किसान आंदोलन की धार को कम करेगा संघ का जैविक खेती अभियान

13 अप्रैल से जैविक खेती अभियान चलाएगा अक्षय कृषि परिवार. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

13 अप्रैल से जैविक खेती अभियान चलाएगा अक्षय कृषि परिवार. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ कई महीनों से आंदोलन कर रहे देशभर के किसानों के अभियान को हाशिये पर डालने की कवायद. 13 अप्रैल से 14 जुलाई तक चलेगा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जैविक खेती अभियान.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 12, 2021, 10:49 AM IST
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नई दिल्ली. चैत्र प्रतिप्रदा 13 अप्रैल यानि भारतीय नव वर्ष के शुभारंभ के साथ ही संघ दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को धीरे-धीरे हाशिये पर डालने की रणनीति पर काम करेगा. इसके लिये संघ के “अक्षय कृषि परिवार” ने जैविक खेती करवाने की रणनीति बनाई है. इस रणनीति के तहत अक्षय कृषि परिवार 13 अप्रैल से 24 जुलाई तक एक वृहद अभियान खड़ा करेगा.

इस अभियान के तहत देश भर के किसानों से संवाद कायम करके उनके खेतों की मिट्टी के पोषण के बारे में जानकारी दी जायेगी. जिससे सीधे तौर पर उनकी आय पर तो प्रभाव पड़ेगा ही, साथ में स्वास्थ्यवर्धक फल, सब्ज़ियों का उत्पादन भी किया जा सकेगा. इस अभियान को भूमि सुपोषण एवं संरक्षण राष्ट्रीय जन अभियान के नाम से शुरू किया जायेगा. और संघ की कोशिश यही रहेगी कि इस अभियान के माध्यम से देश भर के किसानों से गांव गांव में जाकर सीधा संवाद क़ायम किया जा सके.

मिट्टी पूजन के साथ शुरू होगा अभियान

नवरात्र के पहले दिन ही पूरे देश के लगभग सभी ज़िलों के गांव में किसानों के खेत की मिट्टी का पूजन करके इस अभियान का श्रीगणेश किया जायेगा. इस अभियान के लिये क़रीब 30 से 40 संगठनों से क़रीब 4 साल तक मंथन किया गया है. इस अभियान के राष्ट्रीय संयोजक जयराम सिंह पाटीदार ने बताया कि आज किसान की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. अपनी उपज बढ़ाने के लिये मिट्टी में कई तरह के केमिकल प्रयोग करता है जिसके कारण उपज तो बढ़ती है लेकिन केमिकल युक्त होने के कारण उसका असर उस खेत की मिट्टी के साथ साथ समाज के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है.
केमिकल युक्त होने के कारण बाज़ार में जो क़ीमत मिलनी चाहिये वो किसान को मिलती नहीं है और धीरे धीरे खेत की मिट्टी भी बेकार होती चली जाती है. इसलिये किसान की फसल अच्छी हो और साथ में उनके खेत की मिट्टी भी अच्छी बनी रहे, लंबे समय तक अच्छी उपज दे, इसके लिये देश भर के किसानों को अलग अलग माध्यमों से जागरूक किया जायेगा. वो अपने खेतों में केमिकल का प्रयोग ना करें. मिट्टी के पोषण की सही जानकारी दी जायेगी.

देशभर में चलेगा जनजागरण अभियान

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ भगवती प्रकाश ने बताया कि किसानों में ये भ्रम फैला दिया गया है कि जैविक खेती करने से उनके खेतों में अच्छी फसल नहीं होगी. फसल का उत्पादन भी कम होगा इसलिये इन भ्रम को दूर करने का निर्णय किया गया है. रसायन युक्त विषैली कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से लगातार कैंसर जैसी असाध्य बीमारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. ज़मीन की उर्वरा क्षमता लगातार कम होती जा रही है, इसलिये देश भर में जन जागरण अभियान कई चरणों में चलाया जायेगा और किसानों को समझा कर उनको जैविक खेती के फ़ायदे बताये जायेंगे. जैविक खेती के दौरान प्रयोग में लाये जाने वाले परंपरागत साधनों का महत्व बताया जायेगा. वर्कशॉप, सेमिनार और प्रैक्टिकल के द्वारा बताया जायेगा कि केमिकल की बजाय जैविक खेती से ज़्यादा अच्छी उपज होती है और वो भूमि भी लंबे समय किसान की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.



संघ का मानना है कि जब किसानों की बड़ी समस्या है कमरतोड़ मेहनत के बाबजूद भी उनको सही मूल्य ना मिलना और ऊपर से भूमि की उत्पादन क्षमता भी धीरे धीरे कम होना. इन सभी परेशानियों को देखते हुए संघ ने लंबा रोडमैप किसानों के लिये और उनकी भूमि के लिये बनाया है. जिससे किसान रोड पर अपनी ज़मीन ना तलाशें बल्कि अपनी खुद की ज़मीन से ही अपने नौनिहालों के भविष्य का रोडमैप तैयार करें.
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