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'बेटा CRPF जवान और सुकमा में तैनात है, यह सुनते ही लड़की वाले शादी से कर देते हैं मना'

प्रतीकात्मक फाइल फोटो.

प्रतीकात्मक फाइल फोटो.

ऐसा नहीं है कि पुलवामा हमले के बाद से ये चिंता और बढ़ गई है. इससे पहले भी ये ही हालात थे.

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देश में बहुत सारे परिवार ऐसे हैं जहां से कोई न कोई सेना या पैरामिलिट्री में है. फौज और पैरामिलिट्री की नौकरी करने के चलते किसी को बेटे की तो किसी को भाई, पति और आतंकवादियों से लड़ रहे पिता की चिंता रहती है. ऐसा नहीं है कि पुलवामा हमले के बाद से ये चिंता और बढ़ गई है. इससे पहले भी ये ही हालात थे.

छत्तीसगढ़, नॉर्थ ईस्ट और जम्मू-कश्मीर में तैनात जवानों के घर वाले जब तक दिन में एक बार बात नहीं कर लेते उन्हें चैन नहीं मिलता है. ऐसे ही सीआरपीएफ में हवलदार की रैंक से रिटायर्ड हनुमान सिंह मूल निवासी बिहार और अब देवरिया के रहने वाले (काल्पनिक नाम) से न्यूज18 हिन्दी ने जाना कि कैसे वह सुकमा में तैनात अपने बेटे के लिए परेशान रहते हैं.

उन्‍होंने कहा, '2012 से बेटा सीआरपीएफ में है. आजकल सुकमा में तैनात है. सुकमा के हालात को देखते हुए जब तक दिन में एक बार बात नहीं कर लेता हूं रात को नींद नहीं आती है. मोबाइल पर जब भी किसी अनजान नम्बर से कॉल आती है तो डर लगने लगता है. उस वक्त तो जान ही निकल जाती है जब टीवी पर खबर चलती है कि सुकमा में नक्सलियों से मुठभेड़ हो रही है.'

सिंह ने बताया, 'हालत ये हो गई है कि 2017 से बेटे की शादी के लिए घूम रहा हूं लेकिन सुकमा में तैनाती का नाम सुनते ही रिश्ते के लिए मना कर देते हैं. कहते हैं कि अब तो सीआरपीएफ वालों को पेंशन भी नहीं मिलती है, अगर लड़के को कुछ हो गया तो लड़की क्या करेगी.'

वे अपनी नौकरी को याद करते हुए कहते हैं, 'हमारे वक्त तो मुश्किल से ही नक्सली सामने आते थे. अब तो आए दिन मुठभेड़ होती रहती हैं. मैं तो बेटे को कहता हूं कि नौकरी से इस्तीफा देकर आ जा. मेरी पेंशन में गुजारा कर लेंगे. डर लगता है कि बेटे को कुछ हो गया तो क्या करूंगा. 20-25 लाख रुपये मिलेंगे तो उसका मैं क्या करूंगा जब बेटा ही नहीं रहेगा तो.'

पुलवामा हमले के बाद उनके मन में डर और गहरा हो गया है. वे कहते हैं, 'अब जिस दिन पुलवामा वाला हमला हुआ है उसी रात देवरिया से दिल्ली के लिए चल दिया था. यहां मेरे समय के कुछ अफसर हैं तो उनसे मिलकर बेटे को सुकमा से निकलवाना चाहता हूं. लेकिन क्या करूं बेटा भी जिद्दी है, कहता है कि मैं यहां ठीक हूं और पोस्टिंग पूरी करने के बाद ही सुकमा छोडूंगा.'

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इस बारे में सीआरपीएफ से आईजी रिटायर्ड वीएस पनवर का कहना है, “जवान के हर घर की लगभग ये ही कहानी है. आज 80 प्रतिशत सीआरपीएफ नॉर्थ ईस्ट, नक्सली एरिया और जम्मू-कश्मीर में तैनात है. सिर्फ 20 प्रतिश ही जवान शांत क्षेत्र में तैनात हैं. अब ऐसे में लोग करें भी तो क्या.”

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