कोरोना के चलते पंजाब सरकार सख्‍त, जलाई पराली तो किसानों की जमीन पर होगी ये कार्रवाई

खेतों में पराली जलाने के कारण को दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारणों में से एक माना गया. (फाइल फोटो)

पंजाब (Punjab) में इस बार 27 लाख हैक्‍टेयर जमीन पर धान की खेती (Paddy Crop) हुई है. जिसमें से सात लाख हैक्‍टेयर जमीन पर बासमती उगाया गया है. इसी वजह से करीब 16.50 मिलियन टन पराली इस बार होने की संभावना जताई जा रही है.

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    चंडीगढ़. कोरोना महामारी को देखते हुए पंजाब सरकार (Punjab Government) ने पराली जलाने पर पूरी तरह रोक लगाई हुई है. आज फिर से मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने कोरोना महामारी (Covid pandemic) को देखते हुए किसानों से पराली (paddy straw) न जलाने की अपील की है जिसमें कहा गया है कि महामारी के दौर में पराली से उठने वाले धुएं से फेंफड़े संबंधी बीमारियों को झेल रहे लोगों को ज्‍यादा दिक्‍कतों का सामना करना पड़ सकता है.

    पंजाब के किसानों (Punjab Farmers) को कोरोना के खतरे से आगाह करने के साथ ही सरकार की ओर से चावल उगाने वाले गांवों में आठ हजार नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं. साथ ही पराली प्रबंधन के लिए 23500 मशीनें भी किसानों को मुहैया कराई गई हैं. इसके साथ ही मुख्‍यमंत्री की ओर से कहा गया है कि वे लगातार प्रधानमंत्री से पराली प्रबंधन (paddy straw management) करने वाले किसानों को इसमें लगने वाली लागत की क्षतिपूर्ति दिए जाने की मांग भी कर रहे हैं.

    जानकारी के मुताबिक ये नोडल अधिकारी 15 नवंबर तक गांवों में विभिन्‍न विभागों के साथ मिलकर किसानों को जागरुक करेंगे. इसके साथ ही उन किसानों की सूची भी तैयार करेंगे जिन्‍होंने अपनी जमीन ठेके पर दी हुई है. बताया जा रहा है कि ये अधिकारी सुपर एसएमएस सिस्‍टम के द्वारा ऐसे हर एक किसान को फोन करके चेतावनी देंगे. इसके बावजूद अगर किसी खेत में पराली जलाने की जानकारी मिलती है तो भूमि रिकॉर्ड में उस जमीन पर लाल निशान लगा दिया जाएगा.

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