OPINION: हरियाणा और महाराष्ट्र में जीत के लिए BJP आश्वस्त, क्या है इसकी वजह?

मध्य प्रदेश में बीजेपी संगठन चुनाव में 75+ फॉर्मूले पर अमल
मध्य प्रदेश में बीजेपी संगठन चुनाव में 75+ फॉर्मूले पर अमल

विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के ऐलान के बाद बीजेपी (BJP) ने सत्ता में वापसी की रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. उच्च सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी (PM Modi) की अमेरिका (America) से वापसी के फौरन बाद केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक कर उम्मीदवारों (Candidates) की सूची जारी कर दी जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 25, 2019, 12:10 PM IST
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नई दिल्‍ली. लोकसभा चुनाव 2019 (Loksabha Election 2019) के बाद मोदी सरकार (modi Government) और उसके कामकाज की पहली परीक्षा हरियाणा (Haryana) और महाराष्ट्र (Maharashtra) में है. इन दोनों राज्यों में अगले महीने विधानसभा चुनाव कराने का ऐलान हो चुका है. अनुच्छेद-370 (Article-370) का हटना, पीएम मोदी की छवि और सरकार के कामकाज में कोई कोताही न बरतने की मुहिम रंग ला रही है. इन सबसे ऊपर एक बिखरा विपक्ष बीजेपी (BJP) की राह और भी आसान कर रहा है. आलम ये है कि विपक्षी दलों के आला नेताओं में बीजेपी में शामिल होने की होड़ मची है. कई शामिल हो चुके हैं और कइयों का नंबर अब तक नहीं आया है. इसलिए बीजेपी आलाकमान को भरोसा है कि हरियाणा में मिशन 75 और महाराष्ट्र में सरकार बनाने का उनका मिशन पूरा होने में ज्यादा मुश्किलें नहीं हैं.

हरियाणा की सत्ता में लौटने के लिए रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू किया
बात शुरू करते हैं हरियाणा से. चुनाव के ऐलान के बाद बीजेपी ने सत्ता में वापसी की रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी की अमेरिका से वापसी के फौरन बाद केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक कर उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी. बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने राज्य के सभी जिलों में नेताओं और कार्यकर्ताओं से अलग-अलग बैठकें की हैं. संदेश यही दिया गया है कि जीत को लेकर वो अति आत्मविश्वास का शिकार न हों क्योंकि जीत तभी होगी जब जनता का विश्वास जीता जाएगा और इसके लिए कार्यकर्ता खूब मेहनत करें. कार्यकर्ताओं को मोदी सरकार की योजनाओं और खट्टर सरकार (khattar Governement) के प्रदर्शन के आधार पर वोट मांगने को कहा गया है.

हरियाणा और महाराष्‍ट्र में अगले महीने चुनाव होने हैं. ब
हरियाणा और महाराष्‍ट्र में अगले महीने चुनाव होने हैं.

आलाकमान ने पहले ही साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा और सेटिंग-गेटिंग यानी मौजूदा विधायक अपना टिकट पक्का मान कर न चलें तो ही बेहतर होगा. चुनौती ये भी है कि सरकार का समर्थन कर रहे कई निर्दलियों को टिकट देना भी आसान नहीं होगा. इसलिए संकेत है कि कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं. अंतिम फैसला केंद्रीय चुनाव समिति को लेना है. चुनाव प्रचार पीएम मोदी और मुख्यमंत्री खट्टर को आगे रखकर लड़ा जाएगा. सूत्र बताते हैं कि 8 अक्टूबर के बाद पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah), रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh), कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा समेत तमाम आला नेता युद्ध स्तर पर चुनाव प्रचार करेंगे.



महाराष्ट्र में भी बीजेपी ने चुनावी होमवर्क पूरा किया
महाराष्ट्र चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने अपना होमवर्क पूरा कर लिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की राज्य भर की यात्रा पूरी हो चुकी है. संगठन में बूथ स्तर तक लगातार बैठक कर किले को दुरुस्त कर लिया गया है. बीते पांच साल में जो भी विरोध हुए उन पर काबू पाने में फडणवीस सरकार ने देरी नहीं लगाई. मराठा आरक्षण का ऐलान कर सरकार ने शरद पवार का मराठा वोटबैंक पर एकछत्र राज तोड़ने की मुहिम भी शुरू कर दी है. एनसीपी के कई दिग्गज या तो बीजेपी में शामिल हो चुके हैं या फिर शामिल होने की कोशिश में लगे हैं. महाराष्ट्र में कांग्रेस का घर बिखरा हुआ है, जितने नेता उतनी जुबान सुनने को मिल रही हैं. लेकिन कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन हो चुका है इसलिए चुनाव में लड़ाई की उम्मीद विपक्ष करने लगा है.

सूत्रों की मानें तो शिवसेना 126 सीटें और उपमुख्यमंत्री पद से ज्यादा देने को तैयार नहीं है. जबकि आदित्य ठाकरे खुद सीएम पद लेने के संकेत दे रहे हैं.
सूत्रों की मानें तो शिवसेना 126 सीटें और उपमुख्यमंत्री पद से ज्यादा देने को तैयार नहीं है. जबकि आदित्य ठाकरे खुद सीएम पद लेने के संकेत दे रहे हैं


BJP-शिवसेना में सीट शेयरिंग को लेकर तकरार जारी
उधर बीजेपी-शिवसेना में सीटों के तालमेल (सीट शेयरिंग) को लेकर तकरार जारी है. शिवसेना का आधी-आधी सीटों पर लड़ने का दावा बीजेपी को भा नहीं रहा है. सूत्रों की मानें तो बीजेपी शिवसेना को 126 सीटें और उपमुख्यमंत्री पद से ज्यादा देने को तैयार नहीं है. जबकि आदित्य ठाकरे खुद सीएम पद लेने के लगातार संकेत दे रहे हैं. 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले दम पर बहुमत पाया था और लोकसभा चुनावों में भी मोदी के नाम पर पार्टी तमाम सीटें बटोर ले गई थी, उसे शिवसेना की ये मांग जरूरत से ज्यादा लग रही है. हालांकि बीजेपी फिलहाल शिवसेना के साथ वाक युद्ध में पड़ने से बच रही है. बीजेपी के उच्च सूत्रों की मानें तो गठबंधन बना रहेगा लेकिन पहले की तरह बीजेपी अब छोटे भाई की भूमिका में नजर नहीं आने वाली.

कुल मिलाकर एक बात घूम फिर कर सामने आ रही है. पीएम मोदी के नाम और काम में दम खम बरकरार है. अनुच्छेद 370 और 35 ए के हटने का जनमानस पर जो असर हुआ है उसका असर इन विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा. साथ ही इन दोनों राज्यों (महाराष्ट्र और हरियाणा) में जातीय समीकरण को अपने पक्ष में करने में मिली सफलता के कारण भी बीजेपी को जीत का भरोसा है. और ये भरोसा भी क्यों न हो आखिर जब बीजेपी झंडा लेकर आगे बढ़ चली है तब विपक्ष अपना घर ही समेटने में लगा है.

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