ANALYSIS: भाजपा ही नहीं सपा-बसपा के लिए भी चुनौती हैं ‘लखनऊ’ की ये मुस्कुरातींं प्रियंका गांधी!

प्रेस कांफ्रेंस में प्रियंका गांधी
प्रेस कांफ्रेंस में प्रियंका गांधी

क्या यूपी की एक स्ट्रॉन्ग प्लेयर बन सकती हैं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी? वो यूपी में जनता के सरोकार वाले किसी भी मुद्दे को छोड़ने को तैयार नजर नहीं आतीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 30, 2019, 6:52 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. लखनऊ में सोमवार दोपहर 1 बजे कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस होनी थी. समय आगे बढ़ा और कॉन्फ्रेंस करीब 3 बजे शुरू हुई. लंबे समय बाद कांग्रेस के लखनऊ मुख्यालय में माहौल बेहद गर्मजोशी वाला था. यूपी के पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और मीडिया वालों से मुख्यालय भरा था. कांग्रेसी नेताओं की कतार में एक चेहरा ऐसा था, जिस पर मीडिया की नजरें गड़ी हुई थीं. वो चेहरा था कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का.

हम कह सकते हैं ऐसा क्या है? लंबे समय के बाद राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय हुईं प्रियंका को ये तो करना ही था, वरना वो कैसे अपनी जमीन तैयार करेंगी? कुछ बातें हैं जो बता रही हैं कि प्रियंका को योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव और मायावती अगर जूनियर प्लेयर मानेंगे तो सचमुच बड़ी भूल करेंगे. आम चुनाव के दौरान सक्रिय हुईं प्रियंका धड़ाधड़ यूपी की यात्राएं कर रही हैं. वो यूपी में जनता से जुड़े किसी भी मुद्दे को छोड़ने को तैयार नजर नहीं आ रही हैं. प्रियंका गांधी की राजनीतिक गतिविधियां न सिर्फ बीजेपी बल्कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं हैं.

 priyanka gandhi, congress, bjp, samajwadi party, BSP, uttar pradesh politics, प्रियंका गांधी, कांग्रेस, बीजेपी, समाजवादी पार्टी, बीएसपी, उत्तर प्रदेश की राजनीति, working style of priyanka gandhi, प्रियंका गांधी की कार्यशैली
प्रियंका गांधी ने यूपी कांग्रेस में युवाओं को तरजीह दी है.




मुलायम का स्टाइल
नेता वही जो जनता की तकलीफों में उनके साथ खड़ा हो. सब वाकिफ हैं कि इस मामले में मुलायम का कोई सानी नहीं रहा है. उन्हें यूं ही नहीं धरती पुत्र मुलायम सिंह कहा जाता रहा है. दुख तकलीफ के किसी भी मौके पर बीते तीन दशक में सारी राजनीतिक बिरादरी इस बात की गवाह रही है कि मुलायम वहां जरूर पहुंचते थे, जहां उनकी जनता या कार्यकर्ता से जुड़ा कोई मुद्दा होता था.

अखिलेश ने धीरे ही सही, लेकिन उस शैली को अपनाना शुरू कर दिया है. प्रियंका इस सीख को लगता है पहले ही सीख कर आई हैं और बीते कुछ महीने में चाहे उन्नाव हो या फिर लखनऊ वह आक्रामक नजर आ रही हैं. लाख बाधाओं के बावजूद वो पीड़ितों से मिलकर ही मानती हैं. दारापुरी की बीमार पत्नी से उनकी मुलाकात का ये वीडियो अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है.
बेहतर कम्युनिकेशनहालांकि, राहुल और प्रियंका की तुलना करना सही नहीं होगा. फिर भी राहुल गांधी ने राजनीति में जो वाकचातुर्य की अल्फाबेट इतने साल में सीखी है वो लगता है कि प्रियंका राजनीति में आने से पहले ही सीख चुकी हैं. उनका बीते दिनों किया गया कोई भी ट्वीट या मीडिया में दिया गया कोई भी बयान मिसकैल्कुलेट नहीं रहा. उन्होंने काम के आधार पर यूपी सरकार पर एक नहीं कई बार निशाना साधा, लेकिन उनके बयानों में व्यक्तिगत खीज नजर नहीं आती.मजबूत बॉडी लैंग्वेजप्रियंका की बीते दिनों की राजनीतिक गतिविधि एक बात और साफ करती है कि वो बाइचांस की राजनीति करने का इरादा बिल्कुल नहीं रखती हैं. आम दिनों में दारापुरी के घर पहुंचना कोई बड़ी बात नहीं होती, लेकिन भारी सरकारी विरोध के बीच कभी कार तो कभी स्कूटी, कभी कई किलोमीटर पैदल चलकर उनका पहुंचना काफी कुछ कहता है. आज प्रेस कांफ्रेंस के दौरान वो आत्मविश्वास से भरी नजर आईं. भाषा में सटीकता हो या फिर कृष्ण, राम या गेरुए वस्त्र को लेकर उनकी की गई टिप्पणी गौर करने वाली रही.
 priyanka gandhi, congress, bjp, samajwadi party, BSP, uttar pradesh politics, प्रियंका गांधी, कांग्रेस, बीजेपी, समाजवादी पार्टी, बीएसपी, उत्तर प्रदेश की राजनीति, working style of priyanka gandhi, प्रियंका गांधी की कार्यशैली
रिटायर्ड आईपीएस एसआर दारापुरी के घर जाती हुईं प्रियंका गांधी.
पत्रकारों ने जब दारापुरी के घर जाने को लेकर उनकी पुलिस से हुई बहस और खींचतान के सवाल पर उन्हें घेरना चाहा तो प्रियंका का जवाब बेहद सधा और निरुत्तर करने वाला था. प्रियंका ने कहा कि मेरी सुरक्षा बहुत छोटी बात है. हमें प्रदेश की सुरक्षा पर बात करना जरूरी है. सवाल कड़े पूछे गए, लेकिन प्रियंका अपना धैर्य नहीं खो रही थीं और मुस्कुराती जा रही थीं. यहां नए नेता के लिए यह प्रथम श्रेणी में पास होने जैसी बात है.


संगठन पहले, नाम बाद में
प्रियंका को जब से यूपी की कमान मिली है, तब से यूपी कांग्रेस चर्चा में है. कई सीनियर्स को बैंच पर बिठा दिया गया है, जबकि कई युवाओं को मौके मिलने शुरू हुए हैं. लंबे समय बाद यूपी में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का चुना जाना इतनी चर्चा में रहा. नए प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और कुछ नए युवा नेताओं के साथ प्रियंका ने यूपी में कांग्रेस को फिर से जीवित करने की जी-तोड़ कोशिशें शुरू कर दी हैं, उनकी ये कोशिशें रंग लाने लगी हैं. कार्यकर्ता सक्रिय और नेता चुस्त हैं.

हालांकि, ये शुरुआत भर है. आगे यह देखना बाकी होगा कि जो गति प्रियंका ने अभी हासिल की है वो उसे बनाए रख पाएंगी भी या नहीं, क्योंकि 2022 आते-आते उन्हें बीजेपी, सपा और बसपा से कड़ा मुकाबला तो करना ही होगा.

ये भी पढ़ें: देखते भारत के किसानों को बर्बाद कर देता है ये पाकिस्तानी दुश्मन!

अमित शाह ने केजरीवाल से बहस के लिए प्रवेश वर्मा का ही क्यों लिया नाम?
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज