जानिए, प्रदूषण के लिए दिल्ली वाले खुद जिम्मेदार हैं या फिर पराली जला रहे किसान?

दिल्‍ली एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए कौन जिम्मेदार है?
दिल्‍ली एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए कौन जिम्मेदार है?

दिल्ली में जब सबसे ज्यादा प्रदूषण था तब उसमें पराली का योगदान सिर्फ 5 फीसदी था, इसलिए प्रदूषण के लिए किसानों को कोसना छोड़िए, अपनी गलतियों पर परदा मत डालिए, रोड साइड की धूल, कंस्ट्रक्शन और बड़े वाहनों पर कंट्रोल करिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 7:54 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बुधवार को इस मौसम के सर्वोच्च ऊचाई 999 पर था. हवा सबसे जहरीली थी, तब भी उसमें पराली का योगदान महज 5 फीसदी ही था. किसी किसान ने यह दावा नहीं किया है बल्कि इसकी निगरानी करने वाली पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की संस्था सफर (SAFAR- इंडिया सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च) का जारी किया गया यह आंकड़ा है. जो वैज्ञानिकों ने निकाला है. हालांकि, अपनी नाकामियां छिपाने के लिए नेता कुछ भी कह सकते हैं.

सफर के मुताबिक 10 अक्टूबर से लेकर 4 नवंबर तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में दूषित हवा के लिए जिम्मेदार कारकों में पंजाब और हरियाणा में पराली (Parali) जलाने की घटनाओं का अलग-अलग दिनों में 2 से लेकर 40 प्रतिशत तक योगदान रहा है. इस दौरान सिर्फ तीन दिन ऐसे थे जब प्रदूषण में पराली की भूमिका 23 फीसदी से अधिक रही है. पर्यावरणविदों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण के लिए किसानों को कोसना छोड़िए, अपनी गलतियों को सुधारिए तभी लोग साफ हवा में सांस ले पाएंगे.

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दिल्ली के प्रदूषण में पराली का योगदान (रिपोर्ट-SAFAR)




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दरअसल, नेता ऐसी प्रजाति है कि वो आसानी से अपनी गलतियों पर परदा भी डाल देती है और उसका ठीकरा दूसरों पर भी फोड़ देती है. प्रदूषण के मामले में कुछ ऐसा ही हो रहा है. जबकि आईआईटी तक की स्टडी में यह साफ हो गया है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण (Air pollution in Delhi) बढ़ाने का खलनायक रोड साइड की धूल, कंस्ट्रक्शन और बड़े वाहन हैं.



किसानों पर एफआईआर, दूसरों पर सरकारी मेहरबानी

दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के प्रदूषण के लिए पराली (Stubble Burning) तो यूं ही बदनाम हो चुकी है. इसे लेकर कई साल से किसान सवालों के घेरे में हैं. कुछ लोग उन पर देश की राजधानी की हवा को जहरीला करने का आरोप लगाते रहे हैं. इसलिए पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर (FIR) हो रही है. राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य बिनोद आनंद ने सवाल उठाया है कि प्रदूषण में जब पराली का योगदान महज 2 से 40 फीसदी के बीच ही है तो सिर्फ किसानों (Farmers) पर ही एफआईआर क्यों की जा रही है. कंस्ट्रक्शन (निर्माण कार्य) जैसे जो इसके दूसरे बड़े कारक हैं उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर क्यों नहीं? बड़े वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

किसान नेता आनंद कहते हैं कि सरकारी एजेंसियां खुद बता रही हैं कि दिल्ली के प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली जिम्मेदार नहीं है. इसमें रोड साइड की धूल, कंस्ट्रक्शन और वाहन बड़े कारक हैं. सबसे ज्यादा एफआईआर तो दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के उन नगर निगमों और डेवलपमेंट प्राधिकरणों के अधिकारियों पर होने चाहिए जिनकी कामचोरी से सड़कों पर धूल जमा है. लेकिन सरकार के लिए सॉफ्ट टारगेट सिर्फ किसान हैं इसलिए उन्हें परेशान किया जा रहा है. किसानों पर एफआईआर बंद हो.

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दिल्ली के प्रदूषण पर आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट


किसका कितना योगदान

दिल्ली के प्रदूषण पर वर्ष 2016 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी (IIT), कानपुर ने एक स्टडी की थी. इसकी रिपोर्ट दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी को सबमिट (सौंपी) की गई थी. यह रिर्पोट सार्वजनिक है. इसमें बताया गया है कि यहां प्रदूषण के लिए कौन कितना जिम्मेदार है. इस रिपोर्ट के बाद भी नेता लोग सिर्फ पराली और किसानों पर निशाना साध रहे हैं.

>>पीएम10 (पीएम यानी पर्टिकुलेट मैटर, ये हवा में वो पार्टिकल होते हैं जिस वजह से प्रदूषण फैलता है) में सबसे ज्यादा 56 फीसदी योगदान सड़क की धूल का है.

>>पीएम 2.5 (पीएम 2.5 का अर्थ है हवा में तैरते वह सूक्ष्म कण जिनका व्यास 2.5 माइक्रोन से कम होता है) में इसका हिस्सा 38 फीसदी है.

ऑटोमेटिक मशीनों धूल उठाने की जरूरत 

पर्यावरणविद् एन. शिवकुमार कहते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए सिर्फ हरियाणा, पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है. इसके लिए खुद दिल्ली के लोग सबसे बड़ी वजह हैं. यहां हमेशा नियमों को ताक पर रखकर सरकारी और निजी दोनों कंस्ट्रक्शन चलता रहता है. हम रोड साइड धूल कभी नहीं उठाते.

शिवकुमार सवाल करते हैं कि नगर निगम द्ववारा क्यों नहीं विदेशों की तर्ज पर ऑटोमेटिक मशीनें मंगाकर धूल साफ करवाई जाती? अब भी दिल्ली-एनसीआर में कंस्ट्रक्शन जारी है. रोड उखड़े हुए हैं. उनमें से धूल उड़ रही है. उद्योगों में कोयला और पेटकोक इस्तेमाल हो रहा है. वो अपने उद्योग सीएनजी से चलाने के लिए तैयार नहीं हैं. अगर किसानों पर एफआईआर हो रही है तो प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार अन्य लोगों पर भी होनी चाहिए. प्रदूषण फैलाने में एसयूवी (SUV) कारों का बड़ा योगदान है.

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दिल्ली-एनसीआर की तमाम सड़कों पर धूल जमा होना आम बात है


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अक्टूबर से दिसंबर तक क्यों इतना बढ़ जाता है प्रदूषण?

पर्यावरणविद एन. शिवकुमार बताते हैं कि इन दिनों हवा कम चलती है. उसमें स्पीड नहीं होती. ऊपर से शीतलहर शुरू हो जाती है. इसकी नमी डस्ट को पकड़कर नीचे लाती है. वो उसे ऊपर नहीं उठने देती. इसलिए प्रदूषण बढ़ जाता है. केंद्र सरकार नगर निगमों से रोजाना डस्ट कलेक्शन रिपोर्ट लेना शुरू कर दे तो प्रदूषण कुछ कम हो सकता है.
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