हिंदी में अनामिका और संताली के लिए रूपचंद हांसदा को 2020 का साहित्य अकादेमी सम्मान

हिंदी के लिए कवयित्री अनामिका को मिला 2020 का साहित्य अकादेमी पुरस्कार.

संताली भाषा के लिए रूपचंद हांसदा के नाम की घोषणा हुई है. रूपचंद हांसदा को यह सम्मान उनके कविता संग्रह 'गुर दाक काशा दाक' के लिए दिया गया है.

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नई दिल्ली/रांची. साहित्य अकादेमी पुरस्कार 2020 (Sahitya Akademi Award 2020) की घोषणा कर दी गई है. इस बार हिंदी (Hindi) का यह सम्मान अनामिका (Anamika) को उनके कविता संग्रह 'टोकरी में दिगन्त : थेरीगाथा : 2014' के लिए मिला है. संताली भाषा के लिए रूपचंद हांसदा के नाम की घोषणा हुई है. रूपचंद हांसदा को यह सम्मान उनके कविता संग्रह 'गुर दाक काशा दाक' के लिए दिया गया है.

साहित्य अकादेमी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार इस बार यह 20 भाषाओं के लिए पुरस्कार की घोषणा की गई है. अकादेमी ने कहा है कि मलयालम, नेपाली, ओड़िआ और राजस्थानी भाषा में पुरस्कार बाद में घोषित किए जाएंगे. अकादेमी ने पुरस्कार देने के लिए 7 कविता-संग्रह, 4 उपन्यास, 5 कहानी-संग्रह, 2 नाटक, 1 संस्मरण और 1 महाकाव्य का चयन किया है.

मैथिली के लिए कमलकांत झा के कहानी संग्रह 'गाछ रूसल अछि', उर्दू में हुसैन-उल-हक को उनके उपन्यास ‘अमावस में ख्वाब’ को साहित्य अकादेमी सम्मान मिला. गुजराती कविताओं के लिए हरीश मीनाश्रु को उनके कविता संग्रह ‘बनारस डायरी’ के लिए यह सम्मान दिया गया है. अंग्रेजी में अरुंधति सुब्रह्मण्यम के कविता संग्रह ‘व्हेन गॉड इज़ ए ट्रैवलर’ के लिए जबकि बंगला के लिए मणिशंकर मुखोपाध्याय के संस्मरण 'एका एका एकाशी' को यह सम्मान मिला है.

उपन्यास विधा में नंदा खरे (मराठी), डॉ. महेशचन्द्र शर्मा गौतम (संस्कृत), इमाइयम (तमिल) और निखिलेश्वर (तेलुगु) को चुना गया है. पांच कहानी-संग्रहों के लिए इन्हें पुरस्कृत किया गया- अपूर्व कुमार शइकीया (असमिया), (स्व.) धरणीधर औवारी (बोडो), (स्व.) हृदय कौल भारती (कश्मीरी) और गुरदेव सिंह रूपाणा (पंजाबी). इसके अलावा ज्ञान सिंह (डोगरी) और जेठो लालवानी (सिंधी) को भी चुना गया है.

हिंदी में अनामिका को साहित्य अकादेमी का पुरस्कार दिया जाना हिंदी कविता की स्त्री को सम्मान दिया जाना है. दरअसल, अनामिका की कविताओं की स्त्रियां रची हुई नहीं लगतीं, अपने आसपास की कोई सामान्य सी स्त्री लगती है. लेकिन जब अनामिका अपनी कविताओं में इस स्त्री को लेकर आती हैं तो उसके परत-दर-परत को पाठकों के सामने रखती हैं, जिसमें हमें अपना दुख, अपना सुख, अपना संघर्ष और अपनी हताशा नजर आते हैं. उनकी कविताओं की स्त्रियां आपस में जब संवाद करती हुई सामने आती हैं, तो तमाम किताबी स्त्री विमर्श बौने पड़ने लगते हैं. हाल में प्रकाशित अनामिका का कविता संग्रह 'पानी को सब याद था' से आप जब गुजरेंगे तो महसूस करेंगे कि यह स्त्री जीवन का विशाल आख्यान है. इस आख्यान में हर वर्ग के स्त्री की कहानी है, उसके पदचाप हैं.

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