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Exclusive: भरी अदालत में जितेंद्र गोगी पर गोलियों की बौछार, पढ़ें रोहिणी कोर्ट शूटआउट की कहानी, FIR की जुबानी

रोहणी कोर्ट शूटआउट में गोगी गैंग के जितेंद्र मान उर्फ गोगी की मौत हुई है.

रोहणी कोर्ट शूटआउट में गोगी गैंग के जितेंद्र मान उर्फ गोगी की मौत हुई है.

Rohini Court Shootout: दिल्‍ली के रोहिणी कोर्ट में हुए शूटआउट को लेकर गोगी गैंग के सरगना जितेंद्र गोगी (Jitendra Gogi) की सुरक्षा में लगे एसआई वीर सिंह ने प्रशांत विहार थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. इस एफआईआर में उन्‍होंने सिलसिलेवार सबकुछ बताया है, जोकि काफी खौफनाक है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्‍ली. देश की राजधानी दिल्‍ली के रोहिणी कोर्ट में शुक्रवार को हुए शूटआउट (Rohini Court Shootout) को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. इसी बीच न्‍यूज़ 18 को इस मामले में एफआईआर (FIR) की कॉपी हाथ लगी है. इस शूटआउट के के मामले में दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) के एसआई वीर सिंह 3 बटालियन ने बताया है कि मेरा काम अलग-अलग जेलों से अंडर ट्रायल कैदियों को अलग-अलग कोर्ट में पेश करना है. जबकि शु्क्रवार यानी 24 सितंबर को मेरी ड्यूटी इंस्पेक्टर इंद्रलाल के साथ मुलजिम हाई रिस्क यूटीपी जितेंद्र मान उर्फ गोगी को तिहाड़ जेल से रोहिणी कोर्ट में पेश करने की लगी थी, इस दौरान मेरे साथ एसआई राजेन्द्र, एसआई सुनील के अलावा कांस्टेबल जगदीश, कांस्टेबल कमांडो अमित और विवान थे. करीब सुबह 10 बजे गोगी के अलावा एक और मुलजिम को तिहाड़ जेल से सरकारी गाड़ियों में 3 बटालियन गार्ड की कस्टडी में लेकर रोहिणी कोर्ट परिसर खारजा में बंद किया था.

    एसआई वीर सिंह के मुताबिक, मुलजिम अशरफ को कोर्ट नंबर 304 में पेश करने के बाद वापस खारजा में बन्द कर दिया था. इस बीच दोपहर करीब 1 बजकर 10 मिनट पर जितेंद्र उर्फ गोगी को कोर्ट नंबर 207 में पेशी के लिए ले जाना था. गोगी को लेकर एसआई सुनील और कस्टडी इंस्पेक्टर इंदलाल, एसआई राजेन्द्र, कांस्टेबल जगदीश, कांस्टेबल शक्ति, कमांडो कांस्टेबल चिराग, कमांडो कांस्टेबल अमित DD नंबर 22सी से उसे लेकर रोहिणी कोर्ट नंबर 207 के लिए रवाना हुए थे. जबकि मुलजिम गोगी बहुत हाई रिस्क कैटेगरी का था, इसलिए उसकी सुरक्षा चौक चौबंद थी. गोगी को एएसजे गगन दीप सिंह के कोर्ट में पेश करना था.

    एक रात पहले दी गई थी सूचना
    एफआईआर (FIR नंबर 583/2021) के मुताबिक, गोगी हाई रिस्क कैटेगरी का मुल्जिम था, इसलिए डीसीपी 3 बटालियन ने एक रात पहले ही दिल्ली पुलिस की सभी इकाईयों (जिला पुलिस स्पेशल सेल आदि) को गोगी के पेश होने की सूचना दी गई थी, ताकि उसे उचित सुरक्षा में पेश किया जा सके. यही नहीं, गोगी के पेशी के समय कोर्ट के आसपास भी यूनिट के अधिकारी मौजूद थे.

    कोर्ट रूम में जज और स्‍टाफ समेत बैठे थे 5-6 वकील
    एफआईआर के मुताबिक, जितेंद्र मान उर्फ गोगी को एसआई सुनील और एएसआई राजेन्द्र ने कोर्ट नंबर 207 में पेश किया था. इस दौरान अन्य स्टाफ को कोर्ट रूम के आसपास तैनात किया गया था. उस वक्‍त एएसजे गगन दीप सिंह कोर्ट सुनवाई में मशगूल थे, तो कोर्ट रूम में नायाब कोर्ट और कोर्ट स्टाफ के अलावा पांच से 6 वकील भी थे.

    फिर ऐसे हुआ हमला…
    इसके बाद अचानक से कुर्सियां से दो व्यक्ति वकील की ड्रेस में उठे और दोनों अपने हथियार निकाल कर जितेंद्र मान उर्फ गोगी को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगे. एसआई वीर सिंह ने बताया कि जब तक हम रिएक्ट कर पाते तब तक गोगी को कई गोलियां लग चुकी थीं. जबकि अंधाधुंध गोलियां चला रहे बदमाशों को फिजीकली पकड़ना सभवः नहीं था, खासकर उस वक्‍त जब जज और अन्य कोर्ट स्टाफ व वकील मौजूद भी थे. इस दौरान किसी की भी जान जा सकती थी, इसलिए सभी की सुरक्षा और जानमाल की हिफाजत के लिए फौरन मैंने और मेरे कमांडों कांस्टेबल शक्ति और कांस्टेबल चिराग ने कार्यवाही की, जिसमें दोनों बदमाश ढेर हो गये. जबकि उसी दौरान वहां पर जो स्पेशल सेल का स्टाफ और रोहिणी जिला के स्‍टाफ हेड कांस्टेबल संदीप, हेड कांस्टेबल कुलदीप, स्पेशल सेल कांस्टेबल रोहित और स्‍पेशल सेल एएसआई नरेन्द्र ने बदमाशों को आगे कोई और नुकसान करने से रोक लिया.
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    अगर बदमाशों को नहीं किया जाता काबू, तो..
    एसआई वीर सिंह ने बताया कि इंस्पेक्टर इंदलाल भी तुरन्त अंदर आए हालत को काबू किया. अगर वकील की ड्रेस में आए बदमाशों के खिलाफ फौरी कार्यवाही न की जाती तो कई निर्दोष लोगों की जान जा सकती थी. इसके बाद मैंने इंस्पेक्टर इंदलाल साहब के कहने पर तत्‍काल पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी. वहीं, जितेंद्र उर्फ गोगी को घायल अवस्था में लेकर मैंने अपने अन्य स्टाफ के साथ बीएसए अस्पताल में एंबुलेंस से शिफ्ट किया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. वहीं, एफआईआर में उचित कानूनी कार्यवाही करने की सिफारिश की गयी है.

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