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दिल्ली HC में बोले राकेश अस्थाना, मेरे करियर को पटरी से उतारने की साजिश, प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है PIL

दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने अपनी नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में बात रखी है.

दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने अपनी नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में बात रखी है.

Rakesh Asthana News: दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने अपनी नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्‍ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में जवाब दाखिल किया है. उन्‍होंने कोर्ट से कहा कि मेरे करियर को पटरी से उतारने के लिए साजिश के तहत पीआईएल दायर की गई है. इसके अलावा उन्‍होंने प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) द्वारा उनके संबंध में 2017 से किए गए ट्वीट्स का विशेष जिक्र भी किया है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. विवादों से चोली-दामन का रिश्ता रखने वाले दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना (Rakesh Asthana) ने आरोप लगाया है कि उनके करियर को ‘पटरी’ से उतारने के लिए उनके खिलाफ निरंतर सोशल मीडिया अभियान चलाया जा रहा है और चुनिंदा तरीके से उन्हें निशाने पर लिया जा रहा है. उन्होंने अपनी नियुक्ति को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) के लिखित जवाब में अपने आरोपों के समर्थन में अधिवक्ता प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) द्वारा उनके संबंध में 2017 से किए गए ट्वीट्स का विशेष जिक्र भी किया है.

    इंडियन एक्‍सप्रेस के मुताबिक, इसके साथ जनहित याचिका का गुण-दोष के आधार पर खुद जवाब नहीं देने और इसे केंद्र सरकार पर छोड़ने का निर्णय लेते हुए अस्थाना ने हाईकोर्ट से कहा कि उन्होंने केवल यह ध्यान दिलाने के लिए जवाब दाखिल किया है कि उनके खिलाफ याचिकाकर्ता व्यक्तिगत प्रतिशोध की भावना रखते हैं और उनके खिलाफ मामले या तो किसी के कुछ गुप्त व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए या किसी ऐसे व्यक्ति के लिए दर्ज किए गए हैं, जिसके इशारे पर मेरे करियर को पटरी से उतारने के प्रयास किए जा रहे हैं.

    पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने लगाया ये आरोप
    पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने कॉमन कॉज और सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) का नाम दिया है और कहा है कि एक या दो व्यक्ति दोनों संगठनों को चलाते हैं और उन पर गहरा और व्यापक नियंत्रण रखते हैं. बता दें कि भूषण दोनों गैर-सरकारी संगठनों की गवर्निंग बॉडी में रहे हैं और हाईकोर्ट के समक्ष अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका में हस्तक्षेप करने वाले सीपीआईएल का प्रतिनिधित्व करते हैं. भूषण का नाम लिए बिना अस्थाना ने कहा है कि हाल के दिनों में कुछ परोक्ष और प्रकट अज्ञात कारणों से उन्हें चलाने वाले व्यक्तियों या किसी व्यक्ति/हितग्राही के इशारे पर मेरे खिलाफ कुछ प्रतिशोध से चुनिंदा कार्रवाई शुरू कर दी है. वे कौन लोग हैं, उसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है.”

    वहीं, अस्थाना ने चार मामलों का उल्लेख किया है, जो सभी कॉमन कॉज द्वारा 2017 में सीबीआई के विशेष निदेशक के रूप में उनकी नियुक्ति और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की एसआईटी जांच की मांग को लेकर दायर किए गए हैं. उन्होंने कहा, ‘इन जनहित याचिकाओं के बाद ट्वीट या लेख या परोक्ष जनहित याचिका के जरिये उनके खिलाफ एक दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया गया.’ वहीं, अस्थाना ने भूषण द्वारा उनके बारे में अक्टूबर 2017 से जुलाई 2021 के बीच किए गए ट्वीट्स को संलग्न करते हुए कहा है, ‘निरंतर सोशल मीडिया अभियान इस आशंका की पुष्टि करता है और सही ठहराता है कि मेरी नियुक्ति को चुनौती या तो कुछ प्रतिशोध का परिणाम है जो मेरे लिए अज्ञात है या किसी अज्ञात व्यक्ति / प्रतिद्वंद्वी / हित के इशारे पर किया जा रहा है’

    बहरहाल, सदरे आलम नामक एक वकील ने जनहित याचिका दायर करके अस्थाना की नियुक्ति और सेवा विस्तार को चुनौती दी है. जबकि केंद्र सरकार ने गत गुरुवार को अस्थाना की नियुक्ति का यह कहते हुए बचाव किया है कि उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में हालिया कानून-व्यवस्था के मद्देनजर प्रभावी पुलिसिंग के लिए पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है.

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