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शाहीन बाग में बोलीं साधना रामचंद्रन- हमने कभी सड़क खुलवाने की कोशिश नहीं की
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Updated: February 22, 2020, 12:08 PM IST
शाहीन बाग में बोलीं साधना रामचंद्रन- हमने कभी सड़क खुलवाने की कोशिश नहीं की
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थों में से एक साधना रामचंद्रन. (फाइल फोटो)

साधना रामचंद्रन (Sadhana Ramachandran) ने शाहीन बाग (Shaheen Bagh) में कहा कि, 'हमने कभी नहीं कहा कि शाहीन बाग छोड़कर चले जाओ, रामलीला मैदान चले जाओ. मैंने कभी नहीं कहा कि पार्क में चले जाओ. ये गलतफहमियां हम लोगों को तोड़ती हैं. हमने कभी सड़क खुलवाने की कोशिश नहीं की. यह अफवाह थी.'

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  • Last Updated: February 22, 2020, 12:08 PM IST
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नई दिल्ली. नागरिकता कानून (Citizenship Act) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National Register of Citizens) के खिलाफ राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग (Shaheen Bagh) में पिछले साल 15 दिसंबर से प्रदर्शन किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थों में से एक साधना रामचंद्रन (Sadhana Ramachandran) प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए शनिवार को फिर दक्षिण-पूर्व दिल्ली के शाहीन बाग पहुंचीं. साधना ने शाहीन बाग में कहा, 'हमने कभी नहीं कहा कि शाहीन बाग छोड़कर चले जाओ, रामलीला मैदान चले जाओ. मैंने कभी नहीं कहा कि पार्क में चले जाओ. ये गलतफहमियां हम लोगों को तोड़ती हैं. हमने कभी सड़क खुलवाने की कोशिश नहीं की. यह अफवाह थी.'

'शाहीन बाग के लोग कभी गलत कदम नहीं उठाएंगे'
साधना ने आगे कहा कि, 'इस तरह की गलतफहमियां आपके आंदोलन को तोड़ती हैं. इन गलतफहमियों से हम लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन आप लोगों को नुकसान होगा. हम भी सोचते हैं कि, शाहीन बाग के लोग कभी गलत कदम नहीं उठाएंगे. अब हमें सोचना है, गलतफहमियां पालना चाहते हैं कि देश को सही रास्ते पर ले जाना चाहते हैं.  मैं कहती हूं- शाहीनबाग में खूबसूरत पार्क बनना चाहिए. मैं यह बाद के लिए कह रही हूं.'



देश के हर राज्य में हो रहा है इस कानून का विरोध
नागरिकता कानून (CAA) के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण देश में शरण लेने आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था. ऐसे सभी लोग भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस कानून के विरोधियों का कहना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने की बात कही गई है, इसलिए यह कानून धार्मिक भेदभाव वाला है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.

12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ लागू हो गया कानून
नॉर्थ-ईस्ट खासकर असम में नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों, आगजनी, कर्फ्यू लगने, इंटरनेट बंद होने के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस बिल पर 12 दिसंबर 2019 को हस्ताक्षर कर दिए थे. इसके बाद नागरिकता कानून, 1955 से संबंधित संशोधन देशभर में लागू हो गया. सरकार की अधिसूचना के अनुसार आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद देशभर में यह कानून लागू हो गया है.

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First published: February 22, 2020, 11:25 AM IST
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