विशेष इंटरव्यू : गहलोत ने कहा - राजस्थान में गहरा है ऑक्सीजन संकट, हमें 200 मीट्रिक टन आज ही चाहिए

सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि हम बहुत मुश्किल में हैं. सबसे बड़ी कठिनाई ऑक्सीजन की कमी है. (फाइल फोटो)

सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि हम बहुत मुश्किल में हैं. सबसे बड़ी कठिनाई ऑक्सीजन की कमी है. (फाइल फोटो)

मनमोहन सिंह के पत्र का जो जवाब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने दिया था वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय थी. मनमोहन सिंह ने अपने पत्र में किसी भी तरह से सरकार की आलोचना नहीं की थी.

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  • Last Updated: April 30, 2021, 10:33 PM IST
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कोरोनो वायरस की दूसरी लहर में राजस्थान पांच सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक है. यहां कोरोना संक्रमण के मामलों की वृद्धि दर बहुत अधिक है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद ही संक्रमित होकर इससे जूझ रहे हैं. उन्होंने एक विशेष इंटरव्यू में उन चुनौतियों की बात की जिसका सामना यह राज्य कर रहा है और उन्होंने इसे एक गहरा संकट बताया ...

सवाल : राजस्थान में कोविड की क्या स्थिति है और इसकी चुनौतियां क्या हैं?

अशोक गहलोत : हम बहुत मुश्किल में हैं. सबसे बड़ी कठिनाई ऑक्सीजन की कमी है. मैंने तीन दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया था और उनसे राजस्थान के लिए अधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए कहा था. कल, मैंने गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को फोन किया. मैंने उनसे कहा कि ऑक्सीजन की कमी के कारण लोग मरेंगे और हमारे राज्य में सक्रिय मरीजों की संख्या 1.7 लाख है. हमारे राज्य में कोरोना संक्रमण की ग्रोथ रेट देश में सबसे अधिक है. हम सक्रिय केसों के मामले में अब शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हैं. मैंने उनसे (प्रधानमंत्री और अन्य) कहा कि हमें आपके फॉर्मूले के अनुसार ऑक्सीजन मिलना चाहिए. हम गहरे संकट में हैं क्योंकि हम बहुत कम ऑक्सीजन पा रहे हैं. हमें पर्याप्त रेमडेसिविर भी नहीं मिल रहे हैं क्योंकि हमें अपने सक्रिय मामलों के लिए केवल 30 हजार इंजेक्शन मिल रहे हैं. लेकिन गुजरात को 1.25 लाख इंजेक्शन मिल रहे हैं जबकि वहां एक्टिव केसों की संख्या 80 हजार है. इसी तरह मध्य प्रदेश को 90 हजार इंजेक्शन मिल रहे हैं. मैंने पीएम से पूछा है- क्या यह जस्टिस है?

सवाल : आपको कितने ऑक्सीजन की जरूरत है? कितनी विकट स्थिति है?
अशोक गहलोत : अब तक के अनुभव के मुताबिक, 12% एक्टिव रोगियों को ऑक्सीजन की आवश्यकता है, इसलिए हमारे 20 हजार 400 रोगियों को (1.7 लाख सक्रिय मामलों में से) आज ऑक्सीजन की आवश्यकता है. इसलिए हमें ऑक्सीजन के लगभग 466 मीट्रिक टन की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 265 मीट्रिक टन मिल रही है. इस तरह लगभग 201 मीट्रिक टन की कमी है. देश में सक्रिय कोरोना के मामले में हमारी हिस्सेदारी 5% की है, लेकिन ऑक्सीजन का आवंटन केवल 1.6% है. यदि कोरोना के मामलों में वृद्धि जारी रहती है, तो एक सप्ताह में हमें 550 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत होगी. इसलिए हमने केंद्र से अनुरोध किया है कि 201 मीट्रिक टन अतिरिक्त ऑक्सीजन हमें आज ही तुरंत आवंटित की जाए. हमारे तीन मंत्री दिल्ली गए और इस मुद्दे पर चार वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों से भी मिले और मैंने देश के सबसे महत्वपूर्ण लोगों से बात की है. अगर ऑक्सीजन की कमी के कारण लोग मर जाते हैं, तो यह न राज्य के हित में होगा और न केंद्र के. क्योंकि लोग यही कहेंगे कि हमारे अपने लोग मर रहे हैं, जबकि सरकारें लड़ रही हैं. इसलिए केंद्र और राज्य दोनों को एकसाथ मिलकर काम करने की जरूरत है, न कि किसी ब्लेम गेम में उलझने की. इसके अलावा यदि कोई राज्य ऑक्सीजन या दवाओं के जरिए अन्य राज्यों की मदद करना चाहता है, तो उसे केंद्र की देखरेख में अनुमति दी जानी चाहिए.

