साकेत कोर्ट ने लगाई सरकार और पुलिस को फटकार, कहा- क्या महामारी में बिजनेस करना अपराध है ?

नवनीत कालरा केस में दिल्ली सरकार और पुलिस को फटकार, कोर्ट ने कहा- महामारी में बिजनेस करना गलत कैसे ?
 (सांकेतिक फोटो).

नवनीत कालरा केस में दिल्ली सरकार और पुलिस को फटकार, कोर्ट ने कहा- महामारी में बिजनेस करना गलत कैसे ? (सांकेतिक फोटो).

कोर्ट ने कहा कि महामारी के समय बिजनेस करना क्या कोई अपराध है? बाहर से सामान मंगाकर बेचना गलत कैसे है. कोर्ट में आरोपी व्यवसाई नवनीत कालरा के सहयोगियों की याचिका पर सुनवाई चल रही थी. साकेत कोर्ट ने नवनीत कालरा के खिलाफ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, जमाखोरी मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष को फटकार लगाई.

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नई दिल्ली. ऑक्सीजन ( Oxygen) कंसंट्रेटर की होर्डिंग और कालाबाजारी केस में मंगलवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली की साकेत कोर्ट ( Saket Court ) ने दिल्ली पुलिस और सरकार को फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि महामारी के समय बिजनेस करना क्या कोई अपराध है? बाहर से सामान मंगाकर गलत कैसे है. कोर्ट में आरोपी व्यवसाई नवनीत कालरा के सहयोगियों की याचिका पर सुनवाई चल रही थी. साकेत कोर्ट ने नवनीत कालरा के खिलाफ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, जमाखोरी मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष को फटकार लगाई. कहा कि सरकार ने गवाह के बयान के बारे में गलत टिप्पणी की है, जो केस डायरी में मौजूद नहीं है.

सरकारी वकील ने मंगलवार को साकेत कोर्ट को नवनीत कालरा मामले में कहा कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर होर्डिंग मामले में सरकार को धोखा दिया. क्योंकि वह आयात पर एमआरपी पर खुलासा करने में नाकाम रहे. जो पिछले साल जारी आदेश का उल्लंघन है. इस मामले पर कोई ने कई बारीक बिंदुओं पर सुनवाई करते हुए तर्क दिए. सरकार के प्रति नाराजगी दिखाते हुए हुए कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन में बिजनेस करना क्या कोइ अपराध है. मैं ये जानना चाहता हूं कि यदि कोइ बिजनेसमैन बहर से सामान मांगकर बेच रहा है तो ये गलत कैसे है. सरकार अगर खुद ही ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के रेट तय करने के लिए कोई नियम नहीं बना रही तो बिजनेसमैन को कैसे टारगेट किया जा सकता है.

कोई ने कहा कि बिजनेसमैन महामारी में कमाने के लिए कुछ कर रहा है तो वह अपराध के श्रेणी में कैसे आ सकता है. ऐसे मामलों में पुलिस किसी को पकडक़र क्या साबित करना चाहती है. कोर्ट ने कहा कि राज्य को अपने लोगों के प्रति निष्पक्ष होना जरूरी है. चाहे वो बिजनेसमैन ही क्यों न हो. शराब भी महामारी में बेची जा रही है, क्योंकि उससे आर्थिक फायदा होता है. जांच अधिकारी ने माना कि शिकायत कर्ता का बयान केस डायरी में नहीं है. इस पर मजिस्ट्रेट ने पुलिस और सरकारी वकील से कहा कि मैने केस डायरी मंगवाई है. कोर्ट ने सुनवाइ के दौरान कहा कि ऐसा कोई नियम ही नहीं है जो यह तय कर सके कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का रेट क्या होगा?

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कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या आपके पास ऐसा कोई सबूत है, जिसमें जो अपराधियों ने 70 हजार का रेट तय किया था उससे अधिक का बेच दिया हो. कोर्ट ने पूछा कि आज 11 मई को भी सरकार की तरफ से कोई गाइडलाइन या नोटिफिकेशन आया है, जिसमें ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के रेट तय किए गए हों. कोर्ट ने कहा कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के रेट को रेगुलेट करने के लिए अभी तक कोई फैसला क्यों नहीं लिया गया है.  इस बीच कोर्ट मे नवनीत कालरा के वकील ने कहा कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को पुलिस के कई अधिकारियों को भी मेरे द्वारा बेचा गया. और पैसों का ट्रांजेक् शन हमारे पास मौजूद है. सबकुछ लीगल तरीके से किया गया. कुछ भी गलत नहीं किया गया. लेकिन मुझे आरोपी बनाया गया. यदि सबकुछ लीगत था तो कालाबाजारी कैसे हुई.

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