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फैसला- बिजली के मीटर से रखरखाव शुल्‍क नहीं ले सकतीं आरडब्‍ल्‍यूए, जानें पूरा मामला

फैसला- बिजली के मीटर से रखरखाव शुल्‍क नहीं ले सकतीं आरडब्‍ल्‍यूए, जानें पूरा मामला

इंदिरापुरम की इसी सोसाइ‍टी को लेकर फैसला दिया गया है.

इंदिरापुरम की इसी सोसाइ‍टी को लेकर फैसला दिया गया है.

आरडब्‍ल्‍यूए प्री पेड बिजली के मीटर से रखरखाव शुल्‍क नहीं ले सकती हैं. यह फैसला विद्युत उपभोक्‍ता व्‍यथा फोरम, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा दिया गया है. इस संबंध में गाजियाबाद, इंदिरापुरम स्थित राजहंस कुटुंभ निवासी सुशील कुमार ने फोरम में मामला दायर किया था. फोरम ने यह भी आदेश दिया है कि अभी तक वसूला गया अतिरिक्‍त शुल्‍क ब्‍याज सहित सोसाइटी के निवासियों को लौटाए जाए.

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हाइलाइट्स

विद्युत उपभोक्‍ता व्‍यथा फोरम ने दिया फैसला
आरडब्‍ल्‍यूए को दो माह का दिया समय

गाजियाबाद. रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (Residents Welfare Association) प्री पेड बिजली के मीटर (prepaid electricity meters) से सोसाइटी का रखरखाव शुल्‍क (maintenance charges) नहीं ले सकती हैं. यह फैसला विद्युत उपभोक्‍ता व्‍यथा फोरम, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (Paschimchal Vidyut Vitran Nigam Limited) द्वारा दिया गया है. गाजियाबाद, इंदिरापुरम स्थित राजहंस कुटुंभ निवासी सुशील कुमार ने इस संबंध में फोरम में मामला दायर किया था. फोरम ने यह भी आदेश दिया है कि अभी तक वसूला गया अतिरिक्‍त शुल्‍क ब्‍याज सहित सोसाइटी के निवासियों को लौटाए जाए. फोरम के इस फैसले से सोसाइटियों में रहने वाले हजारों लोगों को राहत मिलेगी.

गाजियाबाद में 200 से अधिक बहुमंजिला इमारतें हैं. इन इमारतों का रखरखाव आरडब्‍ल्‍यूए (एओए) करती है. आरडब्‍ल्‍यूए ने रखरखाव व बिजली के शुल्‍क के लिए प्रत्‍येक फ्लैट में प्री पेड मीटर लगा रखा है. इंदिरापुरम अहिंसा खंड एक स्थित राजहंस कुटुंभ निवासी सुशील कुमार इस मामले को विद्युत उपभोक्‍ता व्‍यथा निवारण फोरम ले गए थे. इसमें उन्‍होंने आरडब्‍ल्‍यूए और पॉवर कॉपरपोरेशन को वादी बनाया था.

सुशील कुमार ने बताया कि सोसाइटी में बिजली का लोड 1500 केडब्‍ल्‍यू का है. इस हिसाब से फिक्‍स चार्ज प्रति फ्लैट लेना चाहिए, लेकिन आरडब्‍ल्‍यू लोगों को 6 से 7 केडब्‍ल्‍यूए प्रति फ्लैट लोड दे ररखा है और इस तरह 4500 केडब्‍ल्‍यू के हिसाब से चार्ज वसूल करती है, जो गलत है. इसी आधार पर फोरम ने फैसला दिया है कि बिजली के मीटर से रखरखाव चार्ज नहीं वसूला जाए. साथ ही, यह भी फैसला दिया है कि पिछले 14-15 वर्षों से वसूले गए अतिरिक्‍त शुल्‍क फ्लैट मालिकों ब्‍याज के साथ वापस किया जाए. फोरम ने आरडब्‍ल्‍यूए को दो माह का समय दिया है, इसके बाद रिपोर्ट देनी होगी.

यह है फैसले की कॉपी.

फैसले की कॉपी.

यह है फैसला

यह परिवाद परिवादी की ओर से इस अनुरोध के साथ प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी संख्या-1, 2 व 3 को निर्देश दिया जाए कि यह प्रीपेड इलेक्‍ट्रीसिटी मीटर के माध्यम से कॉमन एरिया रखरखाव शुल्‍क वसूल न कर विभाग द्वारा आपूर्ति की जा रही विद्युत ऊर्जा अनिर्वाहित रूप से उपलब्ध कराये और विभाग को भुगतान की गयी फिक्स चार्ज की धनराशि के अनुसार ही निवासीगण से फिक्स चार्ज वसूल करें तथा इलेक्ट्रीसिटी अकाउण्ट का ऑडिट कराकर अधिक वसूल की गयी धनराशि को वापस किया जाए.

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फैसले से लोगों को होगी राहत

फोरम द्वारा दिए गए इस फैसले से गाजियाबाद और नोएडा की सोसाइटियों में रहने वाले हजारों लोगों को राहत मिलेगी. क्‍योंकि सभी सोसाइटियों में इसी तरह रखरखाव शुल्‍क वसूल करती हैं.

एओए फैसले को करेगी चैलेंज

गाजियाबाद फेडरेशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के संस्‍थापक आलोक कुमार बताते हैं कि अगर सभी सोसाइटी निवासी रखरखाव शुल्‍क और बिल नियमित रूप से जमा करें तो जरूर यह फैसला स्‍वागत योग्‍ग है, लेकिन प्रत्‍येक सोसाइटी में 25 से 30 फीसदी ऐसे लोग होते हैं जो मेंटीनेंस और बिजली का बिल नहीं देते हैं. इस वजह से प्रीपेड मीटर से बिजली और रखरखाव शुल्‍क लिया जाता है. एओए इस फैसले को चैलेंज करने की तैयारी कर रही है.

Tags: Electricity bill, Electricity Department, Ghaziabad News

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