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस समस्या का हल निकाल लिया है. पराली को खाद में परिवर्तित करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (Indian Agricultural Research Institute) ने एक नई तकनीक तैयार की है. दरअसल, दिल्ली- एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के पीछे पराली को सबसे बड़ी वजह माना जाता है. धान की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष को पराली कहते हैं जिसे किसान अगली फसल लगाने से पहले खेत को तैयार करने के लिए जला देते है. इसके बाद इसका धुंआ वातावरण को प्रदूषित करने लगता है.

अब इस समस्या को खत्म करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा ने एक नई तकनीक तैयार की है. इस संस्थान ने इसके लिए एक खास कैप्सूल तैयार किया है. इस कैप्सूल को पानी में घोलकर एक मिश्रण के तौर पर तैयार किया जाता है. फिर इसका मशीनों के ज़रिए पराली के ऊपर छिड़काव किया जाता है. इसे तैयार करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि पराली पर इसके छिड़काव के करीबन महीनेभर बाद पराली खाद में परिवर्तित हो जाती है. फिर इसे किसान खेतों में इस्तेमाल कर सकते हैं. इस दौरान एक मशीन और लगाई गई है जो पराली के खाद बनाए जाने के बाद उसमें से मिट्टी और पत्थर को अलग कर देती है.

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दिल्ली सरकार का कहना है कि अगर इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल हो तो काफ़ी हद तक प्रदूषण के बढ़ते स्तर को काम किया जा सकता.




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छिड़काव का खर्च उठाएगी सरकार 

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय बुधवार को इस पूरी प्रक्रिया को जानने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पहुंचे और वैज्ञानिकों से इसकी पूरी जानकारी ली. इसके बाद गोपाल राय ने बताया कि ये एक बेहतर तकनीक है पराली को खाद में परिवर्तित करने की, जिसे अब दिल्ली के किसान इस्तेमाल कर पाएंगे. इस दौरान गोपाल राय ने कहा कि इसके छिड़काव में जो भी खर्चा आएगा वो सरकार उठाएगी. गोपाल राय ने कहा कि सिर्फ़ दिल्ली में ही नहीं बल्कि इस तरह से पराली को डिकम्पोज करने की प्रक्रिया का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में भी किया जा सके इसके लिए दिल्ली सरकार केन्द्र सरकार के समाने मांग रखेगी. दरअसल, दिल्ली सरकार का कहना है कि अगर इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल हो तो काफ़ी हद तक प्रदूषण के बढ़ते स्तर को काम किया जा सकता.
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