JNU में क्यों मचा है बवाल? जानिए कितनी है देश के अन्य विश्वविद्यालयों की फीस
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JNU में क्यों मचा है बवाल? जानिए कितनी है देश के अन्य विश्वविद्यालयों की फीस
देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में पिछले कुछ दिनों से यह आंदोलन चर्चा का विषय बना हुआ है

अगर देश के अन्य विश्वविद्यालयों (Universities) की बात करें तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय (University of Allahabad), दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) सहित कई अन्य विश्वविद्यालयों की हॉस्टल फीस (Hostel Fees) जेएनयू (JNU) की तुलना में कम है.

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  • Last Updated: November 19, 2019, 9:51 PM IST
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नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ( (Jawaharlal Nehru University) के छात्र (Students) हॉस्टल फीस (Hostel Charges) में बढ़ोतरी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में पिछले कुछ दिनों से यह आंदोलन चर्चा का विषय बना हुआ है. आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि वीसी (VC) के नए आदेश के बाद जेएनयू (JNU) देश का सबसे महंगा विश्वविद्यालय बन जाएगा. हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक वीसी अपने आदेश को वापस नहीं ले लेते. हालांकि छात्रों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए जेएनयू प्रशासन ने बढ़ी हुई फीस में कुछ कटौती भी कर दी है. इसके बावजूद छात्रों का कहना है कि जेएनयू का बढ़ा हुआ फी स्ट्रक्चर देश के दूसरे प्रमुख विश्वविद्यालयों की तुलना में ज्यादा है.

जेएनयू में फीस बढ़ोतरी को लेकर मचा है बवाल
जेएनयू प्रशासन द्वारा फीस में कटौती करने के बाद भी जेएनयू देश का ऐसा पहला विश्वविद्यालय बन जाएगा, जहां पर हॉस्टल फीस देश के दूसरे विश्वविद्यालयों की तुलना में ज्यादा वसूली जाएगी. मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात निकल कर सामने आ रही है कि जेएनयू के छात्र अब सबसे ज्यादा फीस का भुगतान करेंगे. बता दें कि देश की पांच चुनिंदा यूनिवर्सिटी से जेएनयू की तुलना की जाए तो फीस में काफी बढ़ोतरी कर दी गई है.

जेएनयू का फी स्ट्रक्चर देश के दूसरे प्रमुख विश्वविद्यालयों की तुलना में ज्यादा है.
जेएनयू का फी स्ट्रक्चर देश के दूसरे प्रमुख विश्वविद्यालयों की तुलना में ज्यादा है.




अगर बात करें देश की अन्य विश्वविद्यालयों की तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया सहित देश के कई अन्य विश्वविद्यालयों की हॉस्टल फीस बहुत सस्ती है.



संशोधित शुल्क जेएनयू को महंगा बना देगा
जेएनयू का पुराना शुल्क बेशक देश के दूसरे विश्वविद्यालयों की तुलना में सस्ता था, लेकिन संशोधित शुल्क जेएनयू को दिल्ली में स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय और इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से भी महंगा बना देगा. अगर बढ़ी हुई फीस को जोड़ लें तो वर्तमान में भोजन और आवास सहित वार्षिक शुल्क तकरीबन 41,000 से 61,000 रुपये तक जा सकता है. जेएनयू में हॉस्टल चार्जेज में बढ़ोतरी को सेवा शुल्क में बढ़ोतरी का कारण बताया जा रहा है. हालांकि जिस सेवा शुल्क को जेएनयू में लागू करने की बात की जा रही है वह देश के कई विश्वविद्यालयों में लागू नहीं है.

संशोधित शुल्क जेएनयू को दिल्ली में स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय और इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से भी महंगा बना देगा.
संशोधित शुल्क जेएनयू को दिल्ली में स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय और इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से भी महंगा बना देगा.


बता दें कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रों को भोजन और आवास दोनों के लिए सालाना औसतन 28,500 रुपये का भुगतान करना पड़ता है. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भी सस्ता है, जिसमें छात्रों को सालाना औसतन 27,400 रुपये का ही भुगतान करना पड़ता है. वहीं उत्तर प्रदेश का अन्य प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालय अलीगढ़ यूनिवर्सिटी जो दिल्ली से करीब है वहां पर तो महज 14,400 रुपये में ही काम चल जाता है. दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में वार्षिक शुल्क फिलहाल 35,000 रुपये लिया जाता है.

अगर बात देश के दूसरे विश्वविद्यालयों की करें तो वहां पर भी थोड़ा-बहुत ही अंतर है. पश्चिम बंगाल में विश्व भारती विश्वविद्यालय में 21,600 रुपये से लेकर 30,400 रुपये के बीच शुल्क लिया जाता है. देश में उत्तर, पूर्वी और पश्चिम की तुलना में दक्षिण के विश्वविद्यालय बहुत सस्ते हैं. हैदराबाद विश्वविद्यालय का तो हॉस्टल शुल्क महज 1,000 रुपये ही है. प्रति सेमेस्टर के आधार पर 500 रुपये और मेस के लिए लगभग 13,000 रुपये लिया जाता है. पुडुचेरी विश्वविद्यालय में 12,000 रुपये से 15,200 रुपये के बीच शुल्क लिया जाता है.

अगर बात देश के दूसरे विश्वविद्यालयों की करें तो वहां पर भी थोड़ा-बहुत ही अंतर है.
अगर बात देश के दूसरे विश्वविद्यालयों की करें तो वहां पर भी थोड़ा-बहुत ही अंतर है.


बता दें कि भारत में 41 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से जेएनयू की बढ़ी हुई फीस को छोड़ दें तो बाकी विश्वविद्यालयों में महज 15,000 रुपये से लेकर 35,000 रुपये के बीच ही शुल्क लिए जाते हैं. जेएनयू के छात्रों का तर्क यह है कि क्योंकि जेएनयू में लगभग 40 प्रतिशत छात्र वंचित श्रेणी से आते हैं इसलिए ये बढ़ोतरी ठीक नहीं है. वहीं दूसरी तरफ जेएनयू प्रशासन ने फीस बढ़ोतरी को सही ठहराया है. प्रशासन का तर्क यह है कि पिछले 19 वर्षों में फीस में कोई संशोधन नहीं हुआ है.

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