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निर्भया कांड: केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जस्टिस वर्मा कमेटी पर मांगा जवाब
Delhi-Ncr News in Hindi

एहतेशाम खान | News18Hindi
Updated: January 20, 2020, 1:01 PM IST
निर्भया कांड: केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जस्टिस वर्मा कमेटी पर मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई क्यूरेटिव पिटीशन

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी (Justice JS Verma Committee) की रिपोर्ट को लागू करने की याचिका पर नोटिस जारी किया. निर्भया घटना के बाद गठित इस कमेटी ने सरकार को कई कदम उठाए जाने की सिफारिश की थी.

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  • Last Updated: January 20, 2020, 1:01 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी (Justice JS Verma Committee) की रिपोर्ट को लागू करने संबंधित याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. निर्भया घटना के बाद गठित इस कमेटी ने सरकार को कई कदम उठाने की सिफारिश की थी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है. बता दें, निर्भया गैंग रेप की घटना के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने जस्टिस वर्मा कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी ने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध से संबंधित कानून की समीक्षा की थी. केंद्र सरकार ने 2013 में संबंधित कानून में संशोधन भी किया था. जिसमें बलात्कार जैसे जघन्य मामलों में मौत की सजा देने का प्रावधान किया गया था. वहीं याचिकाकर्ता कानून के छात्र श्रीनिवास गौड़ ने तर्क दिया है कि सरकार इन सिफारिशों को लागू नहीं कर रहा है.

जानिए क्यों बनाया गया था जस्टिस वर्मा कमेटी
इस कमेटी का गठन यौन अपराधों से संबंधित आपराधिक कानूनों में जरूरी संशोधन के लिये  देने के लिए किया गया था. इस कमेटी ने 23 जनवरी 2013 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी.

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इस कमेटी ने 23 जनवरी 2013 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी. (प्रतीकात्मक फोटो)


3 सदस्यों की कमेटी हुई थी गठित
इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जे.एस वर्मा कर रहे थे. कमेटी के अन्य सदस्यों में हाई कोर्ट की सेवानिवृत जज जस्टिस लीला सेठ और देश के पूर्व सोलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम भी शामिल थे. कमेटी की रिपोर्ट में रेप, यौन उत्पीड़न, मानव तस्करी, बच्चों के यौन उत्पीड़न की घटनायें, पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण के अलावा पुलिस और शिक्षा से संबंधित सुधार प्रक्रिया से संबंधित कानूनों पर सिफारिशें शामिल थी.

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First published: January 20, 2020, 12:29 PM IST
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