ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर जमाखोरी केस: नवनीत कालरा की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला कल

दिल्ली पुलिस के वकील ने आरोपी नवनीत कालरा की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया.

दिल्ली पुलिस के वकील ने आरोपी नवनीत कालरा की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया.

Navneet Kalra Case: दिल्ली पुलिस के वकील ने आज सुनवाई के दौरान आरोपी नवनीत कालरा की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि WhatsApp ग्रुप पर कंसेंट्रेटर बेचे जा रहे थे. 18 हज़ार के कंसेंट्रेटर को 50 हज़ार या उससे कही ज्यादा 70 हज़ार तक बेचे जा रहे थे.

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नई दिल्ली. ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर जमाखोरी मामले पर साकेत कोर्ट आरोपी नवनीत कालरा की अग्रिम जमानत याचिका पर गुरुवार को फैसला सुनाएगी. वहीं आरोपी हितेश आरोपी की जमानत पर भी साकेत कोर्ट कल फैसला देगी. इसी बीच, साकेत कोर्ट ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की जमाखोरी मामले में चार आरोपियों सतीश सेठी, गौरव सूरी, गौरव खन्ना, विक्रांत को जमानत दे दी. पचास हजार के निजी मुचलके पर जमानत दी. दिल्ली पुलिस के वकील ने आज सुनवाई के दौरान आरोपी नवनीत कालरा की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि WhatsApp ग्रुप पर कंसेंट्रेटर बेचे जा रहे थे. 18 हज़ार के कंसेंट्रेटर को 50 हज़ार या उससे कही ज्यादा 70 हज़ार तक बेचे जा रहे थे. ये कोरोना काल में धोखा है. इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने कहा की अभी जांच चल रही है, 420 का मुकदमा बनता है. 7 साल की सजा है. लिहाजा, अग्रिम जमानत नहीं मिलनी चाहिए.

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कहा कि उनके पास एक शख्स ने ईमेल करके शिकायत की है. ईमेल को कोर्ट को दिल्ली पुलिस ने दिखाया. दिल्ली पुलिस ने कहा कि सभी कंसेंट्रेटर ऐप के जरिये नहीं बेचे जा रहे थे. पुलिस के तरफ से कोर्ट में कहा गया कि आरोपी नवनीत कालरा जो कह रहे हैं कि फतेहपुरी एसएचओ से उन्होंने कलाबाजरी की शिकायत की, ये गलत है. जिस नंबर पर WhatsApp किया और कोर्ट को स्क्रीन शॉट दिखा रहे हैं, वो एसएचओ का नम्बर नहीं है.

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वहीं आरोपी नवनीत कालरा के तरफ से कहा गया कि इस देश मे व्यापार करना, कब से अपराध हो गया. वो व्यापार कर रहे थे. उन्होंने जीएसटी का भुगतान किया. उनके पास सब क्लियरेन्स है. ऐप के जरिये कंसेंट्रेटर बेचा गया. उनकी इमेज को खराब किया जा रहा है. उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के 3 दिन पहले खुद एसएचओ फतेहपुर से उन्होंने कलाबाजरी की शिकायत की. खान मार्किट में इसलिए कंसेंट्रेटर रखा गया था ताकि सबके लिए सहूलियत हो. सरकार के तरफ से कीमतों का निर्धारण नहीं किया गया था. एमआरपी प्राइस सरकार के तरफ से निर्धारित नहीं की गई थी.

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