किसान आंदोलन की रणनीति पर राकेश टिकैत बोले-कोविड प्रोटोकॉल की तरह इसको भी आदत में शुमार कर लें

BKU पदाधिकारियों से खेतीबाड़ी और आंदोलन के बीच तालमेल बनाने को लेकर चर्चा की.

BKU पदाधिकारियों से खेतीबाड़ी और आंदोलन के बीच तालमेल बनाने को लेकर चर्चा की.

Kisan Andolan: राकेश टिकैत ने भाकियू पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबे समय तक किसान आंदोलन को चलाने की तैयारी रखें. उन्होंने कहा कि जिस तरह से कोविड प्रोटोकॉल (Covid Protocol) को अपनी आदत में शुमार करने की जरूरत है, वैसे ही आंदोलन को भी अपनी आदत में शुमार कर लें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2021, 5:33 PM IST
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नई दिल्ली. तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस करने की मांग को लेकर अड़े किसान अभी आंदोलन को और लंबा चलाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) की अध्यक्षता में यूनियन के जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों की अहम मीटिंग की गई.

पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह मंडलों की मीटिंग बुलाई गई थी. कोरोना के चलते सभी को एक साथ बुलाना संभव नहीं था. अन्य मंडलों के पदाधिकारी भी आंदोलन स्थल पर आने वाले समय में पहुंचेंगे.

बैठक में टिकैत ने पदाधिकारियों से खेतीबाड़ी और आंदोलन के बीच तालमेल बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की और अपने नंबर-बारी से आंदोलन में उपस्थिति के निर्देश दिए. पदाधिकारियों ने संकल्प लिया कि तीन कानूनों की वापसी और एमएसपी पर कानून बनाए जाने तक लड़ाई जारी रखेंगे.

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राकेश टिकैत ने भाकियू पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबे समय तक किसान आंदोलन (Kisan Andolan) को चलाने की तैयारी रखें. उन्होंने कहा कि जिस तरह से कोविड प्रोटोकॉल (Covid Protocol) को अपनी आदत में शुमार करने की जरूरत है, वैसे ही आंदोलन को भी अपनी आदत में शुमार कर लें.

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन, भाकियू मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक और रमेश मलिक के अलावा छह मंडलों के अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष और तहसील व ब्लॉक पदाधिकारी मौजूद रहे.

जादौन ने बताया कि खेत में फसल कटाई का काम चल रहा है, पंचायत चुनाव भी हैं और आंदोलन भी चल रहा है. इन तीनों मामलों में तालमेल के लिए चौधरी राकेश टिकैत ने मीटिंग ली. आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली मंडलों की पदाधिकारी बैठक में मौजूद रहे.



टिकैत ने यह भी कहा कि खेत का काम भी न बिगड़ने पाए और आंदोलन भी चलता रहे. खेत का काम बिगड़ा तो देश का बड़ा नुकसान हो जाएगा. हम देश का नुकसान बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे. इसलिए बेहतर तरीके से तालमेल बनाकर आंदोलन में आने का रोटेशन बनाए रखें. जो किसान आंदोलन में रहें, पदाधिकारियों की यह भी जिम्मेदारी है कि उनके खेत पर नजर रखें ताकि कोई काम न बिगड़ पाए.

15 मई से किसान गांव-गांव निकालेंगे मिट्टी यात्रा

देश के 23 राज्यों से आई मिट्टी को किसान जिले-जिले और गांव-गांव लेकर जाएंगे. आंदोलन से जुड़े किसान गांव-जाकर आव्हान करेंगे कि एक मुठ्ठी मिट्टी लो, एक मुठ्ठी मिट्टी दो. जहां-जहां मिट्टी यात्रा जाएगी, वहां-वहां काले कृषि कानूनों के बारे में भी विस्तार से चर्चा की जाएगी. मिट्टी यात्रा के जरिए एक संदेश गांव-गांव पहुंचेगा और लोग आंदोलन से जुड़ेंगे.

15 को आसनसोल में किसान पंचायत को संबोधित करेंगे राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत एक बार फिर पश्चिम बंगाल जाएंगे. 15 अप्रैल को राकेश टिकैत पश्चिम बंगाल के आसनसोल में किसान पंचायत (Kisan Panchayat ) को संबोधित करेंगे. बता दें कि आसनसोल पश्चिम बंगाल (West Bengal) में कोलकाता के बाद सबसे बड़ा शहर है.
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