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निर्भया केस: राष्ट्रपति ने खारिज की दोषी अक्षय ठाकुर की दया याचिका

निर्भया सामूहिक बलात्कार कांड के दोषी अक्षय ठाकुर   (फाइल फोटो)

निर्भया सामूहिक बलात्कार कांड के दोषी अक्षय ठाकुर (फाइल फोटो)

इससे पहले निर्भया गैंगरेप मामले के एक अन्य दोषी विनय शर्मा की दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) ने खारिज कर दी थी.

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    नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gang Rape) कांड के दोषी अक्षय ठाकुर (Akshay Thakur) ने हाल ही में भारत के राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका (Mercy Petition) दायर की थी. जिसे बुधवार को राष्ट्रपति ने ख़ारिज कर दिया है. इससे पहले निर्भया गैंगरेप मामले के एक अन्य दोषी विनय शर्मा की दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) ने खारिज कर दी थी. वहीं इस मामले में दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका भी राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी. मुकेश ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती दी थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था.

    बता दें निर्भया गैंगरेप केस में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है. केंद्र और दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के कुछ घंटे बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की, जिसमें निर्भया के 'सभी दोषियों को एक साथ फांसी' वाले फैसले को चुनौती दी है. मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि शीर्ष अदालत में चुनौती के लिए जो आधार बनाए गए हैं वो लगभग वहीं हैं जो निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करते समय उच्च न्यायालय में रखे गए थे.

    हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी का इंतजार
    उन्होंने कहा कि चूंकि हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी का इंतजार है, ऐसे में केंद्र और दिल्ली सरकार ने इसकी प्रतीक्षा करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने को प्राथमिकता दी. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि दोषियों को अलग-अलग फांसी दी जा सकती है क्योंकि मुकेश दया याचिका सहित सारे कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर चुका है.





    चारों दोषी न्यायिक प्रक्रिया का गलत फायदा उठा रहे
    दरअसल केंद्र सरकार ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि चारों दोषी न्यायिक प्रक्रिया का गलत फायदा उठा रहे हैं. लिहाजा जिन दोषियों की दया याचिका खारिज हो चुकी है या किसी भी फोरम में उनकी कोई याचिका लंबित नही हैं, उनको फांसी पर लटकाया जाए. किसी एक दोषी की याचिका लंबित होने पर बाकी 3 दोषियों को फांसी से राहत नही दी जा सकती. हालांकि, कोर्ट ने केंद्र की इस दलील को खारिज कर दिया. कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि निर्भया के दोषियों को अब जल्द ही फांसी मिल सकेगी.

    क्या 'निर्भया' गैंगरेप का मामला
    आपको जानकारी के लिए बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 की रात 23 साल की एक पैरामेडिक स्टूडेंट अपने दोस्त के साथ दक्षिण दिल्ली के मुनिरका इलाके में बस स्टैंड पर खड़ी थी. दोनों फिल्म देखकर घर लौटने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इंतजार कर रहे थे. इस दौरान वो वहां से गुजर रहे एक प्राइवेट बस में सवार हो गए. इस चलती बस में एक नाबालिग समेत छह लोगों ने युवती के साथ बर्बर तरीके से मारपीट और गैंगरेप किया था. इसके बाद उन्होंने पीड़िता को चलती बस से फेंक दिया था. बुरी तरह जख्मी युवती को बेहतर इलाज के लिए एयर लिफ्ट कर सिंगापुर ले जाया गया था. यहां 29 दिसंबर, 2012 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी. घटना के बाद पीड़िता को काल्पनिक नाम ‘निर्भया’ दिया गया था.

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