West Bengal Assembly Elections : छोटी जीत के चक्कर में बीजेपी गंवा बैठी बड़ा किला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी अपने दावों के मुकाबले पस्त दिखी.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी अपने दावों के मुकाबले पस्त दिखी.

तृणमूल कांग्रेस का आरोप था कि चुनाव शेड्यूल बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिहाज से बनाया गया है. लेकिन नतीजे बताते हैं कि यह बीजेपी के बिल्कुल खिलाफ रहा और यहां तृणमूल कांग्रेस को लाभ मिला.

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नई दिल्ली. बीजेपी की महत्वाकांक्षा थी कि वह इन चुनावों में पश्चिम बंगाल के नए क्षेत्रों में खुद का विस्तार करे और 2019 की लोकसभा में मिली सफलता को बढ़ाते हुए 121 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी बढ़त बनाकर 147 सीटों के जादुई आंकड़े तक पहुंचे. लेकिन बीजेपी जंगलमहल, हुगली और जलपाईगुड़ी जैसे अपने मजबूत क्षेत्रों को महज 75 सीटों के लिए तृणमूल कांग्रेस के सामने खो बैठी.

बीजेपी ने मिदनापुर और दक्षिण 24 परगना जिलों में विस्तार की कोशिश करते हुए आक्रामकता दिखाई. उसने इसके लिए शुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम में ममता बनर्जी के खिलाफ खड़ा किया और दक्षिण 24 परगना जिले में डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला करते रहे. लेकिन इस क्रम में बीजेपी ने जंगलमहल एरिया की कई सीटें गवां दी, जहां पहले और दूसरे चरणों में मतदान हुए और इस आदिवासी क्षेत्र पर ममता बनर्जी ने शानदार कमबैक किया. तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि चुनाव शेड्यूल ऐसे बनाया गया है कि बीजेपी को उन इलाकों में फायदा मिले जहां चुनाव के शुरुआती फेज में वह मजबूत रही है. लेकिन नतीजे बताते हैं कि यह बीजेपी के बिल्कुल खिलाफ रहा और यहां तृणमूल कांग्रेस को लाभ मिला. वास्तव में, नतीजे यह दिखाते हैं कि लंबे चुनाव में बीजेपी को कभी लाभ नहीं मिला और तृणमूल चौथे चरण और सितलकुची हादसे के बाद लगातार मजबूत होती गई.

अधिकारी नंदीग्राम में ममता को बहुत नजदीकी अंतर से हरा सकते थे और मिदनापुर में बीजेपी ने जो 5 सीटें जीती थीं वे जंगलमहल में हुए नुकसान को पाट नहीं पाईं. जगलमल ऐसा इलाका था जहां बीजेपी 2019 में आसानी से जीत गई थी. दक्षिण 24 परगना में तृणमूल ने 31 सीटों में से 30 पर क्लीन स्वीप किया है, एक सीट आईएसएफ सुप्रीमो अब्बास सिद्दीकी का भाई जीत गया और बीजेपी का खाता भी नहीं खुला. बीजेपी उन सीटों को भी हार गई जहां उसे 2019 में जीत मिली थी, जैसे हुगली में एमपी लॉकेट चटर्जी अपनी सीट हार गई. पूर्व राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता को बीजेपी ने हुगली से उतारा था, लेकिन बहुत नजदीकी अंतर से दासगुप्ता भी चुनाव हार गए. भाजपा ने टीएमसी के जिस पूर्व मंत्री राजीब बनर्जी पर दांव खेला था वह भी हावड़ा जिले के डोमजुर से अपनी सीट गवां बैठे.

बीजेपी का मजबूत किला रहा है बनगांव का मतुआ बेल्ट, इसे बीजेपी ने बरकरार रखा है. लेकिन यह बहुत महत्व की बाद नहीं है. क्योंकि मालदा और मुर्शिदाबाद की कहानी ज्यादा खास है जहां टीएमसी ने काफी सीटें बटोरीं, इतनी ज्यादा कि अगर कहीं दूसरी जगह कोई नुकसान हुआ तो उसकी भरपाई यहां से हो जाएगी. इन दो जिलों की 34 सीटें कांग्रेस और लेफ्ट की थीं, मगर अब इनपर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है और यहां लेफ्ट व कांग्रेस को इस बार कोई सीट नहीं मिली. बीजेपी क उम्मीद थी कि इन सीटों पर तृणमूल को तीसरा मोर्चा नुकसान पहुंचाएगा और इससे बीजेपी को इस मुसलिम बहुल क्षेत्र की कुछ सीटें मिल जाएंगी. लेकिन तीसरा मोर्चा सितलकुची हादसे के बाद चुनाव से भाग खड़ा हुआ, जिससे तृणमूल को अचानक एक बड़ा अवसर मिल गया.
बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में नॉर्थ बंगाल के जलपाईगुड़ी रीजन पर जीत दर्ज की थी, लेकिन इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस कमबैक कर गई. उसने जलपाईगुड़ी और उत्तरी व दक्षिण दिनाजपुर की सीटें जीत लीं. नॉर्थ 24 परगना और कोलकाता के शहरी क्षेत्रों में भी बीजेपी कोई जगह नहीं बना पाई जबकि यहां लेफ्टिनेंट जेनरल सुब्रतो साहा, अभिनेत्री पायल सरकार और बाबुल सुप्रियो जैसे उनके दिग्गज मौजूद थे.
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