सवाल : पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी को सुझावों के साथ लिखा, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से उन्हें उल्टा जवाब मिला...

अशोक गहलोत : यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय था. अगर मनमोहन सिंह जैसा व्यक्ति प्रधानमंत्री को लिख रहा है, और वह कांग्रेस वर्किंग कमेटी की भावनाएं सामने रख रहा है... तो जवाब बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था. मनमोहन सिंह ने अपने पत्र में किसी भी तरह से सरकार की आलोचना नहीं की थी. लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन का दिया गया जवाब बेहद अनुचित था. मनमोहन सिंह के कुछ सुझाव बाद में लागू भी किए गए. लेकिन उन्हें (मोदी सरकार को) इस तरह के सुझावों को सम्मानजनक तरीके से स्वीकार करना चाहिए था. लोकतंत्र में शालीनता तो होनी ही चाहिए.



सवाल : 18 से 44 आयु वर्ग के लिए केंद्र की नई टीकाकरण नीति से आप सहमत हैं?

अशोक गहलोत : हमने केंद्र से पहले मांग की थी कि 18-44 आयु वर्ग के लिए राज्यों को उसी तरह से टीके की आपूर्ति की जाए, जिस तरह से 60+ आयु वर्ग और 45-59 आयु वर्ग के लिए की गई थी. हालांकि वह आपूर्ति भी कम हो रही थी और अगर राज्य निजी सप्लायर्स से 18-44 आयु वर्ग के लिए खुद ही खरीद शुरू करते हैं, तो जनता को नुकसान होगा क्योंकि टीके उचित मूल्य पर नहीं मिलेंगे. यह गड़बड़ हो जाएगा. मैंने पिछले 50 वर्षों में कभी नहीं सुना कि जनता को टीकों के लिए भुगतान करना पड़ा हो - चाहे वह पोलियो का टीका हो या बीसीजी का, यह हमेशा निःशुल्क रहा है. दोनों निजी आपूर्तिकर्ता राज्यों से वैक्सीन के लिए अधिक पैसे ले रहे हैं.

सवाल : आपने तो अब कहा है कि राजस्थान में 18-44 आयु वर्ग को मुफ्त टीका लगाया जाएगा...

अशोक गहलोत : अब तक टीकाकरण की सारी कवायद पर केंद्र का पूरा नियंत्रण था, राज्य तो सीन में थे ही नहीं. केंद्र ने टीकाकरण के लिए बजट में 35 हजार करोड़ रुपये रखे थे और उसने पहले कभी नहीं कहा कि राज्यों को एक निश्चित आयु-वर्ग के वैक्सीन के लिए भुगतान करना होगा. अगर कुछ महीने पहले यही बात हमसे कही जाती, तो हम अपने राज्य के बजट में इसके लिए प्रावधान करते. लेकिन अब केंद्र ने अप्रैल में हमें बताया कि हमें टीके खरीदने होंगे जबकि हमारा बजट इस मद में शून्य है. इसलिए अब राज्य का बजट गड़बड़ा रहा है और विकास की अन्य योजनाएं प्रभावित होंगी. जब केंद्र का नियंत्रण (टीकाकरण पर) था, तो उनके पास जिम्मेदारी भी थी. फिलहाल 45+ आयु वर्ग के लिए टीकों की आपूर्ति में भी बड़ी कमी है, क्योंकि हम प्रतिदिन 5 लाख से अधिक लोगों को टीका लगा रहे हैं और हम कुल वैक्सीनेशन के मामले में देश में नंबर दो हैं. सिर्फ हम ही नहीं, बल्कि 10 राज्यों ने पीएम से वैक्सीन स्टॉक्स के घटने की शिकायत की है. वैक्सीन है कहां उनके पास.

सवाल : आप 1 मई से 18-44 आयु वर्ग का टीकाकरण शुरू कर पाएंगे?

अशोक गहलोत : हमने निर्माताओं को टीके का ऑर्डर दे रखा है, लेकिन किसी को नहीं पता कि उसकी आपूर्ति कब होगी. हम 18-44 आयु वर्ग के लिए टीकाकरण अभियान 1 मई से शुरू नहीं कर सकते क्योंकि आपूर्ति ही नहीं है. लेकिन हम तैयार हैं कि जैसे ही आपूर्ति शुरू होती है, हम वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू कर देंगे.
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