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Pro CAA Protest: मौजपुर के प्रदर्शनकारी बोले- जाफराबाद का रास्ता खुलवाओ, हम यहां से हट जाएंगे
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Updated: February 24, 2020, 10:26 AM IST
Pro CAA Protest: मौजपुर के प्रदर्शनकारी बोले- जाफराबाद का रास्ता खुलवाओ, हम यहां से हट जाएंगे
दिल्ली के मौजपुर चौक पर संशोधित नागरिकता कानून के समर्थन में लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर रास्ता बंद कर दिया है. (फाइल फोटो)

देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) के मौजपुर (Maujpur) चौक पर संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) के समर्थन में लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर रास्ता बंद कर दिया है.

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नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली के मौजपुर (Maujpur) चौक पर संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) के समर्थन में लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर रास्ता बंद कर दिया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सीएए विरोधी प्रदर्शनकारी जाफराबाद को खाली कर दें, हम मौजपुर का रास्ता खोल देंगे. हम हिंसा नहीं कर रहे हैं. संशोधित नागरिकता कानून किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है, उसका लोग विरोध कर रहे हैं. पढ़े-लिखे लोग भी इन्हें गलत राय दे रहे हैं. बच्चों को हम निकलने दे रहे हैं. जाफराबाद का रास्ता खुलवा दीजिए, हम मौजपुर का रास्ता खोल देंगे. दूसरा शाहीन बाग नहीं बनने देंगे. लोगों को यहां परेशान नहीं होने देंगे.

पुलिस पर किया गया पथराव
मौजपुर इलाके में रविवार को स्‍थिति तनावपूर्ण हो गई थी. मौजपुर इलाके में हुई पत्थरबाजी की घटना पर संयुक्त पुलिस आयुक्त (पूर्वी रेंज) आलोक कुमार ने बताया कि पुलिस पर भी पथराव किया गया. हमने स्थिति पर काबू पा लिया है. घटनास्थल पर पर्याप्त कर्मी तैनात कर दिए गए हैं और फ्लैग मार्च जारी है.



दो गुट आए आमने-सामने
दरअसल, मौजपुर में सीएए के विरोध में प्रदर्शनकारी और सीएए के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले लोग आमने- सामने आ गए. दोनों गुटों की ओर से पत्‍थरबाजी शुरू हो गई. इसके बाद वहां अफरा-तफरी मच गई. घटनास्थल पर मौजूद दिल्ली पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे. वहीं मौजपुर इलाके में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने मौजपुर-बाबरपुर मेट्रो स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए थे.

क्या है सीएए?
संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण देश में शरण लेने आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था. ऐसे सभी लोग भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस कानून के विरोधियों का कहना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने की बात कही गई है, इसलिए यह कानून धार्मिक भेदभाव वाला है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.

क्या है एनआरसी?
एनआरसी यानी नेशनल सिटिजन रजिस्टर के जरिए भारत में अवैध तरीके से रह रहे घुसपैठियों की पहचान की जाती है. अभी तक एनआरसी की प्रक्रिया सिर्फ असम में की गई है. असम में एनआरसी की फाइनल सूची जारी की जा चुकी है लेकिन असम में एनआरसी की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरी की गई है. केंद्र सरकार ने कहा है कि वह पूरे देश में NRC को लागू करेगी. साथ ही यह भी कहा था कि देश भर में लागू होने वाली एनआरसी के मानक असम की एनआरसी के मापदंड से अलग होगा.

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First published: February 24, 2020, 9:07 AM IST
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