Home /News /delhi-ncr /

घरों में सिमटी रमजान की रौनक, कमरों में दुबके रहे लोग, फेसबुक और व्‍हॉट्सएप से हो रही बातें

घरों में सिमटी रमजान की रौनक, कमरों में दुबके रहे लोग, फेसबुक और व्‍हॉट्सएप से हो रही बातें

जामा मस्जिद में 4 जुलाई से सार्वजनिक तौर पर नमाज पढ़ी जा सकेगी. (File Photo.)

जामा मस्जिद में 4 जुलाई से सार्वजनिक तौर पर नमाज पढ़ी जा सकेगी. (File Photo.)

रमज़ान से पहले पुरानी दिल्ली के खारी बावली की रौनक देखने को बनती है. यहां उम्दा क्वालिटी के ड्राई फ्रूट्स से लेकर मसाले और खजूर मिल जाते हैं. लोग दूर- दूर से यहां खरीददारी करने आते हैं. लेकिन...

नई दिल्ली. सोशल मीडिया (Social Media) में वायरल हो रही एक तस्वीर ने इस साल के रमजान को अपने अंदर सहेज लिया है. सूनी पड़ी दिल्ली की जामा मस्जिद (JAMA Masjid). काफी ऊंचाई से ली गई इस तस्वीर में सब कुछ है लेकिन ज़िन्दगी नहीं. न वो परिंदे जो मस्जिद की सेहन में बेखौफ उड़ते फिरते थे. न वो दुपट्टे से ढकी औरतें जो मस्जिद की मेहराब से लग कर इबादत में डूब जाती थीं. न वह बच्चे जो खूबसूरत टोपियों के लिए लड़ते थे. और न ही वो खजूर व फकीर. सिर्फ दिखाई दे रही है एक बादशाह की बनाई हुई शानदार इमारत और आस पास हजारों मकानों की छतें. लोग नहीं रहते यहां ? या शायद कोई उजड़ा हुआ शहर है ये. यकीन नहीं होता की कभी रमज़ान (Ramadan) ऐसे भी गुजरेगी. कोरोना की बीमारी ने इस साल का रमज़ान बेमज़ा कर दिया. लोग अपने घरों में दुबके बैठे हैं. सारी बातें फेसबुक, वॉट्सएप और ट्विटर पर हो रही है. लॉकडाउन का पालन ज़्यादातर जगहों पर दिख रहा है. लोग सिर्फ ज़रूरी सामान के लिए ही घर से निकल रहे है. यानी रमज़ान वाली बात कही नजर नहीं आ रही है.

हम नजर डालते हैं उन चीज़ों पर जो इस साल के रमज़ान को पहले से अलग करता है
चांद रात और अज़ान पर पाबन्दी- इस साल चांद- रात पर कोई बहस नहीं हुई. पहले से अंदाजा था कि शनिवार से रमज़ान है तो ऐसा ही हुआ. लेकिन शुक्रवार को दिल्ली और आस- पास के मुसलमान इस बात पर बहस कर रहे थे कि अज़ान होगी या नहीं. दरअसल, गुरुवार रात से ही एक वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें दो पुलिस वाले लोगों को सरकार का आदेश सुना रहे थे कि रमज़ान में अज़ान नहीं होगी. शुक्रवार को देर से दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार का बयान आया कि ऐसी कोई बापंदी नहीं है. स्पष्टीकरण सिर्फ ट्विटर पर आया. लोग बहस करने लगे कि ये सही है या फेक न्यूज. वॉट्सएप पर रमज़ान की मुबारकबाद के साथ- साथ ऐसे सवाल घूमते नजर आए.

बाज़ार बन्द - रमज़ान से पहले पुरानी दिल्ली के खारी बावली की रौनक देखने को बनती है. यहां उम्दा क्वालिटी के ड्राई फ्रूट्स से लेकर मसाले और खजूर मिल जाते है. लोग दूर- दूर से यहां खरीददारी करने आते हैं. शुक्रवार को यहां गिनती की कुछ दुकानें खुली थी. खजूर बेचने वाला सिर्फ एक दुकानदार मिला. उसने भी अपनी दुकान नहीं खोली थी. बस खजूर की तीन पेटियां अपनी दुकान के बाहर रख दी. इक्का-दुक्का लोग ही समान खरीदने आ रहे थे. यही हाल मुस्लिम बहुल इलाकों जैसे ज़ाकिर नगर, शाहीन बाग और जमा मस्जिद का है.

शाहीन बाग में रहने वाले असद फारूकी बताते है कि पहले सारी गालियां भरी होती थी. चलने को जगह नहीं मिलती. रमज़ान के मौके में खास तरह की दुकानें खुलती थी. जैसे पकौड़ी बेचने वाले, खजूर वाले, मिस्वाक बेचने वाले वगैरा. कबाब और बिरयानी की खुशबू से तो माहौल तर रहता था. लेकिन इस बार सब कुछ बन्द पड़ा है. आम तौर पर लोग खजूर से रोज़ा खोलते हैं. लेकिन कई इलाकों में खाजूर बेचने वाले गायब हैं.

गोश्त की कमी - इफ्तार के बाद नोन वेज खानों का दौर चलता है. इसमें चिकन और मटन के बिना सब कुछ फिका. चाहे कबाब हो, बिरयानी, हलीम या कीमा समोसा. मटन की डिमांड सबसे ज़्यादा रहती है. ज़ाकिर नगर की फारेहा हसन कहती हैं कि सबसे ज़्यादा तलब तो मटन की हो रही है. चिकन तो मिल जाता है लेकिन मटन मिलना मुश्किल है.  इसके बिना रमज़ान वाली फीलिंग ही नहीं आती.

सोशल मीडिया का दौर - भीड़ जमा होने की वजह से मस्जिदों को बन्द कर दिया गया है. रमज़ान की मुबारकबाद के आलावा इबादत पर भी सोशल मीडिया में खूब बात- चीत हो रही है. चूंकि आपस में मिलना जुलना नहीं हो पा रहा, लोग आपस में सोशल मीडिया के जरिए एक दूसरे को क़ुरान की आयतें भेज रहे हैं. नमाज़ पढ़ने का तारीक बता रहे है. रमज़ान में एक ख़ास नमाज़ होती है जिसे तरावी कहते है. आम तौर पर ये नमाज़ मस्जिद में पढ़ी जाती है. ऐसा पहली बार हो रहा है कि तरावी मस्जिद में नहीं हो रही है. घरों में तरावी कैसे पढ़नी है ये बातें खूब शेयर हो रही है.

जरूरतमंदों की मदद - रमजान में खास तौर पर फित्रा और ज़कात निकाल जाता है. ये एक ऐसे रकम होती है जो हर व्यक्ति को दान के लिए निकालना पड़ता है. इससे गरीबों की मदद की जाती है.  रमज़ान में गरीबों की मदद करने का खास इंतजाम किया जाता है. करोना के मद्देनजर गरीबों की मदद के लिए खास ज़ोर दिया जा रहा है. सब से अच्छी बात ये है कि सोशल मीडिया में ये अपील की जा रही है कि लोग खाने पीने की चीजों की तस्वीर शेयर न करें. ये उन लोगों के लिए किया जा रहा है जो आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं.

इफ्तार पार्टी की उम्मीद कम - रमज़ान में लोग अलग- अलग समूह में इफ्तार पार्टी करते हैं. सियासी जमात से लेकर मुहल्ले, सोसायटी और दोस्त- रिश्तेदारों की इफ्तार पार्टी होती हैं.  लेकिन इस बार ऐसा कोई माहौल नजर नहीं आ रहा. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ इफ्तार पार्टी की उम्मीद कम ही है.

ईद पर नजर
- एक महीने के रोज़े के बाद ईद की नमाज़ पढ़ी जाती है. ये नमाज़ मस्जिद या ईदगाह में जमात के साथ पढ़ी जाती है. यानी ये नमाज़ एक ग्रुप में ही पढ़ी जाती है. अब सब की नजर इस बात पर है को क्या एक महीने में करोना का कहर ख़तम हो जाएगा. क्या ईद की नमाज़ मस्जिद में पढ़ी जाएगी. दुआ इसी बात की हो रही है.

ये भी पढ़ें- 

CM योगी बोले- औद्योगिक गतिविधियां शुरू करने के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार किया जाए

लॉकडाउन में घर पहुंचने का लगाया जुगाड़, व्यापारी बन मुंबई से पहुंचा प्रयागराज

Tags: Corona, Delhi, Jama masjid, Lockdown

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर